
भारतीय सनातन परंपरा मां शिखा कय विशेष महत्व माना गवा अहै। अक्सर आपने ब्राह्मणन अउर वैदिक कर्मकांड करै वाले लोगन कय सिर कय पीछे एक छोट चोटी देखी होइहै, जवने का शिखा कहा जात अहै। इ खाली एक धार्मिक पहचान नाहीं अहै, बल्कि एकरे पीछे ढेर आध्यात्मिक अउर पारंपरिक मान्यताएं भी जुड़ी भई अहैं। एस्ट्रोपत्री कय ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा कय अनुसार, शिखा खाली सनातनी परंपरा कय धार्मिक पहचान नाहीं, बल्कि शरीर मां ऊर्जा कय एक मुख्य केंद्र भी अहै। सनातन संस्कृति मां शिखा धारण करैक परंपरा हजारन वरिसन से चलि आवत अहै अउर इका ज्ञान, अनुशासन अउर आध्यात्मिक साधना कय प्रतीक माना जात अहै।
मानसिक एकाग्रता पै पड़त अहै असर?
धार्मिक मान्यतन कय अनुसार, सिर कय बीच कय भाग का बहुत महत्वपूर्ण माना गवा अहै। ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा बतावत अहैं, सिर कय बीच कय भाग मां सुषुम्ना नाड़ी कय स्थान होत अहै, जहवां सहस्रार चक्र स्थित अहै। शिखा बांधे से मानसिक एकाग्रता बढ़त अहै, बुद्धि तेज होत अहै अउर ब्रह्मांडीय सकारात्मक ऊर्जा शरीर मां नीक तरह संचित रहत अहै। उनकय कहब अहै कि इ तथ्य वैज्ञानिक दृष्टि से भी पूरी तरह प्रमाणित होइ चुका अहै। वैदिक परंपरावन मां शिखा का खाली बाहरी स्वरूप कय हिस्सा नाहीं माना गवा, बल्कि इका साधना अउर आत्मानुशासन से भी जोड़ा गवा अहै। यही वजह अहै कि वेद-अध्ययन, यज्ञ, पूजा-पाठ अउर अउर धार्मिक अनुष्ठानन कय दौरान शिखा धारण करै पै विशेष जोर दीन्ह गवा अहै।
का कहत अहैं ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा?
धार्मिक नियमन कय अनुसार, पूजा या मंत्र जप करै कय समय शिखा का बांधिकै राखब शुभ माना जात अहै। इ बारे मां चंद्रेश शर्मा कहत अहैं, पूजा-पाठ, यज्ञ-अनुष्ठान या गायत्री मंत्र जप कय समय शिखा का बांधिकै राखब अनिवार्य माना गवा अहै। बंधी भई शिखा मन का भटके से रोकत अहै अउर हमार मानसिक एकाग्रता का बनाए रखै मां विशेष रूप से सहायक होत अहै।
प्राचीन गुरुकुल परंपरा मां भी विद्यार्थी अउर आचार्य लोगन द्वारा शिखा धारण कीन्ह जात रही। इका ज्ञान प्राप्ति, अनुशासन अउर वैदिक जीवनशैली कय प्रतीक माना जात रहा। आज भी देस कय ढेर हिस्सावन मां धार्मिक परंपरावन का पालन करै वाले लोग शिखा राखत अहैं। सनातन धर्म मां शिखा खाली एक चोटी नाहीं, बल्कि परंपरा, आस्था अउर सांस्कृतिक विरासत कय प्रतीक मानी जात अहै। यही कारण अहै कि सदियन बाद भी इ परंपरा अनेक परिवारन अउर धार्मिक समुदायवन मां जीवित अहै।




