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Yes Milord: फुटपाथ पर चलेब भवा मौलिक अधिकार, SC ‘Right to Walk’ कय जिक्र करत गाड़ी वालन कय का कहेन?

सबेर का बखत रहा। हवा मां हल्का-हल्का ठण्ड रहा अउर अकास साफ रहा। पांच साल कय एक लरिका अपने बाप कय हाथ पकड़े, अपनी नन्ही पीठ पर स्कूल कय बस्ता टांगे, तेजी से चलत रहा। स्कूल कय गेट सामने ही रहा, पै ओतय तक जाए कय ताईं कउनो फुटपाथ नाहीं रहा। सड़क पर गाड़ी हर तरफ से बेतरतीब दौड़त रहीं। पैदल चले वालन कय ताईं एक इंच जगह भी सुरक्षित नाहीं रही। तभी अचानक, एक जोर कय झटका लाग, अउर बाप कय हाथ से लरिका कय नन्ही उंगरी छूट गई। पलक झपकते ही सब खत्म होइ गवा। चंद कदम कय दूरी पर खड़ा स्कूल कय गेट ओतय कय ओतय रहि गवा, अउर एक बाप कय दुनिया हमेशा कय ताईं उजड़ गई।

हमार देश कय सड़कन मां या तौ फुटपाथ अहैई नाहीं अउर अगर अहैव तौ ओतय जान सुरक्षित नाहीं अहै। फुटपाथ पर जान सुरक्षित नाहीं तौ मनई चलिहय कहाँ? का फुटपाथ नाहीं होय चाही? का पैदल चले वालन कय सड़क पर चले कय अधिकार नाहीं अहै? इसी बात कय सुप्रीम कोर्ट बहुत गंभीरता से लीन अहै। फुटपाथ पर चलेब अब मौलिक अधिकार होइ गवा अहै, यानी कि हमार संविधान कय एक हिस्सा बनि गवा अहै।

सुप्रीम कोर्ट 19 जून कय एक ऐतिहासिक फैसला सुनावत ई बात कही अहै। जस्टिस पी एस नरसिम्हा अपने फैसला मां कहेन कि अगर कउनो सड़क बनावल जात अहै तौ सरकार अउर लोकल एडमिनिस्ट्रेशन कय ई जिम्मेदारी अहै कि ओकरे साथ पैदल चले वालन कय ताईं सेफ फुटपाथ भी बनावा जाव अउर ओकर देख-रेख कीन जाव। अइसन फुटपाथ जिन पर साफ-साफ लिखा होय कि ई पैदल चले वालन कय ताईं अहै अउर ओकरे ऊपर गाड़ी ना चलय। फुटपाथ पर चले कय मौलिक अधिकार कउनो भी मोटर वाहन कय विशेष अधिकार से ऊपर होइ।

ई बात कोर्ट कउन फैसला कय लेके कही, ओका भी जान लीन। लाइव लॉ कय रिपोर्ट कय मुताबिक ई फैसला एक सड़क हादसा से जुड़ल मामला मां आवा अहै। 5 साल कय एक लरिका अपने बाप कय साथ स्कूल जात रहा। तभी एक टैंकर ओका टक्कर मार दिहिस जवने से ओकर मौत होइ गई। लरिका कय बाप ₹25 लाख कय मुआवजा मांगत रहे। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ओका ₹8,20,000 कय मुआवजा दिहिस रहा, जबकि हाई कोर्ट ओका घटाए के ₹4,70,000 कर दिहिस रहा।

निश्चिंत होके पैदल चलेब मनई कय बेसिक राइट अहै। सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट कय फैसला रद्द करत पीड़ित बाप कय ₹11,44,628 कय मुआवजा देबय कय आदेश दिहिस अउर कहेन कि ई पैसा 2 महीना कय भीतर दे दी जाय। ई केस कय सुनवाई कय दौरान बेंच कहेन कि सुरक्षित अउर निश्चिंत होके पैदल चलेब मनई कय सबसे बुनियादी कामन मां से एक अहै। ई सीधा-सीधा ‘राइट टू लाइफ’ से जुड़ल अहै। संविधान कय आर्टिकल 19 (1) (d) मां नागरिकन कय देश मां फ्री होके घूमे-फिरे कय अधिकार दिहा गवा अहै अउर पैदल चलेब उहे अधिकार कय एक हिस्सा अहै।

सुप्रीम कोर्ट कहेन कि समय कय साथ बढ़ल डेवलपमेंट कय कारण पैदल चले वालन कय नजरअंदाज कर दिहा गवा अहै। चौड़ी सड़क अउर एक्सप्रेसवे कय डेवलपमेंट कय निशानी बनाइ दिहा गवा जवन कि ठीक अहै। मगर ई सब कय बीच फुटपाथ पर चले वालन कय का होइ?

साल 2013 मां सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट राजधानी कय 14 किलोमीटर लंबी सड़कन कय सर्वे कीन रहा। ओमां पावा गवा कि 27 परसेंट हिस्सा मां फुटपाथ नाहीं रहे। सिर्फ 55 परसेंट सड़कन पर मानक कय मुताबिक फुटपाथ मिला। ई लंबा हिस्सा मां अगर कउनो फुटपाथ पर चलय, तौ ओका 28 बार यानी लगभग हर 100 मीटर पर ऊपर-नीचे उतरे कय पड़त रहा।

दिल्ली कैंट मां अपने बुटीक रोज पैदल जाए वाली नलिनी भार्गव बताइन कि उ फुटपाथ पर नाहीं चलत। घुटना मां दरद रहत अहै अउर फुटपाथ पर बार-बार चढ़े-उतरे कय पड़त अहै, एहसे सड़क पर चलेब मजबूरी होइ जात अहै। द्वारका, उत्तम नगर, कीर्ति नगर, नजफगढ़ अउर पटपड़गंज समेत कई इलाकन मां फुटपाथ पर सार्वजनिक शौचालय भी बने अहैं।

संविधान मां निहित ई केस पांच साल कय एक लरिका कय हादसा मां भई मौत से जुड़ल रहा। सुप्रीम कोर्ट कहेन कि पैदल चले कय अधिकार संविधान कय अनुच्छेद 19 (1) (d) कय तहत स्वतंत्र रूप से घूमे-फिरे कय अधिकार से जुड़ल अहै।

SC कय फैसला प्राथमिकता तय करै अहै। शीर्ष अदालत कय टिप्पणी से साफ अहै कि सड़क पर पहिला अधिकार पैदल चले वालन कय अहै। हालांकि देश कय ज्यादातर शहरन-महानगरन मां सड़कन अउर पुल कय निर्माण जइसन भवा अहै, ओसे ई लागत अहै कि पैदल चले वाले कउनो कय प्राथमिकता मां नाहीं अहैं। जहां अहैं भी, ओतय कब्जा कय चपेट मां अहैं। ट्रैफिक कय देखत सड़क तौ चौड़ी होत अहैं, पै फुटपाथ पर कउनो ध्यान नाहीं देत। अदालत सरकार से पैदल चले कय अधिकार कय मान्यता देबय कय ताईं कानून बनाय अउर स्थानीय निकायन कय जिम्मेदारी तय करे कय कहेन अहै। जहां सड़क अहै, ओतय फुटपाथ भी बनय अउर ओकर देख-रेख होय। अगर कउनो विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरा नाहीं करत, तौ ओकरे खिलाफ कार्रवाई होय। सुप्रीम कोर्ट कय आदेश कय ई बहुत खास हिस्सा अहै कि अगर कउनो नागरिक कय ई अधिकार कय उल्लंघन होत अहै तौ उ कानूनी कार्रवाई अउर मुआवजा मांग सकत अहै। एहसे जिम्मेदार मनई सचेत रहिहैं।

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