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Explained PM Modi Gold Appeal: आखिर PM Modi काहे कहिन कि एक साल तक सोना न खरीदो? का होई सोनारन क?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह अपील कि भारत के लोग एक साल तक बियह-शादी में सोना न खरीदें, सुनइया का शायद पहले थोड़ अजीब लाग हो – खासकर अइसन देस में, जहाँ सोना परंपरा, बचत अउर घर-परिवार क उत्सव से गहराई से जुड़ा अहै। लेकिन इ बियान क पीछे एक बड़ी आर्थिक चिंता छिपी अहै: दुनिया भर में ऊर्जा क संकट क दौरान भारत क विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) पर पड़त दबाव अउर कमजोर होत रूपया।

प्रधानमंत्री क इ टिप्पणी तब आई, जब मिडल ईस्ट में चलत लड़ाई अउर दुनिया क सबसे जरूरी तेल शिपिंग रास्तन में से एक – स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ – क आसपास बढ़त तनाव क कारन कच्चा तेल (crude oil) क दाम तेजी से बढ़ गएन अहै। हाल क कुछ हफ्तान में कच्चा तेल क दाम लगभग $70 प्रति बैरल से बढ़कर लगभग $126 प्रति बैरल तक पहुँच गएन अहै, जवने से भारत क ‘इम्पोर्ट बिल’ (आयात बिल) काफी बढ़ गया अहै। ईंधन क दाम में तुरन्त बढ़ोत्तरी क एलान किए बिना, PM मोदी बार-बार पेट्रोल अउर डीजल क खपत कम करय अउर विदेशी मुद्रा बचवय क जरूरत पर जोर दीन अहै। प्रधानमंत्री कहेन, “पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल बहुत महँगा होइ गवा अहै। इ हम सब क जिम्मेदारी अहै कि पेट्रोल-डीजल खरीदय पर खर्च होवय वाली विदेशी मुद्रा का, पेट्रोल-डीजल बचाकर बचवल जाय।” लेकिन एक अउर अपील रही, जवने पर सबकर ध्यान गय। PM मोदी कहेन, “हम लोगन से अपील करत अही कि उ एक साल तक बियह-शादी बर सोना न खरीदें।”

तेल संकट क दौरान सोना समस्या काहे बन जात अहै?

आर्थिक नजरिया से देखय त भारत बर सोना अउर कच्चा तेल में एक बड़ी समानता अहै: दुनो चीज ज्यादातर बहरी देस से मंगावल जात अहै (आयात) अउर इनका भुगतान अमेरिकी डॉलर में करय का होत अहै। भारत आपन कच्चा तेल क जरूरत क लगभग 85% हिस्सा बाहर से मंगावत अहै, अउर साथ ही उ दुनिया क सबसे बड़े सोना मंगावय वालन में से एक अहै। इसका मतलब इ अहै कि जब: कच्चा तेल क दाम तेजी से बढ़त अहै, अउर सोना क आयात भी ज्यादा बना रहत अहै, त भारत का आपन आयात क भुगतान करय बर बहुत ज्यादा डॉलर क जरूरत पड़त अहै। इसे मुद्रा बाजार में डॉलर क मांग बढ़ जात अहै अउर रूपया पर दबाव पड़त अहै।

रुपया क सेहत पर संकट

अर्थशास्त्र क सरल नियम क अनुसार, जब डॉलर क मांग बढ़त अहै, त रूपया कमजोर होत अहै। चालू खाता घाटा (CAD): जब हम निर्यात से कम कमावत अही अउर आयात पर ज्यादा खर्च करत अही, त इ घाटा बढ़ जात अहै। तेल क ऊँच दाम पहिले ही रूपया का ऐतिहासिक निचली स्तर पर धकेल दीन अहै। विदेशी मुद्रा भंडार: अगर करोड़ों भारतीय परिवार एक साथ सोना खरीदत अहैं, त विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) पर दबाव बढ़त अहै, जवन देस क आर्थिक स्थिरता बर जोखिम भरा अहै।

‘वैकल्पिक खर्च’ बनाम ‘अनिवार्य खर्च’

सरकार तेल क आयात का पूरी तरह नहीं रोक सकत काहेकि इ परिवहन, उद्योग अउर बिजली बर बहुत जरूरी अहै। लेकिन सोना का अक्सर ‘वैकल्पिक खर्च’ (Discretionary Spending) मानल जात अहै। रणनीति: सरकार चाहत अहै कि संकट क इ दौर में डॉलर क इस्तेमाल ‘ईंधन’ जइसन जरूरी चीज बर होय, न कि ‘सोना’ जइसन चीज बर जवने का कुछ समय बर टारल जा सकत अहै।

महँगाई क दुष्चक्र

कमजोर रूपया केवल तेल अउर सोना का ही नहीं, बल्कि हर उ चीज का महँगा कय देत अहै जवन हम बाहर से मंगावत अही (जइसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, दवाई आदि)। अगर सोना क मांग कम होत अहै, त रूपया का स्थिर करय में मदद मिलि। स्थिर रूपया देस क भीतर महँगाई (Inflation) का काबू में रखय बर जरूरी अहै।

बचत ही अब ‘देशभक्ति’ अहै

प्रधानमंत्री क इ अपील केवल बियह-शादी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इ ‘आर्थिक राष्ट्रवाद’ क एक संदेश रहा। मिडल ईस्ट में होर्मुज जलडमरूमध्य क नाकाबंदी अउर लड़ाई क कारन जवन दुनिया भर में अनिश्चितता पैदा भई अहै, ओसे भारत का बचवय बर नागरिकन से मदद मांगा गया अहै। “एक परिवार क खरीदारी भले ही छोटी लागय, लेकिन 140 करोड़ लोगन क सामूहिक बचत भारत क विदेशी मुद्रा भंडार क ढाल बन सकत अहै।”

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