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कांग्रेस ‘इस्लामाबाद MoU’ का मोदी कय विदेश नीति पर बड़वा झटका बताइस, पाकिस्तान कय बढ़त प्रभाव पर चिंता

बियफे कय कांग्रेस अमेरिका-ईरान शांति समझौता कय बाद केंद्र सरकार कय खूब आलोचना कीन। पार्टी कय कहब अहै कि एह समझौता कय “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग” नाव देब पाकिस्तान कय बढ़इ क्षेत्रीय अउर दुनिया भर मां प्रभाव कय दिखावत अहै, अउर ई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कय विदेश नीति कय खातिर एक बड़वा झटका अहै।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश बताइन कि अमेरिका अउर ईरान कय बीच 14-सूत्रीय “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग” आधिकारिक रूप से जारी कय दीन गा अहै।

रमेश X (ट्विटर) पर कहिन कि एहका ‘इस्लामाबाद MOU’ कहा जाब पाकिस्तान कय नई क्षेत्रीय अहमियत अउर दुनिया भर मां प्रभाव कय दिखावत अहै; ओही पाकिस्तान का जेका नवंबर 2008 मां मुंबई आतंकी हमला कय बाद डॉ. मनमोहन सिंह पूरी दुनिया मां अलग-थलग कर दिहे रहें। उनकर कहब अहै कि ई प्रधानमंत्री मोदी कय विदेश नीति कय तौर-तरीका, दुन्नो खातिर एक बड़वा झटका अहै। पाकिस्तान अब पच्छिम एशिया कय जियोपॉलिटिकल अउर सुरक्षा ढांचा मां अउर गहराई से शामिल होइ गवा अहै, जेकर भारत खातिर गंभीर अउर बड़वा परिणाम होइ सकत हैं।

एह समझौता का एक अहम घटनाक्रम बतावत रमेश कहिन कि अगर ई MoU कय अक्षरशः अउर ओकर भावना कय मुताबिक पालन कीन गा, तौ ई एक बड़वा तरक्की होइ। उ आगे कहिन कि लेकिन एहमां दुन्नो पक्ष कय बीच ‘गलतफहमी कय समझौता’ (Memorandum of Misunderstanding) बनय कय भी डर अहै। फिलहाल तौ बस इतना ही कहा जा सकत अहै कि अगला 60 दिन बहुत अहम होइ।

रमेश आगे कहिन कि एह समझौता से ईरान का बहुत फायदा भवा अहै। उनकर कहब अहै कि एह MoU से ईरान का बहुत महत्वपूर्ण अउर बिना सोझा-बिचार कय फायदा मिला अहै, जेसे ऊ अपनी ताकत अउर मजबूती साबित कीन अहै।

क्षेत्रीय प्रतिक्रिया कय जिक्र करत ऊ कहिन कि गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) कय देसन सावधानी से प्रतिक्रिया दीन अहै अउर ऊ अब अपने राजनयिक रिश्ता पर फेर से विचार कर सकत हैं। उनकर कहब अहै कि GCC कय जउन देसन ईरान कय हमला कय सबसे ज्यादा असर झेलिन अहै, ऊ MoU कय सावधानी से स्वागत तौ कीन अहै, लेकिन ऊ पक्का दूसरे देसन कय साथ अपने रिश्ता पर फेर से सोचर विचार करब।

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