
देश मा चलि रहल बांग्लादेशी अउर रोहिंग्या घुसपैठियन के खिलाफ अभियान अब एक नया मोड़ लइ लिहिस है। पश्चिम बंगाल मा अवैध विदेशी नागरिकन क पहचान, उनकर नाम हटावे अउर उनकर देशनिकाला क तेज कार्रवाई के बीच ई डर बढ़ि गय है कि घुसपैठियन क भारी भीड़ अब दूसरे राज्यन क ओर रुख कर सकत है। ई खतरा क देखत भये ओडिशा सरकार भी अपनी सीमा अउर समुद्री इलाकन मा बहुत तगड़ी निगरानी सुरु कइ दिहे है। सुरक्षा एजेंसी क ई मानब है कि पश्चिम बंगाल मा बढ़त सख्ती के कारन फँसे घुसपैठिये समुंदर क रास्ता अउर सीमावर्ती जिला क जरिये ओडिशा मा घुसे क कोसिस कइ सकत हैं।
सूत्रन क मुताबिक, पश्चिम बंगाल मा चलि रहल अभियान के बाद हजारन घुसपैठिये सीमा वाला इलाकन मा फँसे हैं। ई डर है कि इनमें से कुछ लोग समुंदर के रास्ते ओडिशा मा घुसे क कोसिस कइ सकत हैं। यही कारन है कि केंद्रपाड़ा जिला क संवेदनशील तटीय इलाकन, खास कइके महाकल्पडा अउर राजनगर इलाकन मा सुरक्षा व्यवस्था क बहुत तगड़ा कइ दीन्ह गय है। समुद्री पुलिस क खास निर्देश दीन गय हैं अउर ड्रोन निगरानी, राति क गश्त अउर पहचान सत्यापन क काम तेज कइ दीन गय है।
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पुलिस अधिकारीन क अनुसार सुरक्षा बल समुंदर मा तीस से पचास समुद्री मील तक रोज गश्त करत हैं। समुद्री रास्ता से आवत हर एक आदमी क खूब जाँच होइ रहल है। मछुआरन क पहचान पत्र, आधार कार्ड अउर दूसरे कागजात जाँच के बाद ही कवनो क आगे बढ़े दीन जात है। जवन लोगन के पास सही कागज नाहीं मिलत है, ओन्हन क हिरासत मा लेके संबंधित थाना मा सौंप दीन जात है। सुरक्षा एजेंसी लगातार खुफिया जानकारी क अदान-प्रदान करत हैं ताकि कवनो भी संदेहास्पद गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई होइ सके।
खाली तटीय इलाका ही नाहीं, बल्की पश्चिम बंगाल से सटल ओडिशा क बालासोर अउर मयूरभंज जइसन जिला क भी बहुत संवेदनशील मानि जात है। प्रशासन क डर है कि सीमावर्ती इलाकन क कमजोर कड़ी क फायदा उठाय के घुसपैठिये राज्य मा घुस सकत हैं। ई कारन से परिवहन केंद्र, किराये क मकान अउर संदेहास्पद गतिविधि वाला इलाकन पर भी खास नजर राखि जात है। राज्य सरकार जिला प्रशासन अउर कानून-व्यवस्था देखइया एजेंसी क पूरी तरह से सतर्क रहे क निर्देश दीन है।
देखा जाय त ओडिशा मा ई सतर्कता कवनो कल्पना पर आधारित नाहीं है। पहिले भी राज्य मा कइयौ संदेहास्पद अवैध प्रवासी क पहचान कइके ओन्हन क वापस भेजा जा चुका है। राज्य क कानून मंत्री साफ कइ दिहे हैं कि बिना सही कागजात के रहइया कवनो भी घुसपैठिया क बख्शा नाहीं जाई अउर अइसन कार्रवाई आगे भी जारी रही। ई संदेश साफ है कि ओडिशा अपनी जनसांख्यिकीय अउर सुरक्षा क चुनौती क लेके अब कवनो ढिलाई बरते क मूड मा नाहीं है।
असल मा, ई समस्या खाली ओडिशा तक सीमित नाहीं है। देश क कइयौ राज्यन मा बांग्लादेशी अउर रोहिंग्या घुसपैठियन क मौजूदगी बहुत दिनन से राजनीतिक, सामाजिक अउर सुरक्षा क बहस क मुद्दा रही है। मई मा सुरु भयल अभियान ई मुद्दा क राष्ट्रीय स्तर पर अउर ज्यादा गंभीर बनाय दिहे है। पश्चिम बंगाल मा नई सरकार राज्य अउर जिला स्तर पर ढेर डिटेंशन सेंटर बनवाय है। गिरफ्तारी क डर से बहुत बड़ी संख्या मा अवैध प्रवासी सीमा चौकी क ओर पहुँचत हैं अउर खुद से वापस जाये क कोसिस करत हैं। साथ ही, सीमा पर तारबंदी क अधूरा काम तेजी से पूरा करे खातिर बड़े पैमाने पर जमीन हस्तांतरण क प्रक्रिया भी आगे बढ़ाय गय है।
एकरे अलावा, पूर्वोत्तर क राज्यन मा भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी है। असम, त्रिपुरा अउर मेघालय जइसन राज्यन मा सीमा पार सक्रिय दलाल गिरोह क मदद से घुसपैठ क घटना क लेके लगातार चिंता बनी है। रेलवे रास्ता से देश क भीतर गहराई तक पहुँचत अवैध प्रवासियों पर नजर राखे खातिर सुरक्षा एजेंसी निगरानी बढ़ाय दिहे हैं। झारखंड मा भी विपक्ष पाकुड, जामताडा, दुमका अउर साहिबगंज जइसन संवेदनशील जिला मा निरोध केंद्र बनावे क माँग उठाय है। उनका तर्क है कि पश्चिम बंगाल मा बढ़त कार्रवाई क सीधा दबाव पड़ोसी राज्यन पर पड़ि सकत है। यही कारन है कि ओडिशा अउर झारखंड दुनों मा प्रशासनिक सतर्कता लगातार बढ़त है।
खुफिया रिपोर्ट ई भी इशारा करत है कि सीमा पार कइके आवत बहुत लोग बाद मा मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु अउर गुजरात क अलग-अलग शहरन मा जाय के बस जात हैं अउर निर्माण, कपड़ा अउर असंगठित क्षेत्रन मा काम करत हैं। ई कारन से समस्या खाली सीमावर्ती राज्यन तक सीमित नाहीं रहत, बल्की पूरा देश क कानून-व्यवस्था, रोजगार, संसाधन अउर पहचान व्यवस्था पर असर डालत है। बहरहाल, पश्चिम बंगाल मा सुरु भयल सख्ती क असर अब पूरा देश मा देखाय पड़त है। ओडिशा क हाई अलर्ट होब ई बात क इशारा है कि राज्य सरकार संभावित खतरा क गंभीरता से लेत हैं। आवत दिनन मा ई चुनौती अउर बढ़ि सकत है, इहिकारे सब राज्यन क मिलके रणनीति, तगड़ी निगरानी अउर कठोर सत्यापन व्यवस्था के साथ आगे बढ़े क पड़ी, नाहीं त घुसपैठ क दबाव एक राज्य से दूसरे राज्य मा जाय के नई समस्या क जनम दइ सकत है। हम आपन क ई भी बताइ देत हैं कि मोदी सरकार हर तरह से ‘लीक-प्रूफ सुरक्षा ग्रिड’ बनावत है, जहाँ जमीनी फेंसिंग मुश्किल है, वहाँ तकनीकी फेंसिंग लगाय के अभेद्य सुरक्षा घेरा बनावत है। ई बात खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कहे हैं।