
शिव पुराण कय अनुसार, जलंधर कय पैदाइश महादेव कय तीसर नयन कय गुस्सा से भवा रहा, जेकर नाम जलंधर रहा। भगवान शिव कय आपन ही अंश यानी जलंधर कय वध करय का पड़ा। अब आपकय मन में सवाल आवत होई कि महादेव काहे कइ दिहिन जलंधर कय वध। अइसन में अइया, ई आर्टिकल में हम आपकय एकर बारे में विस्तार से बतावत अही।
काहे शिव जी कइ दिहिन जलंधर कय वध?
पौराणिक कथा कय अनुसार, एक बार महादेव कय तीसर नयन से गुस्सा रूपी आगि निकरी। देवता लोगन कय अरजी पर महादेव वव आगि कय समुंदर में फेंक दिहिन। जल से पैदा होय कय नाते ओकर नाम जलंधर पड़ा। वव शिव कय ही अंश रहा। जलंधर बड़ा होइके दैत्यन कय शक्तिशाली राजा बना। ओकर बियाह वृंदा नाम कय कन्या से भवा। वृंदा भगवान विष्णु कय भक्त अउर पतिव्रता मेहरारू रही। सतीत्व कय प्रभाव कय नाते जलंधर कय एक अभेद्य सुरक्षा कवच मिला रहा। ई चमत्कारिक कवच कय नाते कउनो देवता या हथियार जलंधर कय मारि नाय पावत रहा।
जलंधर आपन शक्ति कय अहंकार में चूर रहा। वव तीनों लोकन पर कब्जा कइ लिहिस। वव एक बार माता पार्वती कय अगवा करय खतिर कैलाश पर चढ़ाई कइ दिहिस। एकर बाद महादेव अउर जलंधर कय बीच लड़ाई शुरू भई, लेकिन वृंदा कय सतीत्व होय कय नाते महादेव कय अमोघ त्रिशूल भी जलंधर कय मारय में फेल होइ जात रहा।
देवता लोग भगवान विष्णु से बिनती कइलन, अइसन सृष्टि कय रक्षा खतिर देवता लोग आगू अइलन अउर भगवान विष्णु से बिनती कइलन। एकर बाद श्रीहरि जलंधर कय रूप धइके वृंदा कय महल पहुँचि गइलन। वृंदा आपन पति समझके छुइ लिहिस। एही नाते वृंदा कय पतिव्रत धर्म टूटि गवा अउर जलंधर कय अजेय सुरक्षा कवच भी खतम होइ गवा। ववही बीच महादेव त्रिशूल कय मदद से जलंधर कय मुड़ी धड़ से अलग कइके वध कइ दिहिन।
जब वृंदा कय भगवान विष्णु कय ई छल कय पता चला, तव वव गुस्सा में आके भगवान विष्णु कय पत्थर बनय कय श्राप दिहिस अउर वृंदा पति कय साथ सती होइ गई। वृंदा कय पवित्र भस्म से एक पौधा निकरा, जेकर नाम भगवान विष्णु तुलसी रखिन। उहँई वरदान दिहिन कि शालिग्राम कय रूप में उनकर बियाह तुलसी से होई अउर बिना तुलसी कय उनकर पूजा अधूरी मानि जाई।




