
भारतीय संगीत मां ‘स्वर साम्राज्ञी’ के नाम से मशहूर लता मंगेशकर की गायकी कै आज की पीढ़ी भी दीवानी अहै। उन्होंने भारतीय सिनेमा कय कई अइसन गीत दीहिन जवन सदाबहार होइ गवा। म्यूजिक लवर्स तव उनकी गायकी कय दीवाने अहैं हीं, संगीत जगत के महान गायक भी उनकी गायकी कय तारीफ करे बिना न रहि पावत रहे। ई बीच संगीत की दुनिया के महान गायक गुलाम अली खां लता दीदी के बारे मां कुछ अइसन कहि दिहिन रहे जवन सुनिके सब हैरान भी भइ अउर खुश भी।
20वीं सदी के तानसेन रहें बड़े गुलाम अली खां
20 सदी के तानसेन कहे जाने वाले बड़े गुलाम अली खां कय नाम संगीत की दुनिया मां बहुत अदब से लीना जात अहै। उ भारतीय संगीत के सबसे प्रतिभाशाली गायकों मां से एक रहे। भले ही उनका करियर बहुत लंबा न रहा हो, लेकिन कम वक्त मां भी उ संगीत की दुनिया मां उ काम करि गए जवन सदियों तक याद रखा जाई।
लता दीदी के लिए कही थी ई बात
लता मंगेशकर, गुलाम अली खां कय अपना उस्ताद मानती रहीं अउर दोनों से जुड़ा एक बहुत मजेदार किस्सा अहै जब पंडित जसराज के साथ उ गीतों अउर बंदिशों पर चर्चा करत रहे। तभी बीच मां लता मंगेशकर की गायकी कय भी जिक्र भवा, जिस पर गुलाम अली खां तुरंत बोल पड़िन कि “ससुरी कभी बेसुरी नहीं होती”। इतना ही नहीं एक लोकप्रिय किस्से के अनुसार, जब उस्ताद गुलाम अली खां पहली बार लता मंगेशकर की आवाज रेडियो पर सुनिन तव उ इतना डूब गए कि अपनी ही बंदिश भूल गए रहे।
गुलाम अली खां के बेहतरीन गीत
गुलाम अली खां कई गीतों कय अपनी आवाज दिहिन, जिनमां ‘याद पिया की आए’, ‘आए ना बालम’, ‘नैना मोरे तरस गए’, ‘सैंया बोलो’, ‘प्रेम अगन जियरा’ शामिल अहैं। गुलाम अली खां कय 1962 मां पद्म भूषण से नवाजा गवा रहा। शुरुआत मां गुलाम अली खां फिल्मों के लिए गाने से मना कर दिहिन रहे, लेकिन के. आसिफ की शानदार फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ (1960) के लिए उन्होंने अपना ई सख्त नियम तोड़ा अउर राग सोहिनी मां ‘प्रेम जोगन बन के’ गाना गाकर एक यादगार प्रस्तुति दीहिन।
लता मंगेशकर मानती रहीं उस्ताद
लता मंगेशकर बड़े गुलाम अली खां कय अपना उस्ताद मानती रहीं, उन्होंने कई बार इंटरव्यू मां कहे कि उ उनका बहुत आदर करती हैं अउर उनके जैसे महान कलाकार रोज-रोज पैदा न होत। 50 के दशक मां लता अपने एक कॉन्सर्ट के लिए गुलाम अली खां साहब कय आशीर्वाद लेवे गई रहीं।



