सुप्रीम कोर्ट सोमार (25 मई) का पंजाब राज्य चुनाव आयोग के नगर निगम, नगर परिषद अउर नगर पंचायतन के चुनाव मतपत्र (बैलेट पेपर) के जरिया करावे वाले फैसले का चुनौती देय वाली याचिका पर सुनवाई करे से साफ मना कइ दिहिस।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची अउर विपुल एम पंचोली के पीठ याचिकाकर्ता रुचिता गर्ग से कचहरी मा देर से आये पर सवाल पूछिस अउर कहेस कि इ समय अदालत चुनाव प्रक्रिया का डगमगाइ (अस्थिर) नाही सकत है।
पीठ कहेस कि काल्ह चुनाव अहै, अब का कीन जाइ सकत है? अब समय नाहीं बचा अहै। पीठ आगे कहेस कि चुनाव कार्यक्रम के औपचारिक एलान (अधिसूचना) जारी होय क इंतजार करे क कौनों जरूरत नाहीं रही। तुहका पहिले से मालूम रहा कि चुनाव होय वाले हैं। इके पहिलेव कइयौ बार मुकदमाबाजी होइ चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट चुनाव मा पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) नियुक्त करे से भी मना कइ दिहिस अउर कहेस कि इ एक गंभीर निषेधाज्ञा अहै अउर हम अइसन नाहीं करब। याचिकाकर्ता के वकील कहेन कि चुनाव मतपत्रन के जरिया करवावा जाइ रहा है अउर उहई एडीआर वाले मामला मा सुप्रीम कोर्ट के फैसला क हवाला दिहिन जेहमा कहा गवा रहा कि ईवीएम ही मानक प्रणाली होय के चाही।
सुप्रीम कोर्ट पंजाब अउर हरियाणा हाईकोर्ट के ओही आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करत रहा जेहमा आवय वाले पंजाब स्थानीय निकाय चुनावन मा राज्य चुनाव आयोग के इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से हटिके मतपत्रन (बैलेट पेपर) पर जाय वाले फैसला का चुनौती देय वाली गर्ग के याचिका का खारिज कइ दीन गवा रहा।
पंजाब क आठ नगर निगम समेत 104 नगर निकायन बरे वोटिंग (मतदान) 26 मई का होई। वोटन क गिनती 29 मई का होई। एसईसी पहिले हाईकोर्ट का बताय रहा कि स्थानीय निकाय चुनाव मतपत्रन के जरिया करवावा जाइ रहा है काहे से चुनाव आयोग अपने तय कार्यक्रम के हिसाब से ईवीएम देय मा नाकाम रहा। राज्य के वकील याचिका के स्वीकार करे जाय के आधार पर एकर विरोध कीहे रहेन।