
हिंदी सिनेमा के इतिहास में कछ फिलिम त बस सफल भइहीं, कछ क्लासिक बनि गइहीं, पै कछ अइसन भी रहिन जवन पूरा फिलिम जगत क सोचिये बदल दिहिन। 45 साल पहिले, 5 जून 1981 के रिलीज भइल ‘एक दूजे के लिए’ अइसने एक ऐतिहासिक फिलिम रही। उ दौर में जब हिंदी सिनेमा पूरी तरह से बड़-बड़ स्टारन, जानल-मानल कहानी अउर हैप्पी एंडिंग पे टिक्ल रहा, इ फिलिम व्यावसायिक सिनेमा क हर फार्मूला क चुनौती दिहिस। फिलिम में कउनो पुरान हिंदी स्टार नाहीं रहा, एकर कहानी भाषा अउर संस्कृति क अलगाव पे आधारित रही अउर अंत बहुत ही दुखद रहा। सुरुवाती दौर में वितरखन (डिस्ट्रीब्यूटरन) त एकरा क घाटे क सौदा मान के खारिज कर दिहे रहे।
मील क पत्थर साबित भइल रही फिलिम
एकरा बादो, इ फिलिम ना खाली उ साल क सबसे बड़ ब्लाकबस्टर साबित भइल, बलुक भारतीय सिनेमा क इतिहास में मील क पत्थर भी बनि गइल।
सांस्कृतिक अलगाव क कहानी
के. बालचंदर के निर्देशन अउर एल.वी. प्रसाद के निर्माण में बनल इ फिलिम, बालचंदर के ही तेलुगु सुपरहिट ‘मारो चरित्र’ क हिंदी रूपांतरण रही। फिलिम क नाम फाइनल होए से पहिले ‘एक और इतिहास’ जइसन कई नाव पे विचार भइल रहा। जहवां मूल फिलिम तमिल अउर तेलुगु के बीच क प्रेम कहानी रही, ओहिजे बालचंदर एकरा हिंदी दर्शकन खातिर तमिल अउर उत्तर भारतीय परिवेश में ढाल दिहिन।
का रही फिलिम क कहानी?
कहानी एक पारंपरिक तमिल लइका वासु (कमल हासन) अउर उत्तर भारतीय लइकी सपना (रति अग्निहोत्री) के इर्द-गिर्द घूमत है, जउनकर रिश्ता भाषा, खान-पान अउर सामाजिक पूर्वाग्रह क दीवालन से टकरात है। रोमांस क कउनो काल्पनिक दुनिया में देखावे क बजाए, फिलिम एकरा कड़वी सच्चाई के बीच में स्थापित करिस। दुनो परिवार इ रिश्ता के खिलाफ रहे अउर एक विश्वास के साथ दुनोन क अलग कर दिहिन कि दूरी लगाव क खतम कर दी। एकरे उल्टा, दूरी प्यार क अउर गहिर कर दिहिस अउर कहानी क एक दुखद अंत क ओर धकेल दिहिस।
शोमैन दिहे रहे सुझाव
‘एक दूजे के लिए’ सिनेमा के समझ क लेके निर्देशक बालचंदर क बेहतरीन उदाहरण रही। पै जब निर्माता एल.वी. प्रसाद बॉम्बे एरिया क वितरखन खातिर पहिल प्रिंट देखाए त रिएक्शन खराब मिला। बहुत लोग एकरा खरीदे से मना कर दिहिन। एक दक्खिन भारतीय अभिनेता जउन ओही लहजे वाली हिंदी बोलत रहा, ओकर साथ एक नई लइकी अउर भाषाई मतभेद पे टिकल दुखद प्रेम कहानी, वितरखन क इ घाटे क सौदा लागत रहा। एतना ही नाहीं, शोमैन राज कपूर भी फिलिम क अंत बदल के ‘सुखांत’ (हैप्पी एंडिंग) करे क सुझाव दिहे रहे, पै बालचंदर अपनी बात पे अड़े रहे। उनकर मानब रहा कि क्लाइमेक्स बदले से कहानी क भावनात्मक सच्चाई खतम हो जाई। हार माने से इनकार करत, प्रसाद खुद फिलिम क रील लेके एक प्राइवेट स्क्रीनिंग से दूसरा स्क्रीनिंग तक जात रहे। अक्सर कमल हासन भी रील उठावे अउर वितरखन क खातिरदारी करे में उनकर मदद करत रहे।
सफलता क नवा इतिहास
एल.वी. प्रसाद ‘आलम आरा’ क जमाना से भारतीय सिनेमा क विकसित होत देखले रहे। ऊ जानत रहे कि दर्शक बढ़िया फिलिम क पहचान लेत हन। आखिर में वितरक गुलशन राय एकरा सीमित स्तर पे रिलीज करे खातिर तैयार भइलन। फिलिम मुंबई क रॉक्सी थिएटर में रिलीज भइल अउर पहिलहीं शो से दर्शक बहुत भावुक हो के बाहर निकलेन। फिलिम जगत देखिस कि इ ‘लव स्टोरी’ अउर ‘सिलसिला’ जइसन बड़ फिलिमिन क पीछे छोड़ दिहिस। ‘एक दूजे के लिए’ सिनेमाघरन में 50 हफ्ता क शानदार सफर तय करिस अउर 13 फिल्मफेयर नॉमिनेशन पाएस। एस.पी. बालासुब्रमण्यम इ फिलिम खातिर सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक क नेशनल अवॉर्ड जीतलें। बरसन बाद, चेन्नई क प्रसाद स्टूडियो में एक आधुनिक रिकॉर्डिंग कांप्लेक्स क ओर इशारा करत एल.वी. प्रसाद, कमल हासन से कहे रहे कि एकर निर्माण ओही फिलिम क मुनाफा से भइल रहा।
प्रेम क सार्वभौमिक भाषा
फिलिम क संगीत भी एक रचनात्मक बदलाव रहा। संगीत निर्देशक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल सुरु में एस.पी. बालासुब्रमण्यम क दक्खिन भारतीय लहजा के कारण हिचकिचात रहे, पै बालचंदर अड़े रहे कि यदि पात्र हिंदी सीखत है, त ओकर लहजा भी ओइसने होखे क चाही। ‘तेरे मेरे, हम बने तुम बने’ अउर ‘सोलह बरस की बाली उमर’ जइसन गाना पूरा देश में सनसनी मचा दिहिन। 45 साल बाद भी, इ फिलिम हमका याद दिलावत है कि क्षेत्र, भाषा अउर पहचान हमका बांट सकत हैं, पै प्यार हमेशा से इंसानियत क सार्वभौमिक भाषा रहा है। जब सिनेमा फार्मूला के बजाए इ शाश्वत सच्चाई पे भरोसा करत है, त अइसन कालजयी कहानी जनम लेत है जउन पीढ़िन तक जियत है।
कलाकारन क शानदार पदार्पण
सिनेमा में ‘पैन इंडिया’ शब्द क चलन होए से बहुत पहिले, ‘एक दूजे के लिए’ दक्खिन भारतीय प्रतिभान क बिना उनका पहचान खोए हिंदी दर्शकन से मिलवलिस। दक्खिन क सुपरस्टार कमल हासन इ हिंदी डेब्यू के साथ खुद क देशव्यापी स्टार के रूप में स्थापित क लिहे। उनकर साथ रति अग्निहोत्री रहिन, जउनकर इ पहिल हिंदी फिलिम रही। परदे पे रोमांटिक तड़प, विद्रोह अउर दिल टूटे जइसन गहिर भावनान क बालचंदर क निर्देशन में ऊ सब बहुत खूबसूरती से निभविन।




