
साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा की सभाओं मां एक गाना लगातार गूंजत रहा “जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएंगे।” यह गीत खाली चुनावी माहौल का हिस्सा ना रहा, बल्कि भाजपा की राजनीतिक रणनीति कै सबसे असरदार प्रतीक बन गवा रहा। राम मंदिर और अयोध्या कै मुद्दा भाजपा बरे भावनात्मक और राजनीतिक दुनों स्तर पे सबसे मजबूत हथियार साबित भवा और योगी सरकार सत्ता मां फिर से वापसी कीन्ह। मुदा अब जब उत्तर प्रदेश के अगले विधानसभा चुनाव मां एक साल से कम समय बचा अहै, तब अयोध्या राम मंदिर के चंदे के लेके उठल विवाद भाजपा का असहज कर दीहिन अहै। विपक्ष लगातार हमलावर अहै और मंदिर ट्रस्ट के काम-काज पे सवाल उठय लाग अहै, जवन अब राजनीतिक गलियारे से निकल के धार्मिक दायरे तक पहुँच गवा अहै।
पूरा विवाद उस समय तेज भवा जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव राम मंदिर मां आवत चंदे के प्रबंधन पे सवाल उठावत उच्च स्तरीय जांच की मांग कर दिहिन। ऊ आरोप लगावा कि भक्तन द्वारा दीन करोड़न रुपयन के चंदे मां गड़बड़ी भई अहै। एकरे बाद यह मामला खाली राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित ना रहा, बल्कि भाजपा के भीतर और मंदिर से जुड़ल लोगन के बीच भी बेचैनी देखाई देय लाग।
अयोध्या मां भाजपा के प्रवक्ता रजनीश सिंह प्रधानमंत्री का पत्र लिख के पूरा मामला कै जांच कवनो केंद्रीय एजेंसी से करवइय के मांग कर दिहिन। ऊ कहिन कि राम मंदिर करोड़न हिन्दून के आस्था कै केंद्र अहै और अगर चंदे मां कवनो तरह कै वित्तीय गड़बड़ी भई अहै, तो यह खाली आर्थिक अपराध ना अहै, बल्कि भक्तन के भावना का गहिर चोट पहुँचावत अहै। ऊ दोषी लोगन पे सख्त कार्रवाई के मांग भी कीन्ह।
मामला तब अउर गंभीर मानल जाय लाग जब मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अचानक अयोध्या दौरा पे आयिन। बतावा गवा कि तय कार्यक्रम से पहिले पहुँच के नृपेंद्र मिश्र करीब तीन घंटा तक बैठक कर के निर्माण कार्य और अउर व्यवस्थावन के जानकारी लीन्ह। हालाँकि ट्रस्ट के ओर से यह का सामान्य समीक्षा बतावा गवा, मुदा राजनीतिक हलका मां यह का विवाद के गंभीरता से जोड़ के देखल जात अहै।
उधर, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सफाई देत कहिन कि एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के कर्मचारी और स्वयंसेवक चंदे के गिनती मां लागल अहैं और अभी तक कवनो गड़बड़ी के जानकारी सामने ना आई अहै। बावजूद एकरे विवाद थमत ना देखात। समय बीवत जात अहै और चंदे के गिनती और प्रबंधन का लेके नया-नया आरोप सामने आवत अहैं।
इस बीच शिवसेना उद्धव गुट भी यह मुद्दा का जोर-शोर से उठाय अहै। पार्टी नेता संजय राउत कहिन कि उद्धव ठाकरे जल्द अयोध्या जइहें काहे से ऊ पूरा मामला से बहुत दुखी अहैं। राउत कहिन कि भगवान राम जइसन बुलावत अहैं और अब अयोध्या जा के यह मुद्दा का उठाव जरूरी हो गवा अहै। ऊ सवाल उठायिन कि आखिर राम मंदिर जइसे पवित्र स्थान के चंदे पे सवाल कइसे उठ सकत अहै। संजय राउत दावा करिन कि उनकर पार्टी मंदिर निर्माण बरे एक करोड़ रुपया दान दीहिन रहा और अब ट्रस्ट का जवाब देय का पड़ी। ऊ सीसीटीवी फुटेज और नृपेंद्र मिश्र के चुप्पी पे भी सवाल उठायिन।
मंदिर ट्रस्ट से जुड़ल महंत कमल नयन दास भी कहिन कि अगर कवनो तरह कै अनियमितता भई अहै, तो निष्पक्ष जांच होनी चाही। ऊ कहिन कि वर्तमान माहौल आरोप और प्रत्यारोप से भरल अहै और जांच करय वलन के पारदर्शिता पे भी सवाल उठत अहै। ऊ कहिन कि अइसन जांच होनी चाही जवने पे सब पक्ष का भरोसा होय और सच सामने आवै।
हम आप का बताइ देत अही कि महिपाल सिंह नाम के एक व्यक्ति, जवन खुद का मंदिर के पुरान लेखा प्रभारी बतावत अहैं, दावा करिन अहै कि लमहर समय से चंदे मां गड़बड़ी होत रही। ऊ कुछ प्रभावशाली लोगन के नाम लेत यह भी आरोप लगावा कि शिकायत करय के बाद उनका हटा दीहिन।
उधर, भाजपा यह पूरा मामला का विपक्ष के साजिश बतावत बचाव मां उतर आई अहै। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल कहिन अहै कि उत्तर प्रदेश के जनता अखिलेश यादव के आरोपन का गंभीरता से ना लेत। ऊ दावा करिन कि समाजवादी पार्टी के शासन मां प्रदेश विकास और कानून-व्यवस्था के मामले मां पिछड़ गवा रहा, जबकि भाजपा सरकार प्रदेश का नई दिशा दीहिन अहै। पीयूष गोयल भरोसा जतवइन कि 2027 मां भाजपा फिर सत्ता मां वापसी करी।
बहरहाल, राजनीतिक आरोप और सफाई के बीच यह मामला अब खाली चुनावी बयानबाजी तक सीमित ना देखात अहै। मानल जात अहै कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी घटनाक्रम के रिपोर्ट मांगल अहै और मंदिर प्रबंधन और व्यवस्थावन के समीक्षा होय सकत अहै। जइसे राम मंदिर भाजपा के सबसे बड़ राजनीतिक ताकत बना रहा, अब उसी मंदिर के चंदे के लेके उठत विवाद विपक्ष का नवा हथियार देत देखात अहै।