
शिवसेना अउर शिव सेना (UBT) के बीच चलत लड़ाई के बीच, महाराष्ट्र कै राजनीति मा ‘ऑपरेशन टाइगर’ कै चर्चा तौ जारी अहै, साथ ही नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर भी संभावित राजनीतिक बदलाव कै संकेत मिलै लाग अहैं। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक धर्मराव अत्राम दावा करिन कि शरद पवार कै अगुआई वाली NCP (SP) के पांच सांसद दिसंबर तक सत्ताधारी NCP गुट मा शामिल होइ सकत हैं।
अत्राम कहिन कि हर केऊ विकास कार्य करिकै वापस आवै चाहत अहै। कम से कम पांच लोकसभा सांसद 12 दिसंबर तक हमार साथे आ जइहैं। मनईन कय सुनेत्रा पवार कै अगुआई पर भरोसा अहै अउर उहय अहसास होइ गवा अहै कि आपन निर्वाचन क्षेत्रन मा विकास लानै खतिर ओन्है हमार साथे आवै का पड़ी। एकनाथ शिंदे सरकार मा पूर्व मंत्री रहै अत्राम, गढ़चिरौली जिला से आवत हैं।
उन्हैं कै ये बयान डिप्टी सीएम अउर NCP अध्यक्ष अजित पवार कै मेहरारू सुनेत्रा पवार अउर राज्यसभा सांसद पार्थ पवार कै नई दिल्ली मा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कै एक दिन बाद आवा अहै। हालांकि मुलाकात कै जानकारी सार्वजनिक नाहीं कय गय अहै, लेकिन पार्टी सूत्र कहत हैं कि NCP महाराष्ट्र मा वित्त विभाग चाहत अहै अउर ये मुलाकात BJP नेतृत्व के साथ बातचीत से जुड़ि होइ सकत अहै।
संख्या काहे मायने रखत अहै?
अभी NCP-SP के नौ सांसद हैं – आठ लोकसभा मा अउर एक राज्यसभा मा। दल-बदल विरोधी नियमन के तहत, अगर संसदीय पार्टी मा कवनो बंटवारा होत अहै, तौ अयोग्य घोषित होवै से बचै खतिर कम से कम दुई-तिहाई चुनै गय सांसदन् कै समर्थन जरूरी होइ। चूँकि NCP-SP के आठ लोकसभा सांसद हैं, एहसे कानूनी तौर पर अलग होवै अउर कवनो दूसर गुट मा शामिल होवै खतिर कम से कम छह सांसदन् कै जरूरत होइ। पार्टी के लोकसभा सांसदन् मा सुप्रिया सुले, अमोल कोल्हे, बजरंग सोनवणे, नीलेश लंके, सुरेश म्हात्रे, अमर काले, भास्कर भागरे अउर धैर्यशील मोहिते-पाटिल शामिल हैं।
पवार बोलाविन बैठक
खबरन के मुताबिक, एहसे शरद पवार सांसदन् कै एक बैठक बोलाविन अहै। लोकल मीडिया कै खबरन के मुताबिक, ये बैठक अगिला दुई दिनन मा होइ सकत अहै। ओकर मकसद मौजूदा राजनीतिक हाल कै जायजा लेब अउर पार्टी सांसदन् से सीधा बातचीत करब अहै। हालांकि, शिवसेना (UBT) मा चलत मौजूदा हलचल पर पवार खुद अभी तक खुलकर कवनो प्रतिक्रिया नाहीं दीन अहै। लेकिन पवार के पोता अउर विधायक रोहित पवार ‘X’ पर उ सांसदन् कै आलोचना करिन अहै।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट मा उ कहिन कि नेतान् कै ध्यान बेरोजगारी, किसानन् कै परेशानी, पानी कै कमी अउर मेहरारून कै सुरक्षा जइसन मुद्दा पर होवै का चाही। उ सांसदन् अउर विधायकन् कै खरीद-फरोख्त कै बढ़त चलन कै भी आलोचना करिन अउर कहिन कि जौन नेता जनता कै भरोसा तोड़त हैं, ओन्हैं वोटर्स का लोकतांत्रिक तरीका से सबक सिखावै का चाही।