
हमीरपुर कय रामरतन प्रजापति सरकारी योजनान कय मदद से ऊसर जमीन मा फल उगाय के अउर नर्सरी बनाय के पूरै इलाका खतिन मिसाल बन गए हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार कय पहिल प्राथमिकता हमेसा से ई रही है कि प्रदेश कय किसानन का माली तौर पे मजबूत बनावा जाय अउर ओन्हन का खेती कय नई-नई तकनीकन से लैस कीन जाय। प्रदेश सरकार कय ओर से चलावल जाय वाली ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना’, ‘मिशन बागवानी’ अउर ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ जइसन खास योजना न केवल किसानन का सुरक्षा दे रही हैं, बल्कि ओन्हन का पुरान ढर्रे वाली खेती से निकार के एक उद्यमी कय रूप मा खड़ा कर रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार कय ई सोच है कि तकनीक अउर साधनन कय सही मेल बैठा के गाँव कय माली हालत बदली जाय। खास तौर पे बुंदेलखंड जइसन इलाकन मा, जहाँ माटी-पानी कय वजह से खेती बहुतै मुस्किल रही है, उहाँ प्रदेश सरकार कय खास पैकेज अउर योजनान से किसानन कय जिनगी मा बड़ा बदलाव देखे का मिलत है। जिला प्रशासन कय मदद से ई योजनान कय लाभ समाज कय सबसे आखिरी पायदान पे खड़े मनई तक पहुँचावै कय संकल्प अब जमीन पे उतर चुका है।
हमीरपुर जिला, जेका आपन कड़ी धूप अउर पथरीली माटी खतिन जानल जात है, उहाँ खेती कय क्षेत्र मा एक अइसन बदलाव देखै का मिला है जे भविष्य कय नई राह देखाए दियिस है। सुमेरपुर विकास खंड कय विवांर गाँव कय रहय वाले रामरतन प्रजापति ई बदलाव कय एक मजबूत खम्भा बनिके उभरे हैं। कक्षा 5 तक पढ़ल होवय के बावजूद, रामरतन जी आपन पक्का इरादा अउर सरकारी योजनान कय सही इस्तेमाल से ई साबित कय दिहिन कि कुछ नया करै खतिन केवल डिग्री कय नहीं, बल्कि सही नजरिया कय जरूरत होत है। साल 1980 के दशक मा आई मुसीबत ने उनके परिवार का बहुतै तंगी मा ढकेल दियिस रहा, मुला ओन्हन हार नाहीं मानिन। जिला प्रशासन कय खेती अउर बागवानी के जानकारन से लगातार मिलत-जुलत रहिन अउर आपन दुई हेक्टेयर ऊसर जमीन कय कायापलट करै कय फैसला कीन।
सरकार कय ‘एकीकृत बागवानी विकास मिशन’ योजना के तहत ओन्हन तकनीकी ट्रेनिंग लीन अउर मौसमी फल कय बागवानी कय नीव धरीन। बागवानी सुरु करतय सबसे बड़ी चुनौती सिंचाई कय रही। बुंदेलखंड मा पानी कय किल्लत हमेसा से एक बड़ी समस्या रही है, जेकर हल उत्तर प्रदेश सरकार ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ से निकारिस। ई योजना के तहत रामरतन जी का ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई प्रणाली खतिन तगड़ा अनुदान मिला। जिला प्रशासन कय देख-रेख मा ओन्हन आपन खेतन मा ई सिस्टम लगाइन, जेसे न केवल पानी कय बचत भई, बल्कि खाद भी सीधे पेड़न कय जड़ तक पहुँचै लाग। ई तकनीक से उनके बाग लहलहाय लाग अउर फल कय क्वालिटी मा भी बहुत सुधार आवा।
रामरतन जी कय कामयाबी कय सफर केवल आपन खेत तक नाहीं रहा। ओन्हन महसूस कीन कि इलाका मा नीक क्वालिटी कय पेड़-पौधन् कय बहुत कमी है, जेसे दूसर किसान बागवानी नाहीं कय पावत हैं। ई जरूरत का समझत हुए ओन्हन उद्यान विभाग कय सहयोग से एक नर्सरी बनाइन। ‘नर्सरी स्थापना प्रोत्साहन योजना’ के तहत ओन्हन का जरूरी पइसा अउर तकनीक मिली। आज उनके नर्सरी से न केवल हमीरपुर, बल्कि परोसी जिलन कय किसान भी नीक पौधा लै जात हैं। अब ई नर्सरी इलाका खतिन जानकारी कय एक बड़ा केंद्र बन चुकी है।
ओन्हन ‘परम्परागत कृषि विकास योजना’ कय फायदा उठावत हुए जैविक खाद अउर प्राकृतिक कीटनाशक कय इस्तेमाल सुरु कीन, जेसे खेती कय लागत कम भई अउर जमीन कय ताकत भी बनी रही। जिला प्रशासन कय कोसिस से ओन्हन का ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ मिला, जेकरे आधार पे ओन्हन खेत मा सही खाद-पानी कय इस्तेमाल कीन। आज रामरतन जी का देखिके लगभग 200 से ज्यादा किसान बागवानी अपनाय चुके हैं। हमीरपुर कय ई अगुआ किसान कय मेहनत का देखत हुए ओन्हन का कई जगह सम्मानित भी कीन गवा है।
उत्तर प्रदेश सरकार कय मंशा कय मुताबिक, खेती अब केवल पेट भरै कय साधन नहीं, बल्कि मुनाफ़ा कय व्यापार बनती जा रही है। रामरतन जी अब मोबाइल ऐप कय जरिए मौसम कय जानकारी अउर बाजार भाव कय निगरानी करत हैं। उनकी ई सफलता ई बात कय गवाह है कि अगर सरकारी सहयोग अउर किसान कय अटूट मेहनत मिल जाय, तौ बुंदेलखंड कय पथरीली जमीन भी सोना उगल सकत है।
