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जब देस पर गैस संकट आयल त मोदी जी ‘समुद्र मंथन’ कराय के खोजि लिहिन गैस, अंडमान सागर में मिलल नेचुरल गैस क बड़का भंडार

अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस की नई खोज से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री रणनीति अउर मजबूत भई अहै। हम आप लोगन क बताइ देईं कि सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड अंडमान द्वीप समूह के पूरबी तट से लगभग पंद्रह किलोमीटर दूर श्री विजयपुरम-3 नांव के खोजी कुआं में प्राकृतिक गैस पावा गय हय। ई खोज भारत के समुद्री ऊर्जा अभियान खातिर बहुत बड़ी उपलब्धि मानि जात अहै, काहे से एकरे से देस के गहरे समुद्री क्षेत्रन में हाइड्रोकार्बन संसाधन क संभावना अउर बढ़ गई अहै। केंद्रीय पेट्रोलियम अउर प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ई खोज क जानकारी देत भये कहेन कि अंडमान सागर ऊर्जा क एगो बड़का क्षेत्र बनके उभरत अहै। ई कुआं तीन सौ पचपन मीटर गहरे समुद्र में खोदा गय रहा, जवने क कुल गहराई उन्नीस सौ मीटर से जादा रही। इयोसीन संरचना में टेस्टिंग क दौरान लगातार गैस निकरत अउर आगी क लपट देखाय से प्राकृतिक गैस क मौजूदगी क पुष्टि भई। टेस्टिंग के बाद कुआं में दबाव तेजी से बढ़ गया अउर गैस क उत्पादन शुरू हो गया।

खोज अउर भविष्य क योजना

ई खोज अंडमान अपतटीय क्षेत्र एएन ओएसएचपी 2018-एक में भई अहै, जवने क खुला क्षेत्र अनुज्ञा नीति के तहत आवंटित कीन गय रहा। ऑयल इंडिया लिमिटेड बताइस कि वर्तमान खोज अभियान में अब तक तीन खोजी कुआं खोदा गय अहैं, जवने में से दूठु में हाइड्रोकार्बन मिल गय अहै। ई साफ संकेत अहै कि अंडमान बेसिन में ऊर्जा संसाधन क बहुत संभावना अहै। कंपनी अब गैस क नमूनन क जांच करत अहै ताकी ओकर संरचना अउर ऊष्मीय क्षमता क पता लगावा जाय सके। वैज्ञानिकन क मानना अहै कि एकरे से ई समझे में मदद मिलि कि गैस कइसे बनी अउर ओकर स्रोत का अहै। ई जानकारी भविष्य के खोज खातिर बहुत सटीक अउर कारगर साबित होई।

समुद्र मंथन मिशन अउर सरकारी संकल्प

ई उपलब्धि क केंद्र सरकार के ‘समुद्र मंथन मिशन’ के तहत मिलल सफलता मानि जात अहै। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस 2025 क मौका पर ई राष्ट्रीय गहरे समुद्री खोज अभियान क एलान कीन रहेन। ई मिशन क मकसद भारत के अपतटीय क्षेत्रन के गहरे अउर बहुत गहरे समुद्र में ऊर्जा संसाधनन क खोज क तेज कइब अहै। सरकार साफ कीन अहै कि देस के हाइड्रोकार्बन भंडार क पूरा फायदा उठाय खातिर आने वाल बरिसन में ढेर सारे गहरे समुद्री कुआं खोदे जइहें। सितंबर 2025 में ऑयल इंडिया लिमिटेड विजयपुरम-दो नांव के दूसरे कुआं में भी प्राकृतिक गैस मिलल क जानकारी दिहिस रहे। अब कंपनी क्षेत्र में अउर विस्तार से जांच करत अहै, जवने में भूकंपीय आंकड़न क विश्लेषण अउर त्रि-आयामी सर्वेक्षण शामिल अहै।

रणनीतिक अउर आर्थिक महत्व

देखा जाय त ई खोज अइसे समय में भई अहै जब पच्छिम एशिया में जारी संकट के चलते दुनिया भर में तेल क बाजार अस्थिर अहै। भारत अपनी ऊर्जा जरूरत क बड़ा हिस्सा बाहर से मंगवात अहै, एहसे पच्छिम एशिया में कउनो तनाव होय त सीधा असर देस पर पड़त अहै। अंडमान सागर में गैस मिलल से भारत क कई तरह से फायदा होइ। सबसे बड़का फायदा ऊर्जा आत्मनिर्भरता अहै। अगर इहाँ बड़का गैस भंडार विकसित होत हय, त बाहर से ईंधन मंगवाय क निर्भरता कम होई अउर बिदेसी मुद्रा क बचत होई। साथ ही, अंडमान अउर निकोबार द्वीप समूह हिंद महासागर में भारत क स्थिति क अउर मजबूत करिहें, जवने से नौसैनिक उपस्थिति क नया आधार मिलि। औद्योगिक विकास क बात करीं त गैस, बिजली, खाद अउर पेट्रोरसायन जइसे क्षेत्रन में नया निवेश अउर रोजगार पैदा होई।

हरदीप पुरी क बयान अउर उम्मीद

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ऑयल इंडिया लिमिटेड क बधाई देत भये कहेन कि अंडमान सागर में ऊर्जा क नया महासागर सामने आया अहै। उ आपन सोशल मीडिया पोस्ट में कहेन कि श्री विजयपुरम-3 कुआं में गैस क मिलब भारत के गहरे समुद्री ऊर्जा अभियान खातिर बहुत उत्साहजनक अहै। हरदीप पुरी ई बात पर जोर दिहिन कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘समुद्र मंथन मिशन’ के तहत भारत अब अपनी खोज क महत्वाकांक्षा क नई दिशा देत अहै। विशेषज्ञन क मानना अहै कि अगर अंडमान बेसिन में अइसे अउर सफलता मिलत रही, त भारत ऊर्जा क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ि जाई। समुद्र मंथन मिशन केवल गैस मिलब भर नइखे, बल्किन ई भारत क लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता अउर सामरिक ताकत क मजबूत कइब अहै।

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