
अमेरिका मा राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप क अगुआई वाली सरकार क्यूबा पर दबाव बढ़ाउब तेज कइ दिहिस अहै। विशेषज्ञों क कहब बा कि ई रणनीति काफी हद तक वैसी ही नीति जइसन दिखत अहै, जवन अमेरिका वेनेजुएला के खिलाफ अपनइने रहा। हालांकि जानकार मानत हैं कि क्यूबा क मामला वेनेजुएला से कतई जादा पेचीदा, जोखिम भरा अउर महंगा साबित होइ सकत है।
तनाव तब अउर बढ़िगा जब ट्रंप प्रशासन क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर 1996 मा दुई विमानन का मारि गिरावै के मामले मा आरोप तय कइ दिहिस। ई घोषणा मियामी के फ्रीडम टावर मा कीन गयी, जवन अमेरिका मा रहइ वाले क्यूबाई प्रवासियों से जुड़ा एक प्रतीकात्मक ठउर माना जात है। आलोचकों क कहब है कि एकर राजनीतिक संदेश खास तौर पर फ्लोरिडा के क्यूबाई-अमेरिकी वोटरों का ध्यान मा रखि के दीन्ह गा है।
जनवरी से अमेरिका क्यूबा पर कइयौ नवा प्रतिबंध लगाइ दिहिस अहै। इन मा वेनेजुएला से तेल क सप्लाई सीमित करब, क्यूबा का ईंधन देवइ वाले देसन पर टैक्स क धमकी देब अउर क्यूबा के साथे कारोबार करइ वाली विदेशी कंपनियों पर प्रतिबंध शामिल अहैं। विशेषज्ञ विलियम लियोग्रांडे अउर पीटर कॉर्नब्लुह के मुताबिक, अमेरिका क कोशिश क्यूबा क अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाइ क राजनीतिक बदलाव लावै क अहै।
वेनेजुएला से तुलना काहे होइ रही अहै?
क्यूबा क तुलना वेनेजुएला से येहि मारे कीन जा रही अहै काहे से जनवरी मा अमेरिका वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ कार्रवाई करे रहा। मादुरो पर न्यूयॉर्क मा नशीली दवाइयों क तस्करी क आरोप लगावा गा रहा अउर बाद मा अमेरिकी विशेष बलों एक अभियान चलाइ के उनका सत्ता से हटाए दिहिन रहा। इसके बाद उप-राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज सत्ता सम्हारिन। अब राउल कास्त्रो पर आरोप तय होइ के बाद कइयौ लोगन का आसांका है कि अमेरिका क्यूबा मा भी अइसने कार्रवाई कइ सकत है।
अमेरिकी प्रशासन लगातार क्यूबा का राष्ट्रीय सुरक्षा खतिरा खतरा बतावत आवत है। अमेरिका क आरोप है कि क्यूबा रूस अउर चीन से जुड़े खुफिया अभियानों मा मदद करत है अउर अमेरिकी हरकतों पर नजर रखत है। सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ मई मा हवाना दौरा के टेम पर कथित तौर पर क्यूबाई अधिकारियों से कहिन कि अमेरिका क मांग मानइ खतिरा “समय बहुतै तेजी से खत्म होइ रहा है।” वहीं अमेरिकी अधिकारियों दावा कीन कि क्यूबा अइसन सैन्य ड्रोन हासिल कइ लिहे है, जवन ग्वांतानामो बे अउर फ्लोरिडा तक का खतरा पहुंचाए सकत हैं। हालांकि कइयौ विशेषज्ञों ई दावों का बढ़ा-चढ़ा के कहल बात बताईन।
क्यूबा अमेरिका के आरोप खारिज कइ दिहिस
पत्रकार मेगिन केली कहिन कि क्यूबा क अमेरिका पर हमला करइ क बात “बिल्कुल बकवास” है। क्यूबा भी साफ-साफ कहि दिहे है कि ओकर अमेरिका पर हमला करइ क कौनों इरादा नाइ है, बाकी ओका अपनी सुरक्षा क पूरा अधिकार है। क्यूबा के उप विदेश मंत्री कार्लोस फर्नांडीज डी कोसियो कहिन कि हर देस की तान क्यूबा का भी बाहरी हमला से बचाव क अधिकार अहै।
विशेषज्ञों क मानब है कि क्यूबा क राजनीतिक अउर सुरक्षा व्यवस्था वेनेजुएला से बहुत अलग अहै। वेनेजुएला मा विपक्ष क मजबूत नेता मारिया कोरीना मचाडो रहिन, जबकि क्यूबा मा अइसन कौनों बड़ा विपक्षी चेहरा नाइ है, जेका पूरे देस क समर्थन हासिल होय। विशेषज्ञों के मुताबिक, क्यूबा क सुरक्षा एजेंसियों बरिसन मा सब सम्भावित विरोधी ताकतों का कमजोर कइ दिहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टेक्सास के प्रोफेसर ऑरलैंडो पेरेज कहिन कि क्यूबा क सरकार हर वैकल्पिक ताकत के केंद्र का योजनाबद्ध तरीके से खतम कइ दिहे है।
क्यूबा क सैन्य ताकत का मजबूत माना जा रहा अहै
विशेषज्ञ मानत हैं कि क्यूबा क सेना वेनेजुएला क सेना से जादा संगठित अउर वैचारिक तौर पर मजबूत अहै। क्यूबा क खुफिया एजेंसियों क रूस अउर चीन के साथे पुराना संबंध रहा है, जेहसे उनकी निगरानी अउर जवाबी खुफिया ताकत बहुतै मजबूत मानी जात है। एक अउर बड़ा अंतर अगुआई क है। निकोलस मादुरो वेनेजुएला के सक्रिय राष्ट्रपति रहिन, जबकि राउल कास्त्रो 94 साल के हैं अउर करीब एक दशक पहिले औपचारिक रूप से सत्ता छोड़ि चुके हैं। विशेषज्ञों क कहब है कि अगर अमेरिका कास्त्रो का गिरफ्तार भी कइ लेइ, तबहूं इससे क्यूबा क पूरी राजनीतिक व्यवस्था नाइ टूटी।
हाल के दिनन मा अमेरिकी फौजी हरकतों आसांका और बढ़ाइ दिहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका क्यूबा के आसपास निगरानी उड़ानें बढ़ाइ दिहे है। वहीं अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस निमिट्ज भी कैरेबाई इलाका मा पहुंचि चुका है। अमेरिकी दक्षिणी कमान फौजी जहाजन अउर सिपाहियों के वीडियो भी जारी कीन हैं।
सैन्य कार्रवाई क खतरा का-का अहैं?
विशेषज्ञों क कहब है कि अमेरिका चाहइ त सीमित फौजी अभियान चलाइ सकत है, बाकी इससे खाली प्रतीकात्मक सफलता ही मिली। उनका मानब है कि सिर्फ हवाई हमले या तय कइके कीन गयी हत्याएं कउनो सरकार गिरावे बरे काफी नाइ होतीं। अगर अमेरिका पूरी तान से फौजी दखलअंदाजी करत है, त एकर गंभीर नतीजा होइ सकत हैं। विशेषज्ञ एकर तुलना 1989 मा पनामा पर अमेरिकी हमले से करत हैं। बाकी क्यूबा क हालत जादा कठिन मानी जा रही है। हुआं पहिले से राशन, ईंधन, दवाई अउर बिजली क भारी कमी अहै। लड़ाई क हालत मा बहुत भारी संख्या मा लोग अमेरिका कइत भागि सकत हैं। क्यूबा क आबादी एक करोड़ से जादा अहै। विशेषज्ञों क कहब है कि दखलअंदाजी के बाद अमेरिका का हुआं क अर्थव्यवस्था अउर प्रशासन सम्हाले क जिम्मेदारी भी उठावइ का पड़ी। वेनेजुएला क तान क्यूबा के पास कौनों बड़ा तेल भण्डार भी नाइ है, जेहसे आर्थिक फायदा मिले क उम्मीद कमै है।
मार्को रुबियो क अहम भूमिका
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो क्यूबा के खिलाफ कड़क नीति के सबसे बड़े हिमायती मा माने जा रहे हैं। फ्लोरिडा के नेता अउर क्यूबाई मूल के रुबियो बहुतै दिनन से क्यूबा मा तख्तापलट क मांग करत आवत हैं। विशेषज्ञों क मानब है कि अगर क्यूबा मा कउनो बड़ा राजनीतिक बदलाव होत है, त इससे उनके आगे क राजनीति का फायदा मिलि सकत है। हालांकि हार अमेरिका बरे नुकसानदेह भी साबित होइ सकत है। अमेरिका पहिले से ईरान समेत कइयौ इलाकन मा फौजी दबाव झेलत है। अइसे मा क्यूबा मा नया मोर्चा खोलब अमेरिका पर फालतू बोझ डारि सकत है।
रुबियो हालही मा स्पेनिश भाषा मा जारी एक वीडियो मा क्यूबा क खस्ता आर्थिक हालत बरे हुआं क सरकार का जिम्मेदार ठहराइन अउर कहिन कि अमेरिका मदद देइ खतिरा तैयार है। उ कहिन कि “नीक भविष्य के रास्ता मा खाली उहै लोग खड़े हैं, जउन तोहरे देस पर कब्जा जमाए बैठे हैं।”
का क्यूबा पर हमला होइ वाला है?
अभी कउनो अइसन पक्का इशारा नाइ मिला है कि अमेरिका तुरंते क्यूबा पर हमला करइ जा रहा है। बाकी कानूनी कार्रवाई, आर्थिक पाबंदी, फौजी हरकतों अउर कड़क बयानबाजी से आसांका जरूर बढ़ि गयी है कि अमेरिका बातचीत से जादा दबाव बनावै क नीति अपनावत है। विशेषज्ञ लगातार चेतावत हैं कि क्यूबा का वेनेजुएला समझइ क भूल अमेरिका का बहुतै भारी पड़ि सकत है। क्यूबा क राजनीतिक व्यवस्था जादा मजबूत, सुरक्षा ढांचा जादा अनुशासित अउर समाज कम बंटा हुआ माना जात है।
तनातनी के बीच क्यूबा बातचीत क इशारा भी दिहे है। संयुक्त राष्ट्र मा क्यूबा के राजदूत एर्नेस्टो सोबेरोन गुजमान कहिन कि क्यूबा अमेरिका से हर मुद्दा पर बातचीत बरे तैयार है, बस सर्त ई है कि सम्मान अउर बराबरी क व्यवहार होय। हालांकि मार्को रुबियो बातचीत से कौनों हल निकलइ क उम्मीद का “बहुतै कम” बताए हैं।




