
उत्तराखंड कै उत्तरकाशी मां स्थित सुंदर लेकिन ऊबड़-खाबड़ पहाड़न कै बीच आज रेस्क्यू टीम एक बहुतै कठिन तलाशी अभियान चलाइ रही अहै। वहीं, दूसरी तरफ रामनगर कै एक मध्यमवर्गीय परिवार एक अइसन भयानक इंतज़ार से गुज़र रहा अहै जौन कभी खत्मै नाहीं होत। ऊ परिवार खतिज, इ घटना अब केवल खबरन मां आवै वाली ‘लापता ट्रेकर’ की कहानी नाहीं अहै, बल्कि एक लाडली बिटिया, प्यारी पोती अउर बहिन कै ज़िन्दगी कै सवाल अहै, जेकै अचानक गायब होय से पूरा परिवार अंदर से टूटि गवा अहै। 24 साल की होनहार MBA छात्रा बबीता पांडे बीते 30 मई का उत्तरकाशी कै प्रसिद्ध दयारा बुग्याल (Dayara Bugyal) मां ट्रेकिंग कै दौरान लापता होइ गइ रहीं। आज उनका गायब भए पूरे 12 दिन बीत चुका अहै। देश की तमाम बड़ी रेस्क्यू एजेंसी कै दिन-रात कै मेहनत कै बाद भी, अब तक बबीता कै कउनो सुराग नाहीं मिल पाया अहै। रामनगर मां उनकर घर पर सन्नाटा पसरा अहै अउर हर बातचीत बस इहे एक प्रार्थना पर खत्म होत अहै: “बबीता सुरक्षित घर लौट आवै।”
एक पिता कै गुहार: ‘हम बस उनका वापस चाहित अही’
बबीता कै पिता, गोपाल पांडे कहत अही कि परिवार इ अनिश्चितता से जूझ रहा अहै। जब भी ऊ अपनी बिटिया कै बारे मां बात करत अही तौ उनकर आवाज़ भरि आवत अहै; उनकर बिटिया कै भविष्य सपना अउर महत्वाकांक्षा से भर रहा। परिवार कै सदस्यन कै अनुसार, बबीता MBA कै पढ़ाई कै साथ-साथ पार्ट-टाइम नौकरी भी करत रही। ऊ एक मेहनती अउर पक्का इरादा वाली बिटिया रही, जौन अपने अउर अपने परिवार खतिज बेहतर भविष्य बनावै पर ध्यान देत रही। अब, उन सपनन कै जगह चिंता अउर अनसुलझे सवाल ले लिहिन अहै। “हम बस इहे चाहित अही कि हमारी बिटिया सुरक्षित वापस आ जावै,” उनकर पिता बार-बार अधिकारीन से गुहार लगावत अही।
परिवार पहिले से ही मुश्किलन से जूझ रहा अहै
इ त्रासदी परिवार का बहुतै बुरी तरह प्रभावित करिन अहै काहे से ऊ हाल कै बरसन मां पहिले से ही कई बड़ी चुनौती का सामना करत अही। लगभग पाँच साल पहिले, गोपाल पांडे एक सड़क दुर्घटना मां गंभीर रूप से घायल होइ गए रहे अउर स्थायी रूप से दिव्यांग होइ गए रहे। चल-फिर न पाय कै कारण, ऊ अब अपना दिन अपनी बिटिया कै बारे मां खबर कै इंतज़ार करत बितावत अही। परिवार कै सदस्यन कै कहब अहै कि ऊ कबहूँ नाहीं सोच रहे रहे कि ट्रेकिंग कै यात्रा एक बुरा सपना बनि जाई, जेकर वजह से पूरा परिवार संकट मां पड़ि गवा अहै।
अपनी पोती का याद कर दादी कै बुरा हाल
बबीता कै दादी, लक्ष्मी पांडे मां भी ओतने दर्द दिखात अहै; ऊ रेस्क्यू टीम अउर अधिकारीन से तलाशी जारी रखै कै अपील करत अही। भावना मां बहिकै, ऊ अधिकारीन से अपनी पोती का सुरक्षित घर लावैन खतिज हर संभव कोशिश करै कै आग्रह करिन अहै। उनकर अपील उ परिवार कै भावना का देखात अहै जौन उम्मीद कै आस लगाये बैठा अहै, भले ही हर गुज़रत दिन और मुश्किल होत जाइ रहा अहै।
तलाशी अभियान तेज भवा
बबीता दो दोस्तन कै साथ दायरा बुग्याल गइ रहीं अउर 30 मई का लापता होवै से पहिले गोई बेस कैंप मां रुकी रहीं। अभी भारतीय सेना, ITBP, NDRF, SDRF, पुलिस, वन विभाग अउर आपदा प्रबंधन टीम कै मदद से बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चल रहा अहै। इ तलाशी अभियान मां 150 से ज़्यादा कर्मचारी, ड्रोन अउर खोजी कुकुरन का लगावा गवा अहै। जइसे-जइसे तलाशी चल रही अहै, जांच करै वाला ट्रेकिंग कै इंतज़ामन पर भी ध्यान दै लागिन अहै। अधिकारीन का कहब अहै कि परमिट से जुड़ी गड़बड़ी मिलै कै बाद संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी कै जांच कीन जाइ रही अहै। एजेंसी कै रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कइ दीन्ह गवा अहै, जबकि बबीता कै साथ ट्रेकिंग पर गए दो साथी अउर ट्रेक से जुड़ल दूसरा लोगन से भी पूछताछ कीन जाइ रही अहै। अधिकारीन खतिज, मुश्किल इलाकन मां इ ऑपरेशन एक चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान बनि गवा अहै। वहीं, बबीता कै परिवार खतिज हर पल डर अउर उम्मीद कै बीच एक संघर्ष जैसा अहै। जब बचाव टीम जंगलन, घाटियन अउर पहाड़ी रास्तान का छानत अहै, तब उनकर करीबी उ खबर कै इंतज़ार करत अही जेकर खातिर ऊ 30 मई से प्रार्थना करत अही – कि बबीता पांडे मिल गइ अहै अउर घर लौट रही अहै।