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जन-गण-मन: का वाकई मुस्लिमन कय मन मने जहर घोलत है मदरसा कय पढ़ाई?

पश्चिम बंगाल से लइके उत्तराखंड, बिहार अउर उत्तर प्रदेश तक अब मदरसा कय व्यवस्था पर जइसन सख्त निगरानी अउर कार्रवाई सुरु भवा है, उ देश कय सुरक्षा, सामाजिक संतुलन अउर शिक्षा व्यवस्था कय बचावै कय अभियान बनि गवा है। बरसों तक वोट बैंक कय राजनीति कय नाते जिन संस्थानन पर सवाल उठावै कय भी राजनीतिक जोखिम माना जात रहा, आज उही मदरसन कय मान्यता, वित्तीय पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था अउर शिक्षा स्तर कय जांच होइ रही है। इ बदलाव बतावत है कि अब सरकारें आंख मूंदिके बइठब नाहीं चाहत।

पश्चिम बंगाल मने नई सरकार पूरा राज्य कय मदरसन कय व्यापक सर्वे सुरु कय दिहे है। जिला अधिकारियन कय निर्देश दीन्ह गवा है कि उ हर मदरसा कय स्थापना, पंजीकरण, कानूनी स्थिति, मास्टरन कय संख्या, छात्रावास व्यवस्था अउर पाठ्यक्रम तक कय जानकारी जुटावें। इ कदम एह नाते महत्वपूर्ण अहै काहे से कि लमहर समय से राज्य मने मदरसन कय संख्या तौ तेजी से बढ़त रही, पै ओकर संचालन अउर गतिविधि पर प्रभावी निगरानी नाहीं रही। सरकार अब इ जानब चाहत है कि कतने संस्थान नियम कय तहत चलत अहैं अउर कतने सिर्फ धार्मिक कट्टरता या संदिग्ध गतिविधि कय अड्डा बनि चुके अहैं। इतना ही नाहीं, राज्य सरकार मदरसन मने ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य कय कय साफ संदेश दिहे है कि देश से ऊपर कोई संस्थान नाहीं होइ सकत।

उत्तराखंड तौ इससे भी बड़ अउर ऐतिहासिक कदम उठाये है। समान नागरिक संहिता लागू करै कय बाद राज्य सरकार मदरसा शिक्षा व्यवस्था कय गहराई से समीक्षा कीन्ह। अध्ययन मने सामने आवा कि बड़ संख्या मने मदरसा बिना मान्यता कय चलत रहे। जहां मान्यता रही भी, उहां शिक्षा कय स्तर बहुत कमजोर रहा। अनेक संस्थानन मने योग्य मास्टर तक नाहीं रहे। सबसे गंभीर बात इ सामने आई कि आधुनिक शिक्षा से दूर राखै गे लरिका आगे चलिके समाज कय प्रगतिशील दिशा देबय कय बजाय कट्टर सोच कय वाहक बनत रहे। एह नाते राज्य सरकार पुराना मदरसा कानून खतम कय कय नवा ‘अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान कानून’ लागू कीन्ह। अब कउनो भी संस्थान कय मान्यता तभी मिली जब उ आधुनिक शिक्षा, पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था, योग्य मास्टरन अउर सामाजिक सौहार्द कय नियमन कय पालन करी। इ फैसला सिर्फ शिक्षा सुधार नाहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ल कदम है।

जम्मू-कश्मीर अउर सीमा क्षेत्रन मने काम कइ चुकल अधिकारियन कय अनुभव कय आधार पर इ निष्कर्ष निकरा कि बिना सुधार कय मदरसा व्यवस्था सामाजिक समरसता कय लिए खतरा बनि सकत है। देखै जा तौ सवाल सीधा है कि देश कय भविष्य मने वैज्ञानिक, डाक्टर, प्रशासनिक अधिकारी अउर आधुनिक सोच वाले नागरिक चाहिं या फिर अइसन कट्टरपंथी तत्व जो समाज मने विभाजन अउर नफरत फैलाएं। जब शिक्षा कय केंद्र आधुनिक ज्ञान कय बजाय सिर्फ संकीर्ण धार्मिक सोच बनि जाय, तब उ व्यवस्था राष्ट्र निर्माण नाहीं बल्कि राष्ट्र विघटन कय माध्यम बनि जात है।

बिहार सरकार भी एह दिशा मने कठोर कदम उठात भये सब सरकारी सहायता प्राप्त मदरसन अउर संस्कृत विद्यालयन कय राज्यव्यापी लेखा परीक्षा (audit) सुरु कय दिहे है। सरकार साफ कय दिहे है कि जो संस्थान फर्जी तरीका से चलत अहैं या सरकारी धन कय दुरुपयोग करत अहैं, ओनका बंद कय दीन्ह जाई। विपक्ष इका राजनीति बताइकय विरोध करत है, पै सच इ है कि यदि कउनो संस्थान सरकारी सहायता लेत है तौ ओका जवाबदेह भी होबय पड़ी। शिक्षा मंत्री साफ कहेन कि उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करब है। इ तर्क पूरी तरह उचित है, काहे से कि शिक्षा कय नाम पर चलत कउनो भी संस्थान कय कानून से ऊपर नाहीं मान जाइ सकत।

उहीं उत्तर प्रदेश कय गाजियाबाद मने अवैध मदरसा कय सील होय कय घटना इ स्थिति कय गंभीरता कय अउर उजागर कय दिहिस। जांच मने सामने आवा कि मदरसा बिना पंजीकरण कय चलत रहा। आगि सुरक्षा अउर बिजली सुरक्षा प्रमाणपत्र तक नाहीं रहे। छात्रावास मने लरिकन कय लिए मूलभूत सुविधा कय कमी रही। इ साफ तौर पर लरिकन कय जिंदगी कय साथ खिलवाड़ रहा। अइसन संस्थानन मने लरिकन कय किस तरह कय शिक्षा अउर मानसिकता दी जात होइ, एकर अंदाजा लगायब कठिन नाहीं है। प्रशासन सख्त कार्रवाई कय कय साफ कय दिहिस कि अब अवैध ढांचा अउर बिना मान्यता प्राप्त संस्थानन कय बर्दाश्त नाहीं कय जाई।

सबसे चिंताजनक तथ्य इ है कि कई मामला मने मदरसन कय आसपास कट्टरपंथ, अवैध गतिविधि अउर सामाजिक तनाव कय घटना सामने आवत रही हैं। जब कउनो संस्थान कय वित्तीय व्यवस्था, पाठ्यक्रम, मास्टर अउर गतिविधि पर निगरानी नाहीं होत, तब उ राष्ट्रविरोधी तत्वन कय लिए सुरक्षित ठिकाना बनि सकत है। यही नाते अब सिर्फ सर्वे या औपचारिक जांच काफी नाहीं है। जरूरत एह बात कय अहै कि हर मदरसा कय आधुनिक शिक्षा, संविधान, राष्ट्रीय एकता अउर वैज्ञानिक सोच कय दायरा मने लावा जाय। जो संस्थान अइसन करै कय तैयार नाहीं, ओनका बंद कय देबय देश कय हित मने होई।

देखै जा तौ राज्य सरकारन कय मौजूदा कार्रवाई एह नाते सराहनीय अहै काहे से कि उ बरसन से चले आवत राजनीतिक तुष्टीकरण कय बजाय राष्ट्रीय हित कय प्राथमिकता दिहे अहैं। शिक्षा कय नाम पर कट्टरता, अवैध गतिविधि अउर अलगाववादी सोच कय बढ़ावा देबय वाले संस्थानन पर कठोर कार्रवाई ही मजबूत भारत कय दिशा मने निर्णायक कदम साबित होई। देश कय कानून, संविधान अउर राष्ट्रीय सुरक्षा कउनो भी धार्मिक या राजनीतिक दबाव से ऊपर अहै, अउर अब सरकारें यही संदेश पूरा देश कय देत अहैं। बहरहाल, एह मुद्दा पर उच्चतम न्यायालय कय वरिष्ठ अधिवक्ता अउर भारत कय ‘पीआईएल मैन’ कय रूप मने विख्यात अश्विनी उपाध्याय कय कहब है कि भारत होइ या पाकिस्तान, मदरसा तालीम एक समान है, एह नाते अगर मदरसा बंद नाहीं भवा तौ देश बर्बाद होइ जाई।

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