
पच्छिम बंगाल मां सत्ता बदले के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर हालात तेजी से बदलत अहै। चुनाव प्रचार कय दौरान भाजपा नेता लोग खुलिकै घुसपैठियन कय खिलाफ अभियान चलावे कय बात कहिन। कई मंचन से अवैध बांग्लादेशियन कय “घुसपैठिया”, “दीमक” अउर “भार” जइसन शब्द से संबोधित कीन गवा रहा। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी “डिटेक्ट, डिलीट अउर डिपोर्ट” नीति कय एलान करत साफ कहिन कि अवैध रूप से रहत लोगन का वापस भेजा जाई। इकरे बाद सीमा पर कार्रवाई अउर तेज होइ गवा।
हम आपन का बताइ दीं कि भारत अउर बांग्लादेश कय बीच चार हजार किलोमीटर से जियादा लंबी सीमा अहै, जवने मां सबसे बड़ा हिस्सा पच्छिम बंगाल मां पड़त अहै। बरसन से इ सीमा अवैध घुसपैठ, तस्करी अउर फर्जी कागजन कय जरिया प्रवेश कय रास्ता बनी रही अहै। अब भारतीय सुरक्षा एजेंसी इ पूरे नेटवर्क पर सख्ती से प्रहार करत अहै। सीमा सुरक्षा बल कई इलाकन मां कांटेदार तार लगावे, नदी मारगन पर निगरानी बढ़ावे अउर अवैध प्रवेश रोके खातिर विशेष अभियान शुरू कीन अहै। रिपोर्ट कय मुताबिक नदी क्षेत्रन मां मगरमच्छ अउर जहरीले सांप छोड़य तक कय योजना बनाई गई, ताकि घुसपैठियन खातिर रास्ता पूरी तरह बंद कय दीं जाय।
इही बीच बांग्लादेश कय ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई अहै। ढाका आरोप लगावा अहै कि भारत कई लोगन का जबरदस्ती सीमा पार धकेलत अहै। बांग्लादेश सीमा रक्षक बल कय अनुसार मई 2025 से जनवरी 2026 तक दो हजार से जियादा लोगन का भारत से बांग्लादेश मां धकेला गवा। इमां कुछ भारतीय नागरिक अउर म्यांमार कय लोग भी शामिल बताए गए। कई मामला मां सीमा पर दुनों देसन कय सेना कय बीच तनावपूर्ण हालात बन गए। कुछ परिवार कई दिन तक नो मैन’स लैंड मां फँसे रहे।
हालाँकि, भारत मानत अहै कि अवैध घुसपैठ अब राष्ट्रीय सुरक्षा खातिर सबसे बड़ा खतरा बनि गवा अहै। सीमावर्ती राज्यन मां जनसंख्या संतुलन तेजी से बदलत अहै। फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र अउर राशन कार्ड कय जरिया लाखन बांग्लादेशी बरसन से भारत मां बसत चले गए। इकरा से रोजगार, संसाधन अउर आंतरिक सुरक्षा पर दबाव बढ़ गवा अहै। इहे कारण अहै कि अब केंद्र अउर राज्य सरकार मिलिकै पहचान, सत्यापन अउर निष्कासन कय प्रक्रिया का तेज करत अहै।
इकरे अलावा, सीमा विवाद कय साथ-साथ तस्करी कय मुद्दा भी तेजी से उभरि के आवा अहै। बांग्लादेश सीमा रक्षक बल हाल ही मां भारत भेजत जात भारी मात्रा मां लहसुन अउर यूरिया खाद जब्त कीन अहै। अधिकारी कहत अहैं कि सीमा पार तस्करी रोके खातिर लगातार अभियान चलावा जात अहै। इ साफ संकेत अहै कि सीमा खाली घुसपैठ कय ही नहीं, बल्कि अवैध कारोबार कय भी बड़ा गलियारा बनी अहै।
रोहिंग्या शरणार्थियन कय मुद्दा भी इ पूरे विवाद का अउर जटिल बनावत अहै। बांग्लादेश कय शिविरन मां रहत रोहिंग्या भारत कय सख्ती से डरात अहैं। कई रोहिंग्या संगठन आरोप लगाइन कि भारत मां उवनका लगातार प्रताड़ना, हिरासत अउर हिंसा कय सामना करेक पड़त अहै। कुछ मामला मां समुद्र मां धकेले जइसन आरोप भी लाग। दूसरी ओर, भारतीय सुरक्षा एजेंसी कय तर्क अहै कि रोहिंग्या नेटवर्क कय इस्तेमाल कई कट्टरपंथी अउर अपराधी संगठन कय सकत अहैं, इहें सख्ती जरूरी अहै।
उधर, भारत अउर बांग्लादेश कय संबंधन पर भी एकर असर पड़य लाग अहै। गंगा जल संधि अउर तीस्ता जल बंटवारे जइसन पुरान विवाद पहिले से लंबित अहैं। अब सीमा पर बढ़त तनाव दुनों देसन कय रिश्ता का अउर संवेदनशील बनाइ दीं अहै। इ बीच, संयुक्त राष्ट्र दुनों देसन से मानवाधिकार कय सम्मान करत संवाद कय जरिया समाधान निकाले कय अपील कीन अहै।
बहरहाल, एक बात बिल्कुल साफ अहै। भारत अब अवैध घुसपैठ का कौनों कीमत पर स्वीकार करेक मूड मां नाहिं देखात अहै। सीमा पार से आवय वाले लोगन का इ समझ लेयक चाही कि भारत कौनों खुला मैदान नाहिं अहै जहवां फर्जी पहचान बनाइक बरसन तक छुपि जाइ सकि। जो लोग अवैध तरीका से भारत मां प्रवेश करिहें, कानून तोड़िहें या देस कय सुरक्षा अउर सामाजिक संतुलन का बिगाड़य कय कोसिस करिहें, उनकर खिलाफ कठोर कार्रवाई तय अहै। बांग्लादेशी घुसपैठियन खातिर इ साफ चेतावनी अहै कि भारत कय सीमा, कानून अउर संप्रभुता कय साथ खिलवाड़ अब भारी पड़ि।
अवैध प्रवेश, फर्जी कागजात अउर तस्करी कय नेटवर्क पर शिकंजा कस गवा अहै। सीमा सुरक्षा बल से लइकै राज्य प्रशासन तक अब पूरी ताकत कय साथ सक्रिय अहैं। आवे वाले दिनन मां इ अभियान अउर व्यापक होय वाला अहै, इहें घुसपैठियन का चाही कि उ जल्द से जल्द भारत से चलि जायं।