
भाजपा विधायक तापस रॉय तृणमूल कांग्रेस क संकट प टिप्पणी करत भये कहेन कि टीएमसी क कई नेता अउर विधायकन मा असंतोष बढ़त जात है। ई घटनाक्रम इशारा करत हैं कि पार्टी महाराष्ट्र मा भये फूट क तरे विभाजन क ओर बढ़त है। ममता बनर्जी क 1998 मा टीएमसी बनावै क बाद से ई अब तक क सबसे बड़का संकट मानै जात है। ई संकट क केंद्र मा वाम मोर्चा क पुरान चहेता ऋतब्रता बनर्जी हैं। ऋतब्रता क 2017 मा पार्टी-विरोधी काम क आरोप मा CPI(M) से निकाल दीन गय रहा अउर उ टीएमसी मा शामिल होइ गय रहे। अब, टीएमसी क बड़े नेता लोगन पार्टी-विरोधी काम क आरोप मा उनकौ पार्टी से निकाल दिहिन हैं।
ऋतब्रता पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुँचे अउर टीएमसी क 80 विधायकन मा से कम से कम 60 विधायकन क समर्थन होवै क दावा किहेन। बागी विधायक ऋतब्रता क पश्चिम बंगाल विधानसभा मा विपक्ष क नेता (LoP) बनावै क माँग करत हैं। अगर ई दावा सही साबित होत है, तौ बागी गुट क लगे दलबदल-विरोधी कानून क किनारा करत भये टीएमसी अउर ओकर निशान प दावा करै क खातिर भरपूर संख्या बल होइ सकत है।
ई स्थिति क तुलना 2022 मा शिवसेना मा भये विद्रोह से कीन जात है, जब एकनाथ शिंदे क नेतृत्व मा 40 से ढेर विधायकन उद्धव ठाकरे से अलग होइ क विद्रोह कइ दिहे रहे। उ समय एकीकृत शिवसेना क लगे 55 विधायक रहे। ऋतब्रता, जौन एक अउर निकाले गय विधायक संदीपान साहा क साथ टीएमसी विद्रोह क नेतृत्व करत हैं, उनका बंगाल क एकनाथ शिंदे कहा जात है। महाराष्ट्र क नेता अब आधिकारिक शिवसेना क प्रमुख हैं अउर पार्टी क धनुष-बाण चुनाव चिन्ह भी उन्हीं क लगे है।
रितब्रता कौन हैं?
रितब्रता बनर्जी क राजनीतिक सफर कतऊ से पारंपरिक नाहीं रहा है। उ आपन करियर क शुरुआत वामपंथी आंदोलन से कीन अउर छात्र संघ (SFI) मा एक छात्र कार्यकर्ता से लइके कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) क राज्यसभा सांसद तक क सफर तेजी से तय किहेन। कभी पार्टी क चहेता मानै जाय वाले रितब्रता क वामपंथी खेमा मा लोकप्रियता धीरे-धीरे कम होत गय, जौन नतीजा 2017 मा पार्टी से उनकर निष्कासन रहा। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस मा शामिल होय क बाद उनकर राजनीतिक किस्मत फेर चमक उठी। टीएमसी मा भी उ तेजी से तरक्की किहेन, पहले पार्टी क ट्रेड यूनियन विंग क प्रमुख भये अउर बाद मा राज्यसभा खतिर मनोनीत भये।
2026 मा रितब्रता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव मा भाजपा क लहर क बावजूद उलुबेरिया पुरबा निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल किहेन। अब अइसन लागत है कि उ टीएमसी क भीतर वइसा करै क कोशिश करत हैं जइसन शिंदे महाराष्ट्र मा हासिल किहे रहे – पार्टी नेतृत्व क खिलाफ विधायकन क एक बड़का वर्ग क लामबंद करब अउर बंगाल क सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकतन मा से एक मा विभाजन क धमकी देब।
रितब्रता बनर्जी क CPI(M) मा उत्थान अउर पतन
रितब्रता बनर्जी 1990 क दशक क बीच मा CPI(M) क छात्र संगठन SFI क छात्र कार्यकर्ता क रूप मा आपन राजनीतिक सफर शुरू किहेन। उ छात्र राजनीति मा तेजी से आगे बढ़े अउर आशुतोष कॉलेज छात्र संघ क महासचिव क रूप मा ख्याति पायन, जौन क बाद उ राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे।