संपादकीय

भारत अउर मोदी के बारे में ‘वाशिंगटन पोस्ट’ की सोच बदल गई, PM का मानल गय दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता

अमेरिका के बड़वा अखबार ‘वाशिंगटन पोस्ट’ अक्सर त भारत के खिलाफ लेख छापत रहल है, बाकिर अब उ एक अइसन मिसाल पेश कीन है जवन कवनो अजूबे से कम नाहीं है। ई अखबार अब भारत के बारे में बड़ बड़ नीक बातन लिखल है। इ अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण से भारत की राजनीति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अउर भारतीय जनता पार्टी की बढ़त ताकत पर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा गय है।

लंबे समय से पश्चिमी देशन के मानय वाला अउर भारत के विपक्षी दल ई सोवत रहे कि भारत जइसन ढेर विविधता वाला देश में कवनो मजबूत नेता की राजनीति की कवनो सीमा होई अउर बाद में ई राजनीति कमजोर पड़ जाई। बाकिर जवन अभी हाल में भवा है, उ ई सब धारणा क गलत साबित कर दिहिस है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत का त एक ऐतिहासिक मोड़ मानय जात है।

पश्चिम बंगाल त बहुत दिनन से अपनी अलग पहचान, संस्कृति अउर परंपरा खातिर जानल जात है। यहाँ त हमेशा क्षेत्रीय दलान का ही दबदबा रहल है अउर लोग सोचत रहे कि उत्तर भारत अउर हिंदी पट्टी वाली भारतीय जनता पार्टी खातिर यहाँ पांव पसारब आसान ना होई। बाकिर अभी के चुनाव के नतीजा ने ई पूरी सोच बदल के रख दिहिस है। (इसे भी पढ़ें: West Bengal में BJP सरकार, PM Modi बोले- गुरुदेव टैगोर जयंती पर यह ‘सुखद संयोग’)

विश्लेषण में कहल गय है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अउर उनकी पार्टी का भारतीय जनता पार्टी की बढ़त के आगे बहुत मजबूत दीवाल मानल जात रहा। ई भी कहल जात रहा कि भारत की भाषा अउर संस्कृति की विविधता कवनो एक पार्टी का पूरे देश में स्वीकार ना होवे दी। बाकिर पश्चिम बंगाल में जीत के ई साफ कर दिहिस कि भारतीय जनता पार्टी अब उन सब बाधाओं का पार कर रही है जवन पहले उनकी सीमा मानल जात रही।

लेख में भारतीय जनता पार्टी के संगठन के बहुत बड़ाई कीन गय है। उहा के सदस्य संख्या दुनिया की कवनो भी राजनीतिक पार्टी से ज्यादा बताई गय है। विश्लेषण के मुताबिक पार्टी के लगभग चौदह करोड़ सदस्य हैं, जवन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से भी ज्यादा है। इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानव इतिहास में सबसे ज्यादा समर्थन पावे वाला नेता मानल गय है। पूरी दुनिया के सर्वे में उनकी लोकप्रियता हमेशा सबसे ऊपर रही है।

देखा जाय त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब सिर्फ भारत के नेता नाहीं रहि गए हैं, बल्कि उ दुनिया की राजनीति में एक मजबूत अउर फैसला लेवे वाला नेता के रूप में सामने आए हैं। दुनिया के कई देशन में भारत की बढ़ती साख के पीछे मोदी की कूटनीति, मजबूत फैसला लेवे की शक्ति अउर वैश्विक मंचों पर भारत की दमदार मौजूदगी का बहुत बड़ हाथ है।

खास बात ई है कि जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जइसन बड़े-बड़े नेतान की लोकप्रियता गिर रही है, तउ वहीं प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता दिन-ब-दिन और मजबूत होत दिखात है। अंतरराष्ट्रीय सर्वे अउर जनमत के हिसाब से मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेतान में सबसे ऊपर हैं। ई संकेत देत है कि भारत का नेतृत्व अब सिर्फ अपने देश तक नाहीं है, बल्कि दुनिया की शक्ति अउर राजनीति में भी उनकी भूमिका बहुत मजबूत होत जा रही है।

हम आपन का ई भी बताइ देईं कि वाशिंगटन पोस्ट में आलोचनाओं का भी जिक्र कीन गय है। बाकिर फिर भी विश्लेषण के निष्कर्ष ई है कि सिर्फ चुनाव के मैनेजमेंट या संस्थाओं के असर से भारतीय जनता पार्टी की जीत का नाहीं समझल जा सकत। पार्टी ने कुछ दशकन में छोटे से संगठन से निकल के देश के 21 राज्यां में सरकार बनाय लीन है। उहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी, जवन आजादी की लड़ाई लड़ल रही, अब बहुत कम राज्यां तक सिमट के रहि गई है।

लेख में कांग्रेस अउर भारतीय जनता पार्टी के बीच संगठन के फर्क का बहुत मजबूती से देखल गय है। जहवां कांग्रेस का आजादी की विरासत अउर बड़े घरानन का साथ मिलल, उहीं भारतीय जनता पार्टी ने जमीन पर मेहनत कइके अउर संगठन बनाय के अपनी स्थिति मजबूत कीन है। पार्टी ने जात-पात, भाषा अउर धर्म से ऊपर उठके सब का साथ ले के चलल है। इस विस्तार के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका भी बहुत बड़ है। सौ साल पुराने इस संगठन ने लाखों कार्यकर्ता अउर कई सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से एक मजबूत वैचारिक ढांचा तैयार कीन है।

विश्लेषण में ई भी कहल गय है कि मजदूर संगठन, स्कूल नेटवर्क, छात्र संगठन अउर धार्मिक मंचन के जरिये ई विचारधारा समाज के हर कोना तक पहुँच गई। इसी मजबूत सामाजिक जाल, रणनीति अउर संगठन के अनुशासन ने भारतीय जनता पार्टी की जीत की नींव तैयार कीन है।

दुनिया के स्तर पर भी भारत की बढ़ती ताकत का इस राजनीति से जोड़ल गय है। लेख में भारत का दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश, दूसरी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति अउर तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बताय गय है। ई भी कहल गय है कि अगर एशिया में चीन का टक्कर देवे की ताकत कवनो देश में है, त उ भारत है।

विश्लेषण का आखरी निष्कर्ष यही है कि भारतीय जनता पार्टी अउर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक जवन राजनीतिक पतन की उम्मीद कर रहे हैं, उ फिलहाल कतई नाहीं दिखत है। उलटा, अभी के हालात ई बतावत हैं कि आने वाले सालन में भारत की राजनीति, दुनिया में उनकी भूमिका अउर एशिया का संतुलन इसी नेतृत्व अउर इसी धारा के हिसाब से तय होई।

-नीरज कुमार दुबे

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