
वैदिक पंचांग कै अनुसार, आज यानी 11 जून का परम एकादशी व्रत कीन्ह जाइ रहा अहै। इ एकादशी 3 साल मां एक बार आवत अहै। धार्मिक मान्यता कै अनुसार, इ व्रत का विधि-विधान स करै स साधक का सब पाप स छुटकारा मिलत अहै अउर धन मां अपार बढ़त होत अहै। इ दिन व्रत कथा का पाठ न करै स साधक शुभ फल पावै स वंचित रहि जाइत अहै। तौ पूजा कै बखत व्रत कथा का पाठ जरूर करैं। आवां, पढ़त अहीं परम एकादशी व्रत कै कथा।
परम एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा कै अनुसार, एक सुमेधा नाम कै ब्राह्मण काम्पिल्य नगर मां रहत रहा। ब्राह्मण अउर ओकर मेहरारू पाहुनन कै सेवा करत रहे। उनकर लगे बहुत धन तौ ना रहा, पै फिर भी उ मन लगाइ कय सेवा करत रहे। एक दिन ब्राह्मण चिंता मां आपन मेहरारू स बोलिन कि हम लोगन कय लगे धन कै भारी कमी अहै, जवने कै नाते पाहुनन कै सेवा मां दिक्कत होइ सकत अहै। ब्राह्मण आगे कहिन कि हम सोचत अहीं कि सहर जाइ कय कउनो काम कर लीं, जवने स धन मिली। इ स हमार समस्या दूर होइ जाइ। मेहरारू ब्राह्मण स कहिन कि जेतना धन आदमी कै किस्मत मां लिखल रहत अहै, ओका ओतना ही धन मिलत अहै। अगर प्रभु कै कृपा भई, तौ घर बैठे ही हमार गरीबी दूर कर दिहैं। मेहरारू कै बात सुनिके ब्राह्मण आपन विचार तजि दिहिन।
ऋषि कौण्डिल्य कय ब्राह्मण दंपत्ति का सलाह
कुछ दिन बाद ब्राह्मण दंपत्ति कै घर ऋषि कौण्डिल्य आइन। ब्राह्मण अउर मेहरारू ऋषि कै खूब सेवा करिन। ऋषि का देखिके ब्राह्मण दंपत्ति बहुत खुस भये। उ ऋषि स धन कै कमी दूर करै कै उपाय पूछिन। ऋषि उनका अधिक मास कै कृष्ण पक्ष कै परम एकादशी व्रत करै कै सलाह दिहिन। ऋषि कहिन कि इ व्रत का करै स तोहार सब परेशानी दूर होइ जाइ। इ व्रत का विधिपूर्वक करै स गरीबी नाश होत अहै अउर सुतल भाग्य जाग उठत अहै।
ब्राह्मण दंपत्ति विधिपूर्वक करिन परम एकादशी व्रत
ऋषि कै दिहल सलाह का ब्राह्मण दंपत्ति मानिन। परम एकादशी कै व्रत विधि-विधान स करिन। इ व्रत का करै स उनकर जीवन स गरीबी सदा कय ताईं दूर होइ गय अउर खूब धन मिलल। दुनौ जने सुख स आपन जीवन बिताइन। आख़िर मां दुनौ का बैकुंठ लोक कै प्राप्ति भवा।




