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जबलपुर बरगी बांध क्रूज हादसा: एमपी सरकार करायी न्यायिक जांच, रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी के हाथ में कमान

मध्य प्रदेश सरकार जबलपुर के बरगी बांध में भये भयंकर क्रूज हादसा के गंभीरता क देखत भये एकर न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) के आदेश दइ दिहे अहै। इ दुखद घटना में 13 लोगन क असमय जान चली गई रही। सरकार इ मामला के तह तक जाय अउर भविष्य में अइसन घटना न होय, एकर खातिर रिटायर्ड हाई कोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी के अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक आयोग बनाय अहै। राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग से जारी अधिसूचना के अनुसार, आयोग के आपन जांच तीन महीना के भीतर पूरा कइके विस्तृत रिपोर्ट सरकार क सौपइ होई।

जांच खातिर निर्धारित 5 मुख्य बिंदु

न्यायिक आयोग खाली हादसा के कारण ही न पता करी, बल्किन राज्य में जल परिवहन के सुरक्षा व्यवस्था क भी सुधारि। जांच के मुख्य बिंदु इ अहैं:

जवाबदेही तय करब: हादसा के असली कारण क पता लगावल अउर जौन लोग जिम्मेदार अहैं, उनकर जवाबदेही तय करब।

राहत कामन की समीक्षा: दुर्घटना के तुरंत बाद भये बचाव काम (Rescue Operation) अउर राहत उपायन के पर्याप्तता की जांच करब।

सुरक्षा ऑडिट अउर प्रमाणीकरण: पूरे प्रदेश में चलत क्रूज, नाव अउर जल क्रीड़ा गतिविधि का ऑडिट करब। साथ ही, ‘अंतर्देशीय जलयान अधिनियम, 2021’ अउर ‘NDMA नाव सुरक्षा दिशानिर्देश, 2017’ के तहत नाव/जहाजन के सर्टिफिकेट खातिर एक मजबूत प्रणाली बनायब।

समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP): पूरे राज्य में नाव अउर क्रूज के संचालन अउर रख-रखाव खातिर एक जैसी SOP तय करब ताकि सुरक्षा में कउनो ढिलाई न रहै।

त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT): उन सब पर्यटन स्थल अउर जलाशय पर ‘क्विक रिस्पांस टीम’ बनायब जहवा जल परिवहन या खेल-कूद होथै।

हादसा कइसे भवा?

इ बात नोट करै वाली अहै कि 30 अप्रैल के जबलपुर के बरगी बांध में एक क्रूज नाव पलट गई रही। रिपोर्ट के अनुसार, इ हादसा तब भवा जब तेज हवा अउर भयंकर तूफान के कारन जलाशय में बड़-बड़ लहर उठे लगी। हादसा के समय क्रूज पर कुल 41 लोग सवार रहे। जहवा 28 लोगन क सुरक्षित बचा लिहा गवा, वहीं 13 लोगन की इ दुखद घटना में जान चली गई। घटना पर दुख जतात भये, मुख्यमंत्री मोहन यादव मृतकन के परिवारन क 4-4 लाख रुपया के अनुग्रह राशि (ex-gratia) देय के घोषणा किहे अहैं।

एक न्यायिक आयोग क एही से महत्वपूर्ण मानल जाथै, काहे से कि एकर सार्वजनिक विश्वसनीयता अउर संस्थागत गरिमा, कउनो भी साधारण विभागीय जांच से बहुत ज्यादा होथै।

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