
पच्छिम बंगाल विधानसभा मां विपक्ष के नेता अउर टीएमसी नेता रिताब्रता बनर्जी बुधवार (10 जून) का दावा करिन कि उनके गुट का अब पच्छिम बंगाल विधानसभा मां 64 विधायकन कै समर्थन हासिल अहै। उनहें जोर दइके कहिन कि कांग्रेस के साथ विलय करै कै उनके कोनो योजना नाहीं अहै।
पत्रकारन से बात करत भये बनर्जी कहिन कि अभी संख्या 64 (विधायक) अहै। ये लोग अइहें अउर स्पीकर का पत्र सौंपिहें। इससे पहिले 3 जून का, पार्टी से निकालें गय विधायक रिताब्रता बनर्जी का विधानसभा स्पीकर रथिंद्र बोस विपक्ष के नेता मानिन। उनके पास टीएमसी के 80 मां से 58 विधायकन कै समर्थन रहा—जो एक अलग विधायी समूह के तौर पर मान्यता पावै के खातिर ज़रूरी दुई-तिहाई बहुमत से ज़्यादह अहै। अइसन तरे पच्छिम बंगाल विधानसभा मां एक अलग गुट के बनै कै औपचारिक शुरुआत भई।
कांग्रेस के साथ टीएमसी कै विलय पर रिताब्रता बनर्जी
टीएमसी नेता यहू दोहराइन कि कांग्रेस के साथ संभावित विलय कै अटकलन के बीच उनका गुट स्वतंत्र रूप से काम करत रही। बनर्जी कहिन, ‘टीएमसी कै कांग्रेस के साथ विलय नाहीं होत अहै। हमका पच्छिम बंगाल विधानसभा मां 64 विधायकन कै समर्थन हासिल अहै।’ अपनी बात का अउर साफ करत भये उनहें कहिन, ‘जहवां तक हमार लेजिस्लेटिव पार्टी के विलय कै बात अहै, तौ हम निस्चय रूप से कांग्रेस मां शामिल नाहीं होत अहैं। संसद मां जउन हमार सांसद अहैं—उनमें से दुई-तिहाई से ज़्यादह भी कांग्रेस मां विलय नाहीं करत अहैं। तौ फिर, के कउनके साथ विलय करत अहै?’
उनहें आगे कहिन कि ‘जहवां तक हमार बात अहै अउर हमका जउन जानकारी अहै, ओकर आधार पर न तौ सांसद जात अहैं, न हम जात अहैं, न नगर पालिका के प्रतिनिधि जात अहैं, न ज़िला परिषद के सदस्य जात अहैं अउर न ही पंचायत सदस्य जात अहैं। तौ फिर कउन जात अहै? विलय कै तौ कोनो सवाल ही नाहीं उठत।’
उनकी ये बातन उन खबरन के बीच आइ जउन मां कहि गय रहा कि कांग्रेस कै वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस मां विलय करै कै सलाह दिहिन रहीं। हालांकि, टीएमसी के शीर्ष सूत्रन आज कांग्रेस के साथ संभावित विलय कै खबरन का खारिज करत भये कहिन कि पार्टी के पास अइसन कोनो जानकारी नाहीं अहै। टीएमसी आगे कहिस कि विलय का लेके कउनो स्तर पर कोनो चर्चा नाहीं भई। इसके बजाय, एह बात पर ध्यान दीन गय कि विपक्षी गठबंधन मां शामिल पार्टियन बीजेपी के खिलाफ अउर ज़्यादह प्रभावी ढंग से मिलके काम करैं अउर राज्य स्तर पर मतभेदन के बावजूद एकजुटता बनाय रखें।
