
चित्रकूट जिले क मानिकपुर तहसील मा आवे वाला पाठा इलाका हमेशा से खेती-किसानी के तईं बउत कठिन रहा है। यहाँ क पथरीली जमीन, ऊँच-खाल रस्ता अउर पानी क कमी के नाते किसानन क बउत दुक्ख उठावे क परत रहा। ई इलाका मा एक ‘जरेरा टैंक’ (तालाब) है, जउन बउत साल पहिले किसानन क पानी देवे के तईं बनावा गय रहा। करीब 0.350 किलोमीटर लंबा अउर 2.69 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी रोकइ क क्षमता वाला ई तालाब शुरू मा तौ बउत काम आवा, लेकिन धीरे-धीरे एकरी हालत बिगड़ि गई।
का रही असली समस्या? बरखा मा ई तालाब लबालब भर तौ जात रहा, लेकिन जमीन के भीतर चट्टानन मा दरार होवे के नाते पानी धीरे-धीरे रिस के नीचे चला जात रहा। एकर नतीजा ई होत रहा कि नवंबर आवत-आवत तालाब एकदम सूखि जात रहा। रबी क फसल (गेहूँ-चना) के समय जब पानी क सबसे जादा जरूरत होती रही, तब किसानन क हाथ खाली रहत रहे। पानी न होवे से किसान जादा खेत मा बुआई नाहीं कइ पावत रहे, जेसे उनकी कमाई कम होइ जात रही अउर आसपास के हैंडपंप-कुआँ भी सूखि जात रहे।
वैज्ञानिक तकनीक से मिला समाधान: सिंचाई विभाग जब एकरी जाँच कीहिस, तौ पता चला कि तालाब क पानी सोखइ क असली वजह चट्टानन क दरारें हैं। खाली मिट्टी भर देवे से काम नाहीं बनत रहा, ओकरे तईं ‘कर्टेन ग्राउटिंग’ (Curtain Grouting) नाम क एक वैज्ञानिक तकनीक अपनाई गई।
कइसे भय काम?
- ड्रिलिंग अउर भराई: तालाब के उस हिस्से मा जहाँ से पानी रिसत रहा, वहाँ तीन लाइनों मा गहरे छेद (ड्रिल) कीन गय। इन छेदन क गहराई 4 मीटर से 7 मीटर तक रही।
- सीमेंट क घोल: इन छेदन मा बउत तेज दबाव (Pressure) के साथ सीमेंट क घोल (Slurry) भरा गय, ताकि उ चट्टानन क हर पतली से पतली दरार मा घुस के ओका पूरी तरह बंद कइ देई।
- चुनौतियाँ: काम के दौरान वहाँ बउत कीचड़ रहा, जेसे मशीन लगावे मा दिक्कत आवत रही। पहिले कीचड़ हटावा गय, फिर पक्की मिट्टी डाल के आधार बनावा गय, तब जाके ग्राउटिंग क काम पूरा भय।
नतीजा: खुशहाल भये किसान जून 2024 तक ई काम पूरा होइ गय अउर एकर असर बउत नीक रहा। अब तालाब क पानी जमीन मा रिसना बंद होइ गय है अउर तालाब साल भर भरा रहत है।
- खेती मा फायदा: निही चिरइया ग्राम पंचायत अउर आसपास के गाँव के किसानन क अब सिंचाई के तईं भरपूर पानी मिलत है। साल 2024-25 मा रबी क फसल के दौरान 338 हेक्टेयर जमीन मा सिंचाई क पक्का इंतजाम भय, जउन पहिले नाहीं हो पावत रहा।
- पर्यावरण अउर जीव-जंतु: तालाब मा पानी रुकइ से आसपास क हरियाली बढ़ी है अउर भूजल स्तर (Groundwater level) भी ऊँच भय है, जेसे कुआँ अउर हैंडपंप फिर से पानी देवे लागे हैं। जंगली जानवरन अउर चिरइ-चुनमुन के तईं भी अब पानी क कउनो कमी नाहीं है।
जरेरा टैंक क ई सफलता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के उस संकल्प क हिस्सा है, जेमा गाँव अउर किसान क आत्मनिर्भर बनावे क सपना है। आज जरेरा टैंक खाली एक तालाब नाहीं है, बल्कि पाठा के किसानन के तईं उम्मीद क एक नई किरण बन चुका है।




