
पश्चिम बंगाल कै सत्ताधारी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची कलह अउर बगावत अब दिल्ली के सियासी गलियारा तक पहुँच गै अहै। टीएमसी प्रमुख अउर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कै पार्टी पर पकड़ लगातार कमजोर होत देखाई देत अहै। पश्चिम बंगाल विधानसभा में बागी नेता रिताब्रता बनर्जी के समर्थन में 61 विधायकन के एकजुट होय के बाद, अब यह असंतोष संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में भी फूटी पड़ा अहै।
पार्टी के बहुत भरोसेमंद अउर वरिष्ठ सहयोगी सुखेंदु शेखर रॉय के राज्यसभा से इस्तीफा देय के ठीक एक हफ्ता बाद, बुधवार का टीएमसी की तेजतर्रार नेता सुष्मिता देव ने भी उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दई दीन अहै। एक हफ्ता के भीतर दू बड़े राज्यसभा सांसद के इस्तीफा ममता बनर्जी के खेमा में हड़कंप मचा दय अहै।
असम से लइके टीएमसी के राष्ट्रीय चेहरा तक के सफर
सुष्मिता देव देश की राजनीति, खास कइके उत्तर-पूर्व (North-East) के एक नामी चेहरा अहीं।
कांग्रेस से राजनीतिक शुरुआत: देव पहिले कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता रहीं अउर उन्होंने असम की हाई-प्रोफाइल सिलचर लोकसभा सीट से प्रतिनिधित्व करिन रहा।
2021 में थामिन रहा टीएमसी कै दामन: साल 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद, उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से मतभेद के चलते 2021 में पार्टी छोड़ दई अउर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होइ गै रहीं।
पार्टी में मिला रहा बड़ा कद: ममता बनर्जी ने पूर्वोत्तर में पार्टी के विस्तार खातिर सुष्मिता देव पर बड़ा दांव खेला रहा। उन्होंने बहुत कम समय में टीएमसी के भीतर तेजी से तरक्की करिन। उनका पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनावा गवा अउर बाद में इनाम के तौर पर राज्यसभा की सीट दइके संसद भेजा गवा रहा।
सुष्मिता देव के इस्तीफा के सियासी मायने अउर तृणमूल में संकट
सुष्मिता देव कै इस्तीफा अइसन समय में आवा अहै जब तृणमूल कांग्रेस आपन सबसे खराब आंतरिक संकट (Internal Crisis) से गुजर रही अहै। राजनीतिक विश्लेषक मानत हँय कि यह इस्तीफा केवल एक सांसद का पद छोड़ब नाहीं, बल्कि ममता बनर्जी की सांगठनिक लीडरशिप का खुली चुनौती अहै।
एक हफ्ता में दूसरा बड़ा झटका: पिछले हफ्ता सुखेंदु शेखर रॉय जैसे दिग्गज नेता का राज्यसभा छोड़ब अउर अब सुष्मिता देव का यह कदम साफ कइत अहै कि दिल्ली में टीएमसी कै संसदीय दल बिखर रहा अहै। एकरे साथ ही, बंगाल में 61 विधायकन का बागी गुट के साथ खड़ा होब यह संकेत देत अहै कि पार्टी के भीतर ‘ममता बनाम बागी’ की जंग अब आर-पार के मोड़ पर आ चुकी अहै।
यह इस्तीफा के बाद सुष्मिता देव के अगिला राजनीतिक कदम का लेके अटकलें तेज होइ गै हँय। राजनीतिक गलियारा में चर्चा अहै कि का वह वापस कांग्रेस में जइहीं या कउनो नवा विकल्प के तलाश में हँय। दूसरी ओर, यह बगावत ने आगू आवय वारे संसद सत्र से पहिले टीएमसी का बैकफुट पर ला खड़ा कय दय अहै।