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वन्नकम पूर्वोत्तर: बांग्लादेशी घुसपैठियन के खिलाफ सबते बड़ एक्शन शुरू, देशभर मां अलर्ट, BSF अउर पुलिस एक्शन मां

असम से लइके गुजरात, पच्छिम बंगाल से लइके गुरुग्राम तक जइसन अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियन, दलाल अउर उनका सरंक्षण देवे वाले नेटवर्क कै खिलाफ कार्रवाई तेज भवा अहै, ओसे पूरा देश मां हलचल मच गवा अहै। सबते चउंकावे वाली घटना असम कै कछार जिला मां सामने आई, जहंवा भारतीय सीमा कै भीतर से एक किसान का उठाय के बांग्लादेश लइ गवा रहा। इ घटना सीमा सुरक्षा अउर घुसपैठ कै खतरनाक गठजोड़ का पूरा तरह से उजागर कइ दिहिन अहै।

हम आपका बताइ दीं कि दक्खिन असम कै कछार जिला कै किनारखाल इलाका मां रहे वाले साठ बरिस कै किसान रंजीत दास मंगलार बिहान अपने खेत मां काम करै गए रहे। सीमा के लगे मौजूद नो मैन्स लैंड मां किसान रोज कै जइसन खेती अउर मवेशियन के खतियार घास काटे पहुँच रहे। बिहान सीमा सुरक्षा बल निर्धारित समय पर फाटक खोलिन अउर किसान भीतर गए। लेकिन लौटत समय रंजीत दास का याद आवा कि उनका सामान पीछे छूट गवा अहै। वह उनका लेवे वापस गए अउर तबी घात लगाय बैठे दुइ बांग्लादेशी घुसपैठियन सुरमा नदी पार कइके भारतीय सीमा मां प्रवेश कइ लिहिन, रंजीत दास का दबोच लिहिन अउर नाव मां डाल के बांग्लादेश लइ गयिन।

इ घटना खाली एक किसान कै अपहरण कै नाहीं रही, बल्कि इ भारत कै सीमा का चुनौती देवे वाली खुली हिमाकत रही। लगभग दस घंटा तक रंजीत दास का बांग्लादेश कै सीमा कै भीतर एक घर मां बंधक बनाय के रखा गवा रहा। अपहरण करै वालन उन पर हमला भी करिन अउर कहिन कि ऊ कउनो पुरान विवाद कै बदला लेवे खतियार उनका उठाय लाये अहैं। बाद मां सीमा सुरक्षा बल अउर बांग्लादेश सीमा रक्षक बल कै बीच कई दौर कै बइठक भई, जेकरे बाद रात सवा नौ बजे किसान का वापस सोंपा गवा। स्थानीय विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ साफ कहिन कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा खुद दिल्ली तक समन्वय कइके किसान कै सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराइन। लेकिन सवाल इ अहै कि आखिर भारतीय सीमा कै भीतर घुस के कउनो नागरिक कै अपहरण करै कै हिम्मत कहां से आई? देखल जाय त इ सवाल कै जवाब उन अवैध नेटवर्कन मां छिपल अहै, जिन पर अब देशव्यापी शिकंजा कसै शुरू भवा अहै।

गुजरात मां चलै वाला अभियान ‘डेल्टा हंट’ हाल के बरिसन कै सबते बड़ कार्रवाई मानल जात अहै। इ अभियान मां पांच सौ से जियादा संदिग्‍ध अवैध बांग्लादेशी पकड़े गयिन। छह हजार से जियादा संदिग्‍ध मोबाइल संपर्कों कै विश्लेषण भवा, शहर अउर ग्रामीण इलाकन मां एक साथ छापेमारी भई अउर उन लोगन कै पहचान कइ लीन गई जौन घुसपैठियन का नौकरी, आश्रय अउर नकली दस्तावेज देत रहे। इ खाली गिरफ्तारी नाहीं, बल्कि पूरा नेटवर्क का तोड़ै कै निर्णायक शुरुआत मानल जात अहै।

पच्छिम बंगाल मां भी स्थिति गंभीर बनी अहै। जहंवा बनावा गवा होल्डिंग सेंटरन मां कइयौ संदिग्‍ध बांग्लादेशी नागरिकन का राखल गवा अहै। बसीरहाट जइसन सीमावर्ती इलाकन मां सबते जियादा धरपकड़ भई अहै। सीमा चौकिन पर लौटाय जात लोगन कै लंबी कतार देखात अहै, जहंवा दस्तावेज अउर पहचान कै कड़ी जांच भई अहै। राज्य सरकार अब दलाल अउर घुसपैठ करै वाले गिरोह के खिलाफ तेज कार्रवाई कै तैयारी मां अहै।

पूर्वोत्तर भारत मां त इ मुद्दा अउर जियादा संवेदनशील बन गवा अहै। असम अवैध घुसपैठ के खिलाफ ‘पुशबैक’ नीति अपनाय अहै। अरुणाचल प्रदेश निगरानी बढ़ाय दिहिन अहै अउर मेघालय केंद्र से जनजातीय पहचान अउर सांस्कृतिक संतुलन बचाय खतियार सख्त कदम उठावे कै मांग कइ अहै। इन राज्यन का मानब अहै कि लगातार होय वाली घुसपैठ खाली सुरक्षा संकट नाहीं, बल्कि जनसंख्या संतुलन बदलै कै बड़ी साजिश भी अहै।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहिले ही साफ कइ चुकेन हैं कि देश मां अब ‘डिटेक्ट, डिलीट अउर डिपोर्ट’ नीति लागू होई। यानी पहचान करा, दस्तावेज खतम करा अउर वापस भेजा। इ कड़ी मां सीमा पर बाड़ मजबूत कइ जात अहै अउर सीमा सुरक्षा बल अउर बांग्लादेश सीमा रक्षक बल के बीच उच्च स्तरीय वार्ता भी तेज भई अहै। सरकार कै संदेश साफ अहै कि अब अवैध घुसपैठ अउर ओकर नेटवर्क का कउनो कीमत पर बर्दाश्त नाहीं कीन जाई।

एकरे बीच, हरियाणा कै गुरुग्राम से सामने आवा खुलासा बहुत चउंकावे वाला अहै। हिंवा पुलिस तेरह अवैध बांग्लादेशी नागरिकन का पकड़ी, जौन शहर कै निर्माण स्थलन पर बहुत जोखिम भरे काम करत रहे। जांच मां सामन आया कि ठेकेदार उनका जानबूझ के ऊंच इमारतन पर मचान लगावे अउर जान जोखिम मां डारै वाले कामन मां लगावत रहे, काहे से कि ऊ कम मजदूरी पर तैयार होइ जात रहे। पुलिस का शक अहै कि इ पूरा नेटवर्क संगठित तरीका से काम करत रहा। पुलिस के अनुसार ये लोग पच्छिम बंगाल कै कालियागंज सीमा क्षेत्र से एजेंटन कै मदद से भारत मां घुसिन अउर फेर गुरुग्राम पहुँचे। सेक्टर उनहत्तर, सत्तर अउर एक सौ चार मां निर्माण स्थलन अउर झुग्गियन मां छापेमारी कइके इनका पकड़ा गवा। अब पुलिस उन ठेकेदारन अउर उप-ठेकेदारन कै जांच करत अहै जौन अवैध रूप से रहे वाले लोगन का रोजगार दिन। दस्तावेज खंगाला जात अहै अउर इ पता लगावा जात अहै कि शहर मां अइसन कितन नेटवर्क सक्रिय अहैं।

बहरहाल, देश के सामने अब सबते बड़ सवाल इ अहै कि आखिर कब तक सीमा के आड़ लइके अवैध घुसपैठिये भारत कै सुरक्षा, अर्थव्यवस्था अउर सामाजिक ढांचा मां सेंध लगावत रहिहें? असम मां किसान कै अपहरण होय, गुजरात मां पकड़े गय सैकड़न संदिग्‍ध होइय या गुरुग्राम मां चलत अवैध श्रमिक नेटवर्क, हर घटना एक ही चेतावनी देत अहै कि खतरा खाली सीमा पर नाहीं, बल्कि देश कै भीतर गहराई तक फैल चुका अहै। अब इ लड़ाई खाली घुसपैठियन के खिलाफ नाहीं, बल्कि उन पूरा तंत्रन के खिलाफ अहै जौन लालच, राजनीति अउर मुनाफा खतियार देश कै सुरक्षा का दांव पर लगावत अहैं।

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