
कम उमिर में अपने से बड़ आदमी से बियाह, 23 जनों द्वारा बलात्कार अउर बेइज्जती भरी जिंदगी। इतना सब कुछ होय के बाद कउनो इंसान जिंदगी से हार मान लेत है, लेकिन इ सब के बाद अपने अपमान के बदला लेब अउर सिर उठा के फिर से जिंदगी शुरू करब, इ कउनो हिम्मती मेहरारू के कहानी ही होय सकत है। हिया बात फूलन देवी के होत है, जौन ना सिर्फ अपने अपमान के बदला लीन बल्कि एक नई जिंदगी भी शुरू कीन अउर उनके इ उतार-चढ़ाव भरी जिंदगी पर फिल्म भी बनी जौन इंटरनेशनल लेवल पर खूब नाम कमाई।
फूलन देवी पर बनी रही फिल्म
फूलन देवी के असाधारण जिंदगी से प्रेरित होय के शेखर कपूर (Shekhar Kapoor) ‘बैंडिट क्वीन’ (Bandit Queen) फिल्म बनाइन, जौन भारतीय सिनेमा में एक नई तरह के यथार्थवाद (रियलिज्म) के जन्म दिहिन। इ फिल्म मनोज बाजपेयी, गजराज राव अउर सौरभ शुक्ला जइसन कलाकारन के करियर के नई ऊंचाइयों पर पहुँचाई, अउर साथ ही एक फिल्ममेकर के तौर पर शेखर कपूर के अंतरराष्ट्रीय सफर के भी शुरुआत करी।
का भवा रहा फूलन देवी के साथ?
फूलन देवी के जनम 10 अगस्त, 1963 को उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव, घुरा का पुरवा में भवा रहा। उनका जिंदगी बचपन से ही उत्पीड़न अउर दुर्व्यवहार से भरि रही। कम उमिर में ही उनका बियाह बीस साल के एक जवान लड़का से कर दीना गवा रहा, अउर बाद में जब ऊ अपने घर लौटिन, तौ उनका अपने गाँव के ऊँच जाति के ठाकुरन द्वारा अउर भी जियादा अपमान अउर शोषण के सामना करै का पड़ा। डाकुअन उनका अपहरण कर लीन अउर उनके साथ बार-बार यौन शोषण कइने।
फूलन देवी लीन बदला
लेकिन, फूलन देवी पीड़ित बनके रहै से मना कइ दिहिन। एक दूसरे डाकू के मदद से, ऊ अपना खुद के गिरोह बनाइन अउर अपने बदला के योजना तैयार कइनी, जौन बाद में कुख्यात बेहमई हत्याकांड के रूप में सामन आई; इ घटना में 22 ठाकुरन के मार दीना गवा – जिनमें ऊ लोग भी शामिल रहे जिनपर फूलन देवी के साथ बलात्कार करै के आरोप रहा। 1983 में ऊ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कइ दिहिन अउर उनके ऊपर 48 अपराधन के आरोप लगावा गवा, जिनमें डकैती अउर अपहरण के 30 मामला शामिल रहे।
राजनीति में शामिल भइनी
फूलन देवी 1994 में रिहा होय से पहिले 11 साल जेल में बिताइनी। एकरे बाद ऊ राजनीति में कदम रखिनी अउर 1996 में समाजवादी पार्टी में शामिल होइ गइनी, अउर मिर्जापुर से लोकसभा चुनाव जीति गइनी। 1999 में ऊ दोबारा चुनी गइनी, लेकिन दिल्ली में शेर सिंह राणा द्वारा उनके हत्या कइ देय से उनके जिंदगी के बहुत दुखद अंत होइ गवा।
फिल्म जीतिस नेशनल अवॉर्ड
फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ माला सेन के किताब ‘इंडियाज़ बैंडिट क्वीन: द ट्रू स्टोरी ऑफ फूलन देवी’ पर आधारित रही। रिलीज होय के बाद, ‘बैंडिट क्वीन’ कई पुरस्कार जीतिस, जिनमें हिंदी में ‘सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म’ के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी शामिल है।




