उत्तर प्रदेश क उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय जइसन बड़हन नेता बच्चा क नर्सरी कवितायन पे सवाल उठाए दिहिन ह, जवने क बाद सोशल मीडिया पे बड़हन बहस छिड़ि गय है। योगेंद्र उपाध्याय एक कार्यक्रम म कहेन कि कुछ मशहूर अंग्रेजी नर्सरी कविताएं भारतीय समाज अउर संस्कृति क हिसाब से नीक नाहीं हैं।
मंत्री जी ‘जॉनी जॉनी यस पापा’ अउर ‘रेन रेन गो अवे’ जइसन कवितायन क उदाहरण देत भय कहेन कि इ सब बच्चा क गलत संदेश देत हैं अउर उनकर आदत बिगाड़ि सकत हैं। उनके मुताबिक, ‘जॉनी जॉनी यस पापा’ म बच्चा आपन माता-पिता से झूठ बोलत है, जवने से बच्चा गलत सीख सीखत है। वहीं, ‘रेन रेन गो अवे’ पे उ कहेन कि इ कविता म बच्चा क निजी खुशी क महत्तव दिहा गय है, जबकि हमार भारतीय संस्कृति म तौ बरखा क खेती अउर जीवन क खातिर बहुत जरूरी मानल जात है।
योगेंद्र उपाध्याय ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ क बात करत भय कहेन कि पढ़ाई म अइसन मूल्य क बढ़ावा दीन जाए चाही जउन पूरा समाज क भलाई क बात करैं। उनके हिसाब से कुछ विदेशी कविताएं बच्चा म स्वार्थ क भावना पैदा करत हैं, जउन हमार भारतीय परंपरा से मेल नाहीं खात।
इ बयान क सामने आवै क बाद सोशल मीडिया पे लोगन क अलग-अलग राय है। कुछ लोग मंत्री जी क समर्थन करत हैं कि बच्चा क आपन संस्कृति से जोड़ना जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ कई लोग इ बात क फालतू मुद्दा बतावत हैं अउर कहत हैं कि शिक्षा क और बड़हन समस्यायन पे ध्यान दीन जाए। कुछ लोगन क कहना है कि इ कविताएं तौ आपन समय क हिसाब से लिखी गइ रहीं, ओका भारतीय समाज से सीधा जोड़ना ठीक नाहीं है। कुछ लोग तौ तंज कसते भय कहत हैं कि अब अउर कविता अउर कहानी पे भी सवाल उठे लागी।
शिक्षा विशेषज्ञन क मानब है कि पढ़ाई म भारतीय संस्कृति अउर मूल्य क सामिल करना तौ जरूरी है, लेकिन दुनिया भर क जानकारी क पूरी तरह से हटा देना भी सही समाधान नाहीं है। कुल मिलाय के बात इ है कि अब इ मामला बस नर्सरी कविता तक सीमित नाहीं है, बल्कि शिक्षा क स्वरूप, संस्कृति अउर वैश्विक प्रभाव क बीच संतुलन बनावै क लेके एक बड़हन बहस छिड़ि गय है, जवने पे सब आपन राय रखत हैं।