प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजु संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के छोटकी बाकिर बहुतै जरूरी यात्रा के दौरान दुनहुँ देसन के बीच रणनीतिक साझेदारी का नई दिशा देवे पर जोर दीन। अबू धाबी मा यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के साथै प्रतिनिधिमंडल स्तर के बातचीत मा प्रधानमंत्री कहें कि वर्तमान वैश्विक हालात मा भारत अउर यूएई के बीच सामरिक सहयोग के महत्व अउर ज्यादा बढ़ि गवा है। ओन्हन जनवरी मा राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के भारत यात्रा का जिक्र करत कहें कि दुनहुँ देस आपन सम्बन्ध का एक नई ऊंचाई पर ले जाय का फैसला कीहिन रहा अउर बहुतै कम समय मा ईमा बड़ी कामयाबी मिली है।
प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम एशिया मा जारी तनाव अउर लड़ाई पर चिंता जतावत कहें कि एकर असर पूरी दुनिया पर पड़ि रहा है। ओन्हन साफ-साफ कहें कि बातचीत अउर कूटनीति ही कवनो भी विवाद का सबसे नीक समाधान अहै। ई दौरान ओन्हन होर्मुज जलडमरूमध्य का “मुक्त, खुला अउर सुरक्षित” रखे के जरूरत पर बल दीन अउर अंतरराष्ट्रीय कानूनन के सम्मान के बात कहीन। प्रधानमंत्री कहें कि भारत हर हाल मा यूएई के साथै कांधे से कांधा मिलाइके ठाढ़ है अउर क्षेत्र मा शांति अउर स्थिरता बहाल करे खातिर हर मुमकिन मदद करी।
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी हाल के दिनन मा यूएई पर भवा हमला के कड़ि निंदा भी कीहिन। ओन्हन कहें कि कवनो भी सूरत मा अमीरात का निशाना बनावा जाब स्वीकार नाहीं कीन जा सकत। प्रधानमंत्री यूएई के लीडरशिप के तरफ से राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा अउर अखंडता बनाये रखे खातिर उठाये गये कदम के तारीफ कीहिन। साथै ओन्हन वहाँ रहइ वाले भारतीय समुदाय का मुश्किल समय मा मदद देवे खातिर अमीरात सरकार अउर शाही परिवार के आभार जताइन। प्रधानमंत्री कहें कि यूएई मा भारतीयन का परिवार के सदस्य नियर सम्मान अउर सुरक्षा मिलत है।
हम आपन पाठकन का बताइ देई कि प्रधानमंत्री मोदी के ई यात्रा के दौरान भारत अउर यूएई के बीच रक्षा, ऊर्जा अउर निवेश से जुड़ा कई महत्वपूर्ण समझौता भी भये। दुनहुँ देस रणनीतिक रक्षा साझेदारी के ढांचा पर सहमत भये। एकरे अलावा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, एलपीजी गैस सप्लाई अउर वाडीनार मा जहाज मरम्मत केंद्र बनावे से जुड़ा समझौता पर दस्तखत कीन गय। ई यात्रा के दौरान भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, आरबीएल बैंक अउर सम्मान कैपिटल मा लगभग पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के घोषणा भी कीन गय।
ऊर्जा सुरक्षा ई यात्रा के मुख्य मुद्दा रहा। अधिकारिन के मुताबिक यूएई भारत के ऊर्जा जरूरत के एक बड़ा हिस्सा पूरा करत है। पिछला साल भारत के कच्चे तेल के आयात मा लगभग ग्यारह प्रतिशत हिस्सा यूएई से आवा रहा। एकरे साथै ई भारत खातिर एलपीजी के सबसे बड़ा सप्लायर अहै अउर भारत के लगभग चालीस प्रतिशत जरूरत पूरा करत है। दुनहुँ देसन के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम स्टोरेज का लेके पहिले भी तालमेल रहा है। साल 2018 मा भारतीय सामरिक पेट्रोलियम भंडार लिमिटेड अउर अबू धाबी राष्ट्रीय तेल कंपनी के बीच समझौता के तहत मैंगलोर मा पांच मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल स्टोर कीन गवा रहा।
देखल जाय त पश्चिम एशिया मा जारी जुद्ध अउर अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री मोदी के ई यात्रा खास महत्व राखत है। ईरान अउर अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़त तनाव अउर होर्मुज जलडमरूमध्य मा संकट के कारण दुनिया भर मा ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ा है। अइसन समय मा यूएई भारत के सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साथी बनके उभरा है। बतावा जा रहा है कि दुनहुँ देस होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करे के तरीका पर भी सोच-विचार करत हैं, जेहिमा फुजैरा बंदरगाह के रस्ता तेल सप्लाई सामिल है।
हम आपन पाठकन का बताइ देई कि प्रधानमंत्री मोदी सुकरवार के सबेरे दिल्ली से रवाना भये अउर अबू धाबी पहुंचे पर ओन्हन का औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दीन गवा। यूएई के आसमान मा भारतीय प्रधानमंत्री के जहाज का एफ-16 लड़ाकू विमानन ने एस्कॉर्ट कीहिन। ई यात्रा प्रधानमंत्री के पांच देसन के दौरा के पहिला हिस्सा है। यूएई के बाद प्रधानमंत्री नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे अउर इटली जइहैं। नॉर्वे के यात्रा खास मानी जा रही है काहे कि कवनो भारतीय प्रधानमंत्री के ई पहिली नॉर्वे यात्रा होइ। ओस्लो मा प्रधानमंत्री तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन मा भी हिस्सा लिहैं, जेहिमा डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड अउर स्वीडन के नेता सामिल होइहैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजु संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के छोटकी बाकिर बहुतै जरूरी यात्रा के दौरान दुनहुँ देसन के बीच रणनीतिक साझेदारी का नई दिशा देवे पर जोर दीन। अबू धाबी मा यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के साथै प्रतिनिधिमंडल स्तर के बातचीत मा प्रधानमंत्री कहें कि वर्तमान वैश्विक हालात मा भारत अउर यूएई के बीच सामरिक सहयोग के महत्व अउर ज्यादा बढ़ि गवा है। ओन्हन जनवरी मा राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के भारत यात्रा का जिक्र करत कहें कि दुनहुँ देस आपन सम्बन्ध का एक नई ऊंचाई पर ले जाय का फैसला कीहिन रहा अउर बहुतै कम समय मा ईमा बड़ी कामयाबी मिली है।
प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम एशिया मा जारी तनाव अउर लड़ाई पर चिंता जतावत कहें कि एकर असर पूरी दुनिया पर पड़ि रहा है। ओन्हन साफ-साफ कहें कि बातचीत अउर कूटनीति ही कवनो भी विवाद का सबसे नीक समाधान अहै। ई दौरान ओन्हन होर्मुज जलडमरूमध्य का “मुक्त, खुला अउर सुरक्षित” रखे के जरूरत पर बल दीन अउर अंतरराष्ट्रीय कानूनन के सम्मान के बात कहीन। प्रधानमंत्री कहें कि भारत हर हाल मा यूएई के साथै कांधे से कांधा मिलाइके ठाढ़ है अउर क्षेत्र मा शांति अउर स्थिरता बहाल करे खातिर हर मुमकिन मदद करी।
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी हाल के दिनन मा यूएई पर भवा हमला के कड़ि निंदा भी कीहिन। ओन्हन कहें कि कवनो भी सूरत मा अमीरात का निशाना बनावा जाब स्वीकार नाहीं कीन जा सकत। प्रधानमंत्री यूएई के लीडरशिप के तरफ से राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा अउर अखंडता बनाये रखे खातिर उठाये गये कदम के तारीफ कीहिन। साथै ओन्हन वहाँ रहइ वाले भारतीय समुदाय का मुश्किल समय मा मदद देवे खातिर अमीरात सरकार अउर शाही परिवार के आभार जताइन। प्रधानमंत्री कहें कि यूएई मा भारतीयन का परिवार के सदस्य नियर सम्मान अउर सुरक्षा मिलत है।
हम आपन पाठकन का बताइ देई कि प्रधानमंत्री मोदी के ई यात्रा के दौरान भारत अउर यूएई के बीच रक्षा, ऊर्जा अउर निवेश से जुड़ा कई महत्वपूर्ण समझौता भी भये। दुनहुँ देस रणनीतिक रक्षा साझेदारी के ढांचा पर सहमत भये। एकरे अलावा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, एलपीजी गैस सप्लाई अउर वाडीनार मा जहाज मरम्मत केंद्र बनावे से जुड़ा समझौता पर दस्तखत कीन गय। ई यात्रा के दौरान भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, आरबीएल बैंक अउर सम्मान कैपिटल मा लगभग पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के घोषणा भी कीन गय।
ऊर्जा सुरक्षा ई यात्रा के मुख्य मुद्दा रहा। अधिकारिन के मुताबिक यूएई भारत के ऊर्जा जरूरत के एक बड़ा हिस्सा पूरा करत है। पिछला साल भारत के कच्चे तेल के आयात मा लगभग ग्यारह प्रतिशत हिस्सा यूएई से आवा रहा। एकरे साथै ई भारत खातिर एलपीजी के सबसे बड़ा सप्लायर अहै अउर भारत के लगभग चालीस प्रतिशत जरूरत पूरा करत है। दुनहुँ देसन के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम स्टोरेज का लेके पहिले भी तालमेल रहा है। साल 2018 मा भारतीय सामरिक पेट्रोलियम भंडार लिमिटेड अउर अबू धाबी राष्ट्रीय तेल कंपनी के बीच समझौता के तहत मैंगलोर मा पांच मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल स्टोर कीन गवा रहा।
देखल जाय त पश्चिम एशिया मा जारी जुद्ध अउर अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री मोदी के ई यात्रा खास महत्व राखत है। ईरान अउर अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़त तनाव अउर होर्मुज जलडमरूमध्य मा संकट के कारण दुनिया भर मा ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ा है। अइसन समय मा यूएई भारत के सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साथी बनके उभरा है। बतावा जा रहा है कि दुनहुँ देस होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करे के तरीका पर भी सोच-विचार करत हैं, जेहिमा फुजैरा बंदरगाह के रस्ता तेल सप्लाई सामिल है।
हम आपन पाठकन का बताइ देई कि प्रधानमंत्री मोदी सुकरवार के सबेरे दिल्ली से रवाना भये अउर अबू धाबी पहुंचे पर ओन्हन का औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दीन गवा। यूएई के आसमान मा भारतीय प्रधानमंत्री के जहाज का एफ-16 लड़ाकू विमानन ने एस्कॉर्ट कीहिन। ई यात्रा प्रधानमंत्री के पांच देसन के दौरा के पहिला हिस्सा है। यूएई के बाद प्रधानमंत्री नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे अउर इटली जइहैं। नॉर्वे के यात्रा खास मानी जा रही है काहे कि कवनो भारतीय प्रधानमंत्री के ई पहिली नॉर्वे यात्रा होइ। ओस्लो मा प्रधानमंत्री तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन मा भी हिस्सा लिहैं, जेहिमा डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड अउर स्वीडन के नेता सामिल होइहैं।