
हिंदू धरम मां हर एक तिथि कय आपन अलग महातम अहै। एकादशी इनहीं मां से एक अहै, जवन भगवान विष्णु का समर्पित अहै अउर सनातन धरम मां बहुत अहम मानि जात अहै। इ दौरान बहुत सारा नियम कय पालन कीन जात अहै अउर पूजा-पाठ कीन जात अहै। हर साल कुल 24 एकादशी मनाइ जात अहै, लेकिन इनमा सबसे जियादा महत्वपूर्ण अउर शक्तिशाली निर्जला एकादशी का मानि जात अहै।
निर्जला एकादशी इतनी खास मानि जात अहै कि इ एक बरत का करै से साल भर कय 24 एकादशी कय फल मिलि जात अहै। लेकिन सवाल इ उठत अहै कि आखिर अइसा काहे अहै कि इसे इतना खास अउर अहम मानि जात अहै। आवं आज इ आर्टिकल मां जानत अही कि काहे निर्जला एकादशी का 24 एकादशी के बराबर मानि जात अहै।
सबसे श्रेष्ठ अहै निर्जला एकादशी
हिंदू धरम अउर सनातन परंपरा मां एकादशी कय बरत कय एक बहुत ही विशेष महातम अहै। पूरा साल मां कुल 24 एकादशियां आवत अहैं, लेकिन अधिकमास होय पय इनकर संख्या 26 होइ जात अहै। हर एकादशी कय आपन एक अलग महातम, कहानी अउर नियम होत अहै। लेकिन इन सब मां ‘निर्जला एकादशी’ का सबसे सर्वोच्च अउर सबसे कठिन मानि गा अहै। ‘निर्जला’ सबद कय अरथ ही अहै- बिना जल यानी पानी कय। यानी इ बरत मां सिरिफ अन्न ही नाहीं, बल्कि पानी कय भी पूरा तरह से त्याग करै कय होत अहै।
24 एकादशियों कय पुन्य एक ही दिन मां
इ बारे मां हम विस्तार से जानै कय खातिर एस्ट्रोपत्री कय जानल-मानल ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा जी से पूंछिन। उ बताइन कि निर्जला एकादशी का साल भर कय सब 24 एकादशियों के बराबर मानि जात अहै। एकर पीछे कय सबसे बड़ा कारन इ अहै कि जेठ महीना कय झुलसा दैय वाली गर्मी अउर भयंकर लू कय बीच पूरा दिन अउर रात बिना पानी पिए रहब आसान काम नाहीं अहै। इ मानिस कय परम संयम, ओकर सच्ची तपस्या अउर ओकर अटूट संकल्प कय सबसे बड़ी परिक्षा अहै। जवन भी मानिस इ कठिन परिक्षा से सफलतापूर्वक गुजरत अहै, ओका साल भर कय सब उपवासों कय पुन्य सिरिफ इ एक दिन मां ही मिलि जात अहै।
इ साल कब अहै निर्जला एकादशी?
बात करिन इ साल इ बरत कय तारीख कय, तौ इ बार निर्जला एकादशी कय पावन बरत 25 जून, गुरुवार का राखि जाइ। पंचांग के अनुसार, जेठ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जून शाम 6:12 बजे से सुरु होइके 25 जून रात 8:09 बजे तक रही। अइसा मां सूर्योदय कय तिथि यानी उदयातिथि का देखत भवा इ बरत 25 जून का राखि जाइ।




