
अब कारगह-ए-दहर मां लागत है बहुत दिल ऐ दोस्त कहीं ये भी तिरा गम तो नहीं है। 50 कै दौर कै वो मशहूर शायर जिन्होनें बॉलीवुड मां 300 से ज्यादा गाने लिखिन। हिंदी सिनेमा कै एक ऐसे गीतकार कै कहानी आज हम रउवा सबकाब बतावत अहैं, जउन ‘पहला नशा’ से लेकर ‘चला जाता हूं’ जैसे गानों मां दिल छू जाने वाले बोल लिखकर इश्क कै नई जुबां दीहिन।
जेकर लिखे गानों कै जब लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) से लेकर मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) सहित कई सिंगर्स गायिन तौ वो सदाबहार बन गवा। कौन रहें वो शायर जेका चाचा नेहरू खिलाफ लिखे पर जेल जाए परा रहा, पढ़व उनके बारे मां ये दिलचस्प किस्सा।
कविता मां जवाहर लाल नेहरू पर लिखी गई रही ये बात: इस लेख मां हम जिस सत्ता विरोधी शायर अउर हिंदी सिनेमा कै गीतकार कै कहानी बतावत अहैं वो कोई और नाहीं बल्कि मजरूह सुल्तानपुरी अहैं। 1 अक्टूबर 1919 मां पाकिस्तान कै सुल्तानपुर मां राजपूत मुस्लिम परिवार मां जनमे मजरूह सुल्तानपुरी ने 1946 मां रिलीज हुई फिल्म ‘शाहजहां’ कै खातिर गाने लिखिन। एकर बाद उहाँ ‘मेंहदी’, ‘अंदाज’ अउर ‘आरजू’ जैसी फिल्मों कै खातिर भी गाने लिखिन।
जैसे-जैसे उनका पहचान मिला, वैसे-वैसे उनके वामपंथी झुकाव उनका मुश्किल मां डार दिहिस। सरकार का उनके सत्ता विरोधी कविताएं बिल्कुल पसंद नाहीं आवत रहीं, इहई से उनका बलराज साहनी जैसे एक्टर्स के साथ जेल भेज दिहा गवा रहा।
1948 मां भारतीय कम्युनिस्ट कै कोलकाता मां हुई दूसरी कांग्रेस बैठक के बाद कम्युनिस्टों कै देशभर मां गिरफ्तारी सुरु भवा। दरअसल, मजरूह सुल्तानपुरी ने एक कविता मां तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू कै तुलना हिटलर से कीहिन रहा अउर ‘कॉमनवेल्थ कै दास’ कहि दिहिन रहा। जेकर वजह से कम्युनिस्टों अउर सरकार के बीच तनाव बढ़ गवा।
मजरूह सुल्तानपुरी ने माफी मांगे से कई लिहिन रहा इंकार: तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का अपनी कविता मां इस तरह से संबोधित करे पर जब मजरूह सुल्तानपुरी से माफी मांगे के खातिर कहा गवा, तौ उहाँ ऐसा करे से साफ-साफ इंकार कर दिहिन। जेकर बाद उनका तकरीबन दो सालन कै खातिर जेल मां डार दिहा गवा।
जब उहाँ जेल मां रहें तौ उनके बड़ी बेटी कै जन्म भवा अउर उनका दो साल तक जेल मां बंद होए के कारण आर्थिक दिक्कतों कै सामना करे परा।
साल 1953 मां गुरुदत्त कै फिल्म से फिर भवा कमबैक: जेल से बाहर आवे के बाद साल 1953 अउर 1954 मां गुरुदत्त कै फिल्म ‘आरपार’ अउर ‘बाज’ से नए सिरे से सफर सुरु भवा। उनके कलम से लिखे गानों मां, ‘बाबूजी धीरे चलना’, ‘कभी आर कभी पार’, ‘ये लो मैं हारी पिया’ अउर ‘सुन-सुन-सुन जालिमा, प्यार हमको तुमसे हो गया है’ जैसे कई हिट सॉन्ग रहें।
यहाँ से उनके करियर का वो उड़ान मिला जहाँ से गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने कभी पीछे पलटकर नाहीं देखिन। उहाँ 70 से 80 कै दौर कै भी कई सुपरहिट गाने लिखिन, जेमां ‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करूंगा’ अउर ‘अरे जा रे हट नटखट’ जैसे गाने बाटे। 90 कै दौर मां तौ उहाँ ‘पहला नशा’, ‘यहाँ के हम सिकंदर’, अउर ‘यारों मेरे प्यारों’ जैसे गीत लिखिन।




