“समय क देवी, अंधकारमयी, जुगन क चकरी घुमावती हय, धीरे-धीरे मुला एकदम पक्का…” इ पोस्ट 4 मई का मशहूर अर्थशास्त्री संजीव सान्याल कइती से भाजपा क बंगाल चुनाव मा ऐतिहासिक जीत के बाद कीन गय। इ रहस्यमयी पोस्ट का बंगाल के बदलत राजनीतिक माहौल क इशारा माना जात हय। कुछ मनई तौ एका सत्ता के गलियारा मा उनके आवे क संकेत मानिन, काहे से अइसन चर्चा रही कि भाजपा के लगे बंगाल क अर्थव्यवस्था संभालय बरे कउनो मजबूत आर्थिक योजना नाहीं हय। वइसे भी, बहुत कमै मनई जानत हय कि सान्याल खुदै एक बंगाली हयँ।
अबहीं तक बंगाल मा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथे खाली पांच मंत्रिन शपथ लीन हय। वित्त मंत्रालय के साथे-साथे गृह, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग अउर वाणिज्य मंत्रालय क कामकाज अभी सुवेंदु क हाथे मा हय। भाजपा सरकार के सोझवा दुविधा इ हय कि उनके पास कउनो अइसन विधायक नाहीं हय जेका अर्थव्यवस्था क बड़ी जानकारी होय। एही बीच, ‘द टेलीग्राफ’ क एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) के सदस्य सान्याल वित्त मंत्री बनय की दौड़ मा सबसे आगे हयँ।
भाजपा क नौकरशाहन के साथै प्रयोग
असल मा, भाजपा बरे अनुभवी नौकरशाहन का बड़े राजनीतिक पद दइब कउनो नई बात नाहीं हय। विदेश मंत्री एस जयशंकर अउर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी एकर सबसे बढ़िया उदाहरण हयँ। एकर इशारा साफ हय। सुवेंदु के शपथ ग्रहण समारोह मा सान्याल का पुरानी बंगाली धोती-कुर्ता पहिने देखा गवा। उनकी पत्नी स्मिता बरुआ, जे भाजपा बरे मेहरारू वोटरन का जोड़य मा बड़ी भूमिका निभाई रही, वै भी उनके साथे रही। उ ट्वीट कीनिन, “इतिहास क गवाह बन्यों।”
4 मई का चुनाव नतीजा आवय के बाद से, सान्याल कई इंटरव्यू दीन हयँ अउर मीडिया संस्थानन बरे लेख लिखिन हयँ, जेमा उ बंगाल क आर्थिक हालत गिरे अउर ओका सुधारय के उपायन पर बात कीन हयँ। सान्याल ‘रिपब्लिक’ पत्रिका का बताइन, “कोलकाता मरा नाहीं हय, ओकर हत्या कीन गय हय, अउर हम एकर गवाह हयँ।” उ सुवेंदु के सहायक चंद्रनाथ रथ क हत्या अउर बंगाल मा भवा बम हमला के बारे मा भी पोस्ट कीनिन, जेमा पांच भाजपा कार्यकर्ता घायल होय रहे।
संजीव सान्याल जाने-माने अर्थशास्त्री
संजीव सान्याल क्रांतिकारी आजादी के सिपाही सचिंद्र नाथ सान्याल के पर-भतीजे हयँ, जे भगत सिंह अउर चंद्रशेखर आज़ाद के गुरु रहे। उनके परदादा नलिनक्षा सान्याल बिना बंटवारा वाले बंगाल के प्रांतीय विधानसभा मा कांग्रेस के मुख्य सचेतक रहे। बीजेपी के करीबी माने जाय वाले एक अर्थशास्त्री ‘द टेलीग्राफ’ का बताइन, “उनमें बंगाली जड़न अउर दुनिया भर के अनुभव क मेल हय। उ बंगाल का जज्बाती अउर दिमागी दुनऊ तरीका से समझत हयँ, अउर साथै इ भी जानत हयँ कि आज के समय मा दुनिया भर मा अर्थव्यवस्था कइसे काम करती हय।”
“समय क देवी, अंधकारमयी, जुगन क चकरी घुमावती हय, धीरे-धीरे मुला एकदम पक्का…” इ पोस्ट 4 मई का मशहूर अर्थशास्त्री संजीव सान्याल कइती से भाजपा क बंगाल चुनाव मा ऐतिहासिक जीत के बाद कीन गय। इ रहस्यमयी पोस्ट का बंगाल के बदलत राजनीतिक माहौल क इशारा माना जात हय। कुछ मनई तौ एका सत्ता के गलियारा मा उनके आवे क संकेत मानिन, काहे से अइसन चर्चा रही कि भाजपा के लगे बंगाल क अर्थव्यवस्था संभालय बरे कउनो मजबूत आर्थिक योजना नाहीं हय। वइसे भी, बहुत कमै मनई जानत हय कि सान्याल खुदै एक बंगाली हयँ।
अबहीं तक बंगाल मा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथे खाली पांच मंत्रिन शपथ लीन हय। वित्त मंत्रालय के साथे-साथे गृह, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग अउर वाणिज्य मंत्रालय क कामकाज अभी सुवेंदु क हाथे मा हय। भाजपा सरकार के सोझवा दुविधा इ हय कि उनके पास कउनो अइसन विधायक नाहीं हय जेका अर्थव्यवस्था क बड़ी जानकारी होय। एही बीच, ‘द टेलीग्राफ’ क एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) के सदस्य सान्याल वित्त मंत्री बनय की दौड़ मा सबसे आगे हयँ।
भाजपा क नौकरशाहन के साथै प्रयोग
असल मा, भाजपा बरे अनुभवी नौकरशाहन का बड़े राजनीतिक पद दइब कउनो नई बात नाहीं हय। विदेश मंत्री एस जयशंकर अउर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी एकर सबसे बढ़िया उदाहरण हयँ। एकर इशारा साफ हय। सुवेंदु के शपथ ग्रहण समारोह मा सान्याल का पुरानी बंगाली धोती-कुर्ता पहिने देखा गवा। उनकी पत्नी स्मिता बरुआ, जे भाजपा बरे मेहरारू वोटरन का जोड़य मा बड़ी भूमिका निभाई रही, वै भी उनके साथे रही। उ ट्वीट कीनिन, “इतिहास क गवाह बन्यों।”
4 मई का चुनाव नतीजा आवय के बाद से, सान्याल कई इंटरव्यू दीन हयँ अउर मीडिया संस्थानन बरे लेख लिखिन हयँ, जेमा उ बंगाल क आर्थिक हालत गिरे अउर ओका सुधारय के उपायन पर बात कीन हयँ। सान्याल ‘रिपब्लिक’ पत्रिका का बताइन, “कोलकाता मरा नाहीं हय, ओकर हत्या कीन गय हय, अउर हम एकर गवाह हयँ।” उ सुवेंदु के सहायक चंद्रनाथ रथ क हत्या अउर बंगाल मा भवा बम हमला के बारे मा भी पोस्ट कीनिन, जेमा पांच भाजपा कार्यकर्ता घायल होय रहे।
संजीव सान्याल जाने-माने अर्थशास्त्री
संजीव सान्याल क्रांतिकारी आजादी के सिपाही सचिंद्र नाथ सान्याल के पर-भतीजे हयँ, जे भगत सिंह अउर चंद्रशेखर आज़ाद के गुरु रहे। उनके परदादा नलिनक्षा सान्याल बिना बंटवारा वाले बंगाल के प्रांतीय विधानसभा मा कांग्रेस के मुख्य सचेतक रहे। बीजेपी के करीबी माने जाय वाले एक अर्थशास्त्री ‘द टेलीग्राफ’ का बताइन, “उनमें बंगाली जड़न अउर दुनिया भर के अनुभव क मेल हय। उ बंगाल का जज्बाती अउर दिमागी दुनऊ तरीका से समझत हयँ, अउर साथै इ भी जानत हयँ कि आज के समय मा दुनिया भर मा अर्थव्यवस्था कइसे काम करती हय।”