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जापान PM से दिल्ली क बजाय गुवाहाटी मां काहे मिलिहें मोदी? का करय जात अहै मोदी अउर हिमंत क जोड़ी?

अउर आप देखे होब कि बिदेस से आवै वाले रास्ट्राध्यक्षन क साथ प्रधानमंतरी क दुइपक्षीय बार्ता अक्सर दिल्ली या देस क बड़े महानगरन मां होत रही। बाकिर अब तसबीर बदलत अहै। अगिला महीना भारत दौरा पर आवत जापान क प्रधानमंतरी सनई ताकाइची क साथ प्रधानमंतरी नरेंदर मोदी गुवाहाटी मां शिखर बार्ता करिहें। आसाम क राजधानी मां होवे वाला इ एतिहासिक आयोजन देखात अहै कि मोदी सरकार अब पूरा छेत्र क देस क नई आर्थिक अउर रणनीतिक ताकत क रूप मां बिकसित करय मां जुटी अहै।

सब से जरूरी बात इ अहै कि जापान क प्रधानमंतरी क साथ 50 से जादा बड़ी जापानी कंपनी क मुखिया भी गुवाहाटी पहुंचत अहैं, जौन साफ संकेत अहै कि आवै वाले समय मां पूरबोत्तर भारत बिश्व स्तरीय निवेस, उदोग अउर ब्यापार क बड़ा केंद्र बनय जात अहै। जापानी कंपनी क 50 से जादा सीईओ क गुवाहाटी आवा इ बात क प्रमाण अहै कि आसाम अब केवल चाय अउर तेल तक सीमित राज नाहीं रहा, बलकि भबिस्स क उदोग अउर प्रधौगिकी राजधानी बनय क ओर तेजी से बढ़त अहै।

बतावा जात अहै कि इ शिखर सम्मेलन मां सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, बाहन उदोग, आपूर्ती सिंकला, रणनीतिक तेल भंडारण अउर आधारभूत ढांचा जइसन छेत्रन मां बड़े समझौता होइ सकत अहैं। सुजुकी, टोयोटा अउर इतोचु जइसन दिग्गज जापानी कंपनी क मौजूदगी इ सम्मेलन क अउर जादा जरूरी बनावत अहै। जापान पहिले ही अगला दस बरिस मां भारत मां दस लाख करोड़ येन क निवेस क बादा कर चुका अहै अउर अब ओकर एक जरूरी हिस्सा पूरबोत्तर भारत क ओर बढ़त देखात अहै।

देखा जाय त जापान अउर भारत दुनौ हिंद प्रशांत छेत्र मां चीन क बढ़त आक्रमकता क लइके चिंता मां अहैं। अइसन समय मां आसाम अउर पूरबोत्तर भारत क भूमिका बहुत जरूरी होइ जात अहै। बंगाल क खाड़ी से लइके दक्खिन पूरब एसिया तक बनय वाले उदोग गलियारा मां आसाम क परबेस दुआर क रूप मां बिकसित कीन जात अहै। इहइ कारन अहै कि जापान पूरबोत्तर क केवल निवेस क अबसर क रूप मां नाहीं, बलकि रणनीतिक साझेदार क रूप मां देखत अहै।

जापान लमहर समय से भारत जापान एक्ट ईस्ट फोरम क जरिया पूरबोत्तर मां सड़क, पुल अउर संपर्क परियोजनन मां सहयोग करत रहा अहै। अब इ सहयोग नई ऊंचाइ पर पहुंचत देखात अहै। जापान क पुरान प्रधानमंतरी फुमियो किशिदा भी अपने दर्सटिकोण मां पूरबोत्तर भारत, बंगाल क खाड़ी अउर दक्खिन पूरब एसिया क जोड़य वाले उदोग सिंकला क परिकल्पना रखे रहे। आज बइहइ सपना जमीन पर उतरत देखात अहै।

इ पूरा घटनाक्रम क सब से बड़का लाभ आसाम अउर पूरा पूरबोत्तर क मिलय वाला अहै। एक त इहां बड़े पैमाना पर रोजगार क अबसर पैदा होइहें। सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, बाहन निर्माण अउर डेटा केंद्र जइसन परियोजना लाखन जुवाकन क नई दिसा दइहें। साथ ही पूरबोत्तर क आधारभूत संरचना अभूतपूर्ब रूप से मजबूत होइ। सड़क, रेल, जलमारग अउर हवाई संपर्क बेहतर होय से ब्यापार अउर पर्यटन दुनौ क गति मिलि। ओकर अलावा, पूरबोत्तर अब केवल सीमाबरती छेत्र नाहीं रही, बलकि भारत क आर्थिक प्रगति क नइ इंजन बनी।

मोदी सरकार क सब से बड़ी सफलता इ रही अहै कि ओकर पूरबोत्तर क सुरक्षा समस्या क बजाय बिकास क सक्ती क रूप मां देखे अहै। एक समय रहा जब आसाम बम धमाका, बंद अउर हिंसा क खबरन से पहचाना जात रहा। निबेसक इहां आवय से डरत रहे। बाकिर पिछला कुछ बरिसन मां तसबीर पूरी तरह बदल चुकी अहै। प्रधानमंतरी नरेंदर मोदी अउर मुक्खयमंतरी हिमंत बिस्वा सरमा मिलि के जइसन उग्रबाद पर कठोर परहार कीन, सांती समझौता क आगू बढ़ाइन अउर बिकास योजना क जमीन पर उतारिन, ओकर से आसाम क भबिस्स बदल गवा।

आज आसाम मां उग्रबादी संगठन क खात्मा होइ चुका अहै। सीमा सुरक्षा मजबूत भई अहै। अबैध गतिबिधियन पर अंकुस लाग अहै। सब से जरूरी बात इ अहै कि लोगन क भीतर भबिस्स क लइके बिसबास पैदा भवा अहै। इहइ बिसबास अब बिदेसी निवेस क आकर्षित करत अहै। हिमंत बिस्वा सरमा मुक्खयमंतरी बनय क बाद परसासनीक गति अउर राजनीति क इच्छासक्ती क अइसन उदाहरण दियिन, जौन आसाम क तेजी से निबेस केंद्र मां बदल दिहिन।

मोरीगांव मां टाटा समूह द्वारा स्थापित देस क पहिली स्वदेसी सेमीकंडक्टर इकाई एकर सब से बड़का उदाहरण अहै। रिलायंस अउर अडानी समूह भी ऊर्जा अउर डेटा केंद्रन मां भारी निवेस करत अहैं। मोदी सरकार क एक्ट ईस्ट नीति भी पूरबोत्तर क नई पहचान दिहिन अहै। पहिले जहं इ इलाका दिल्ली से दूर माना जात रहा, बइहं अब इ दक्खिन पूरब एसिया से जोड़य वाले परबेस दुआर क रूप मां बिकसित कीन जात अहै। म्यानमार, बांग्लादेश अउर आसियान देसन क साथ ब्यापारिक संपर्क बढ़य से आसाम क सामरिक अउर आर्थिक उपयोगिता कई गुना बढ़ि गवा अहै।

देखा जाय त मुंबई-अहमदाबाद बुलेट रेल परियोजना से लइके अत्याधुनिक जापानी शिंकानसेन तकनीक तक, भारत अउर जापान क साझेदारी अब केवल महानगरन तक सीमित नाहीं रही। गुवाहाटी मां होवे वाला इ शिखर सम्मेलन इ संदेस देत अहै कि आवै वाला समय पूरबोत्तर भारत क अहै। हालांकि चुनौती अब भी मउजूद अहैं। जटिल कर ब्यबस्था, परसासनीक परिक्रिया अउर निवेस संबंधी कुछ बाधा अब भी बिदेसी कंपनी क परेसान करत अहैं। बाकिर जौन तेजी से आसाम मां माहोल बदला अहै, ओकर से साफ अहै कि आवै वाले बरिसन मां इ छेत्र भारत क सब से बड़ी आर्थिक कहानी मां सामिल होई।

बहरहाल, गुवाहाटी मां होय वाली भारत-जापान शिखर बार्ता केवल दुइ देसन क मुलाकात नाहीं, बलकि नइ भारत क उदय क कहानी अहै। इ ओय आसाम क बिजै गाथा अहै जौन असांती से उठि के बिकास, निवेस अउर बिश्व रणनीती क केंद्र तक क सफर तय कीन। अउर इ पराइबर्तन क केंद्र मां अहैं प्रधानमंतरी नरेंदर मोदी अउर मुक्खयमंतरी हिमंत बिस्वा सरमा, जे पूरबोत्तर क भय अउर बंदूक क राजनीति से निकालि के बिकास अउर बिसबास क राह पर आगू बढ़ाय दिहिन अहैं।

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