
कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद पर डीके शिवकुमार के शपथ-ग्रहण समारोह से पहिले, एक कन्नड़ अखबार ने कांग्रेस नेता का भगवान शिव के रूप में फोटो छाप के बवाल खड़ा कर दिहा है। बेंगलुरु के इह अख़बार का अब बहुत आलोचना झेलनी पड़ रही है, लोग और आलोचक एकरा के धर्म के अपमान और नेताजी की चाटुकारिता बता रहे हैं।
कन्नड़ दैनिक ‘विश्ववाणी’ के मुख्य पन्ने पर शिवकुमार का फोटो हिंदू देवता भगवान शिव के रूप में छापा गया था, जवने में उनके जटा, बाघ की खाल, त्रिशूल और डमरू भी देखा जा सकत है। इ फोटो का बुधुवार के दिन अखबार के प्रधान संपादक विश्वेश्वर भट्ट ने भी शेयर कइले रहन।
शिवकुमार का भगवान शिव के रूप में देख के भड़कल लोग
जब 64 साल के कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेवे के मौका रहल, ओही दिन उनके भगवान शिव के रूप में देख के भारी आक्रोश फैल गवा। लोगन ने इ बात पर कड़ा एतराज जतवलन कि राजनीतिक बड़ाई खातिर धर्म का इस्तेमाल कइके इ गैर-जिम्मेदाराना हरकत कीन गई है।
अखबार में छपल तस्वीर पर प्रतिक्रिया देत हुए एक जने ने ‘एक्स’ (ट्विटर) पर लिखल, “इ सरासर अपमान है… हमका समझ ना आवत है कि कन्नड़ भाषी लोग एकरा के सामान्य कइसे मान लेत हैं।” कर्नाटक के वकील गिरीश भारद्वाज ने कहल कि इ धर्म के खिलाफ है और हमार देवता लोगन की पवित्रता का चोट पहुँचात है।
गिरिश भारद्वाज ने ‘एक्स’ पर लिखल कि कवनो राजनेता के साथ ऐसा ना करे के चाहि। नेता लोगन का भगवान के साथ या भगवान के रूप में दिखावे के इ काम धर्म के विरुद्ध है और देवता लोगन के सम्मान का कम करत है। भारद्वाज ने आगे कहल कि ‘विश्ववाणी’ से हमका ऐसी सामग्री के उम्मीद ना रहल। धर्म का राजनीतिक फायदा खातिर मामूली ना समझे के चाहि।
बहुत से सोशल मीडिया यूजरन ने शिवकुमार का हिंदू देवता के रूप में दिखावे पर सवाल उठाइल, कइयन ने उनके पुरान कानूनी मामलान का भी याद दिवाल। बेंगलुरु के जीव विज्ञान के प्रोफेसर गिरिधर उपाध्याय ने ‘एक्स’ पर लिखल, “कितनी गिरी हुई बात है! एक पूर्व तिहाड़ कैदी की तुलना हिंदू भगवान से कर दिहलें। लोग कवनो हद तक गिर सकत हैं।”
