
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शुक्रवार का नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगइन कि उ अलग-अलग आर्थिक क्षेत्रन मां मोनोपॉली (एकाधिकार) अउर डुओपॉली (दुइ कम्पनियन का दबदबा) का बढ़ावा देत अहैं। उ आरोप लगइन कि सरकार की नीतियन से कुछ खास पूंजीपति समूह अउर खुद भारतीय जनता पार्टी (BJP) का फायदा होत अहै। X पर एक पोस्ट मां खड़गे कहिन कि मोदी जी की आर्थिक नीति का मकसद अर्थव्यवस्था का कंट्रोल अपने पसंदीदा पूंजीपति दोस्तान का सौंपब अहै, ताकि बदले मां BJP का मुनाफे मां अपना हिस्सा मिलत रहे। कॉम्पिटिशन खत्म करके अउर मोनोपॉली व डुओपॉली थोपकर, उनुई सिर्फ़ BJP की तिजोरी भरे का काम करिन अहैं अउर आर्थिक उदारीकरण की नींव का बर्बाद कर दीहिन अहैं।
उ टेलीकॉम सेक्टर का उदाहरण देत भेलै कहिन कि 2014 के पहिले इमां 13 कंपनियाँ रहिन, जबकि आज सिर्फ़ तीन बड़ी प्राइवेट कंपनियाँ बची अहैं। खड़गे घरेलू एविएशन सेक्टर का भी जिक्र करिन अउर कहिन कि 2014 के पहिले इमां सात बड़ी कंपनियाँ रहिन, जो अब घटकर सिर्फ़ दुइ रह गई अहैं।
खड़गे आगे कहिन कि चाहे डिजिटल पेमेंट होय, सीमेंट होय या फ़ूड डिलीवरी ऐप्स, हर जगह सरकार की प्राथमिकता कॉम्पिटिशन का खत्म करब रहा अहै। आर्थिक उदारीकरण का श्रेय लेत भेलै, कांग्रेस नेता बीजेपी पर अपने फ़ायदे के खातिर “आर्थिक आतंकवाद” फैलावे का आरोप लगइन। उ इ भी आरोप लगइन कि बीजेपी की नीतियन से माइक्रो, स्मॉल अउर मीडियम एंटरप्राइजेज़ (MSMEs) अउर दूसर छोट-मंझोले उद्योगन का नुकसान पहुँचा अहै, साथ ही देश के जुवानन मां भारी बेरोज़गारी बढ़ी अहै।
खड़गे कहिन कि बीजेपी सिर्फ़ अपने फ़ायदे के खातिर आर्थिक आतंकवाद का बढ़ावा देत अहै, जेकै कारण MSMEs अउर दूसर छोट-मंझोले उद्योग पूरी तरह से बंद होइ गवा अहैं अउर हमार जुवान भारी बेरोज़गारी का दंश झेलत अहैं।
इकै पहिले शुक्रवार का कांग्रेस सांसद जेबी माथर दावा करिन कि अमेरिकी सरकार द्वारा ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम’ का सस्पेंड करब अउर एकर बड़ी भारतीय IT कम्पनियन पर पड़े वाला असर, भारत के नीतिगत फैसला पर अमेरिकी प्रभाव का देखालत अहै। उ इ मुद्दा का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पेमेंट चार्ज मां बदलाव अउर कुछ सेक्टर का दी गई छूट से जोड़िन।
उ कहिन कि इ वही स्थिति अहै जब अमेरिका हमार UPI पेमेंट सिस्टम का प्रभावित करे की कोशिश कीहिन रहा, काहेकि पेमेंट के क्षेत्र मां दुनिया की दिग्गज कंपनियाँ – चाहे मास्टरकार्ड होय या वीज़ा – अमेरिका की ही रहिन। पै जब भारत मां UPI अउर RuPay मजबूत होत रहैं, तौ राष्ट्रपति ट्रंप अपनी शर्त थोपे शुरू कर दीहिन अउर कहिन कि इ पर चार्ज ना लागइचाहिए।
खड़गे कहिन कि इही तरह UPI पर चार्ज लगाए की शुरुआत भवा: पर्सनल इस्तेमाल का छोड़कर बाकी चीज़न या इंडस्ट्रीज़ के खातिर चार्ज तय कर दीहिन गवा; यहाँ तक कि आधिकारिक तौर पर बिजनेस ट्रांजेक्शन पर भी चार्ज लगा दीहिन गवा अउर एकर रकम भी तय कर दीहिन गवा। अब, इ छूट किसै दीहिन गवा? टेलीकॉम सेक्टर का, अउर टेलीकॉम सेक्टर मां कौन अहै? रिलायंस। बिजली के क्षेत्र मां किसै छूट दीहिन गवा? बिजली का काम कौन संभाल रहा अहै? अडानी। तौ, चाहे UPI का मामला होय, हम देखत अहैं कि वहू से शर्त थोपी जात अहै, पै इहाँ रिलायंस का छूट या रियायत दी जात अहै।
