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ओमान कै खाड़ी मां भारतीयन कै मौत पर भड़का भारत, मोदी अउर जयशंकर कै गुस्सा देख ट्रंप अउर मार्को रुबियो भइ गए सन्न

ओमान कै खाड़ी मां अमेरिकी नौसेना कै कार्रवाई मां तीन भारतीय नाविकन कै मौत भई, जवने कय बाद भारत जउन कड़ा तेवर अपनावत अमेरिका कय घेरा अहै, ओसे दुनौ देसन कै रिश्ता मां नई बेचैनी पैदा भइ अहै। विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से सीधे बात करिन अउर साफ-साफ कहिन कि व्यापारी जहाजवन पर अइसन घातक फौजी कार्रवाई कतई जायज नाहीं अहै। फिनलैंड दौरे पर रहे जयशंकर रुबियो कय फोन लगाइके भारत कय कड़ा विरोध दर्ज कराइन। इ एक साफ संदेश रहा कि भारतीय नागरिकन कय जान जोखिम मां डालय वाली कार्रवाई नई दिल्ली कय कतई मंजूर नाहीं अहै। विदेश मंत्री स्तर पर भई इ बातचीत इ बात कय इशारा अहै कि भारत इ पूरी घटना कय गंभीर कूटनीतिक अउर मानवीय संकट मानत अहै।

घटना कय गंभीरता इ बात से समझी जा सकत है कि भारत लगातार दूसरी बार दिल्ली मां अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स कय विदेश मंत्रालय तलब करिस। आम तौर पर भारत विदेशी राजनयिकन कय बुलावे खतिन ‘तलब’ जइसन सख्त सब्दन से बचत है, मुदा इ बार विदेश मंत्रालय साफ-साफ कहिस कि अमेरिकी नौसैनिकन द्वारा भारतीय नाविकन कय ले जाए वाले जहाजवन पर लगातार हमला अस्वीकार्य अहै अउर इ हमला मां तीन भारतीयन कय “दुखद अउर जउन टाली जा सकत रही, अइसन” मौत भइ अहै।

असल मां, बुधवॉर कय अमेरिकी फउजन एमटी सेत्तेबेल्लो (MT Settebello) नाम कै जहाज पर हमला करिन रहा। जहाज पर सवार 24 भारतीय नाविकन मां से 21 जने बचा लिए गए, मुदा तीन भारतीय लापता भइ गए रहे, जउन बाद मां मृत घोषित भइ गए। ओकरे अगिले दिन अमेरिकी फउजन ओमान तट कै लगे गिनी बिसाऊ झंडा वाले टैंकर एमटी जलवीर (MT Jalveer) कै इंजन कक्ष पर हेलफायर मिसाइल दाग दिहिन। जहाज पर मौजूद सब 20 भारतीय नाविक सुरक्षित निकाल लिए गए, मुदा लगातार दुई दिन मां भारतीयन कय निशाना बनाए वाली इ घटना नई दिल्ली कय हिलाइके रख दिहिस अहै।

विदेश मंत्रालय अमेरिका कय साफ चेतावनी दिहिस कि नागरिक जहाजवन के खिलाफ घातक फौजी ताकत कै इस्तेमाल समुद्री व्यापार कै सुरक्षा, स्थिरता अउर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कय कमजोर करत है। भारत इहो मांग करिस है कि इ क्षेत्र मां तैनात अमेरिकी फउज भविष्य मां अइसन घटना रोके खतिन हर जरूरी कदम उठावें ताकि कउनो निर्दोष नागरिक कय जान न जाय।

इसी बीच इ पूरे विवाद मां तब अउर नया मोड़ आइ गवा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर होरमुज जलडमरूमध्य से निकलत भारतीय जहाजवन पर ड्रोन हमला करय कै आरोप लगाइ दिहिन। ट्रंप सोशल मीडिया पर कहिन कि भारतीय जहाजवन पर भवा ड्रोन हमला “पूरी तरह अस्वीकार्य” अहै। हालाँकि ईरान इ आरोप कय सिरे से खारिज करत “बेबुनियाद” बताइस। भारत स्थित ईरानी दूतावास पलटवार करत कहिस कि अमेरिका तीन भारतीय जहाजवन पर हमला अउर तीन निर्दोष भारतीय नाविकन कै मौत से दुनिया कय ध्यान भटकावे कय कोशिश करत है। ईरान आरोप लगाइस कि एक हफ्ता कै भीतर अमेरिकी फउजन भारतीय जहाजवन कय निशाना बनाइन, जबकि अब दोष तेहरान पर मढ़य कय कोशिश कीन जात है।

हम बताइ दीं कि ट्रंप कै इ टिप्पणी अइसन समय आइ अहै जब मानि जात है कि फ्रांस मां होय वाले जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होय सकत है। देखल जाय तौ इ पूरा संकट उस भीषण युद्ध कै देन अहै, जउन 28 फरवरी कय अमेरिका अउर इस्राइल द्वारा ईरान पर कीन गए हमला के बाद भवा। ओकरे बाद होरमुज जलडमरूमध्य कै आसपास पैदा भवा नाकेबंदी अउर फौजी तनाव पूरी दुनिया कै समुद्री व्यवस्था कय संकट मां डाल दिहिस अहै।

भारतीय नाविक, जउन वैश्विक समुद्री व्यापार कै रीढ़ मानि जात हैं, अब इ संघर्ष कै सीधे शिकार बनत जात हैं। अब तक इ युद्ध मां कम से कम 13 भारतीयन कै मौत होइ चुकी अहै, जबकि एक भारतीय अभी भी लापता बतावा जात है। इ आंकड़ा खाली संख्या नाहीं, बल्कि उन परिवारन कै त्रासदी अहै जउनकर रोजी-रोटी समुद्र से जुड़ी रही अउर जउन अचानक युद्ध कै आग मां झोंक दिए गए।

होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया कै ऊर्जा आपूर्ति कै सबसे अहम धमनी मानि जात है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति कै करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरत है। कतर, संयुक्त अरब अमीरात अउर कुवैत जइसन देश इ रास्ते पर बहुत निर्भर हैं। इहवा बढ़ैत तनाव अउर समुद्री अवरोध तेल अउर गैस कै कीमती मां उछाल ला दिहिस अहै। भारत समेत कई देसन खतिन रसोई गैस कै आपूर्ति भी प्रभावित भइ अहै।

भारत कै सामने अब दोहरी चुनौती अहै। एक तरफ ओका अपने नागरिकन अउर नाविकन कै सुरक्षा सुनिश्चित करय अहै, अउर दूसरी तरफ अमेरिका जइसन रणनीतिक साझेदार के साथ रिश्ता कय भी संतुलित राखय अहै। मुदा तीन भारतीयन कै मौत के बाद नई दिल्ली इ साफ कर दिहिस है कि राष्ट्रीय हित अउर नागरिकन कै सुरक्षा कै मुद्दा पर ओकरो कउनो समझौता नाहीं करि। देखल जाय तौ पश्चिम एशिया कै इ जंग अब खाली क्षेत्रीय संघर्ष नाहीं रहि गवा। ओकर असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार अउर समुद्री व्यापार के साथ-साथ भारत कै विदेश नीति पर भी गहराइ से देखाय लाग अहै। आवै वाले दिनन मां इ देखय बहुत जरूरी होइ कि अमेरिका भारत कै कड़ा विरोध कय केतनी गंभीरता से लेत है अउर का समुद्र मां बेगुनाह नागरिकन कय जान बचावे खतिन कउनो ठोस कदम उठावा जात है कि नाहीं।

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