
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कै कार्यकर्ता अभिजीत दिपके १३ अक्टूबर कय दिल्ली मां अपने साथियों कय हिरासत मां लीहे जावै कै बाद सरकार कै निंदा करिन। ऊ कहिन कि जवन लोग जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहरावै कय गैर-कानूनी मानत अहैं, उई देशद्रोही अहैं। दिपके कै इ टिप्पणी दिल्ली पुलिस द्वारा पार्टी कै सदस्या आशुतोष रांका, सौरव दास अउर अजिंक्य शिंदे कय हिरासत मां लीहे जावै कै बाद आवा, जवन उ सबेर विरोध स्थल पर जमा भवा रहेन।
उ पुलिस कै कार्रवाई कै कानूनी अउर नैतिक वैधता पर सवाल उठवात भए कहिन कि तिरंगा फहराना कब से कानून का उल्लंघन हो गया? जवन कोई भी जंतर-मंतर पर तिरंगा फहरावै कय उल्लंघन मानत अहै, उ देशद्रोही अहै। अउर अगर सौरव दास, आशुतोष रंका, अजिंक्य शिंदे अउर तिरंगा फहरावै खातिर गिरफ्तार कीन गे अन्य लोगन पर आरोप लगावा जात अहै, तौ एकिक खिलाफ कड़ा कार्रवाई होइच चाही। तिरंगा फहरावै खातिर आप कवनो कय कइसे गिरफ्तार कर सकत हव? इ कइसन देश अहै? इ कइसन शासन अहै?
हिरासत कै स्थितियन कय लेइके चिंताअन पर बात करत भए, दिपके गिरफ्तार भवा लोगन कय कानूनी अधिकार न दै कै खिलाफ चेतावनी दीहिन। ऊ कहिन कि पूरा देश जंतर-मंतर बन जाइ। जंतर-मंतर सिर्फ एक जगह नाइ अहै; इ विरोध कै भावना अहै। हमार उम्मीद अहै कि दिल्ली पुलिस उ सब्र कय अपने वकीलन से बात करै देइ। अइसन नाइ होइच चाही कि उ सब्र कय २४ घंटा तक वकील से बात करै कै इजाजत दीन्हे बिना राखा जाइ, जइसे मोर साथे भवा रहे। कानूनी प्रक्रिया कै तहत, उ सब्र कय वकील से बात करै कै इजाजत मिलै चाही काहेकि आप कवनो कय इ तरह से नाइ उठा सकत हव।
दिपके पुलिस कै कार्रवाई कय तानाशाही सोच कै सबसे बड़ा उदाहरण बताइन अउर सरकार पर सार्वजनिक जगहन् कय अपने निजी संपत्ति कै तरह इस्तेमाल करै कै आरोप लगाइन। ऊ कहिन कि तानाशाही नाइ चाहत कि कवनो जंतर-मंतर जाए अउर तिरंगा फहराए। उ सब्र कय लागत अहै कि पूरा देश उनके निजी संपत्ति अहै। अइसन नाइ अहै; जंतर-मंतर इ देश कै लोगन् कै अहै, १४० करोड़ भारतिइन कै अहै। ऊ अपने मुख्य मांग पूरा होइ तक विरोध जारी रखै कै संकल्प लेइत भए कहिन कि हम हुआँ तिरंगा फहराब अउर तब तक फहरावत रहब जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नाई देइ देत।
