प्रेस नोट

एही वजह से भा सूर्या क कतल: बाइक रही बिबाद क वजह, नबाव-आतिफ-फरहान क बचब मुस्किल; योगी के मंत्री क दुइ टूक

एही वजह से भा सूर्या क कतल: बाइक रही बिबाद क वजह, नबाव-आतिफ-फरहान क बचब मुस्किल; योगी के मंत्री क दुइ टूक

गाजियाबाद स्थित खोड़ा के नवनीत विहार निवासी 11वीं के छात्र सूर्या क झगड़ा बाइक चलावै का लेके मुख्य आरोपी से भवा रहा। पुलिस के अनुसार झगड़ा बकरीद के दिन सबेरे के समय ही भवा रहा। उहईं सूतन के अनुसार चाकू सूर्या के देह मा करीब चार इंच तक घुसि गवा रहा। पुलिस मामला का हत्या क धारा मा तरमीम करत भए मुख्य आरोपी के बाप नबाव, ओकर साथी आतिफ अउर फरहान का गिरफ्तार कीहिस है। उहईं दुइ जने का हिरासत मा लेके पूछताछ कीन जा रही है।

आरोपी कुर्बानी बरे बोलाय रहा

जेह दिन सूर्या क दिन-दहाड़े चाकू घोंपिके हत्या कीन गयी रही, ओही दिन ही मुख्य आरोपी से सबेरे के समय ओकर झगड़ा भवा रहा। पुलिस क शुरुआती जांच मा ई बात साम्हे आई है। पुलिस के अनुसार सूर्या अउर मुख्य आरोपी पहिले से परिचित रहे। दुनो अक्सर मिलत भी रहे। बकरीद पर कुर्बानी दियावै बरे आरोपी सूर्या का बोलाय रहा। पहिले तौ सूर्या आरोपी से मना कीहिस रहा। एकरे बाद ईद क पार्टी अउर मुबारकबाद देवै क बात कहिस। कछू देर क बातचीत के बाद सूर्या आरोपी के बोलाय जगह पर पहुंच गवा। एकरे बाद हिंया आरोपी किशोर वारदात का अंजाम दीहिस। सनीचर क सबेरे से ही पीड़ित परिवार के घरे मा लोगन क आउब-जाब लगा रहा। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, राष्ट्रीय हनुमान दल अउर हिंदू रक्षा दल के पदाधिकारी अउर कार्यकर्ता लोगन क जमावड़ा लगा रहा। भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा सबेरे से ही परिवार के साथे सड़क पर बैठे रहे। ऊ परिवार का नियाव मिलै तक हर कदम पर साथ रहै क बात कहेन।

दुकानन पर ताला, गलियन मा सन्नाटा, छतन से देखत रहे लोग

छात्र क हत्या के बाद से ही इलाका मा आक्रोश अउर तनाव क स्थिति है। सनीचर का माहौल बिगड़े क आशंका पर सबेरे से ही फोर्स क तैनाती लोगन के दिलन मा डर पैदा कइ दीहिस। हाल ई रहा कि खोड़ा इलाका मा आधी से बेसी दुकानन अउर मुख्य बाजार पूरा दिन बंद रहा। कहुं दुकान खुली तौ पूरा शटर उठावै क जगह आधा शटर या दुआर ही खुला रक्खेन। इलाका क गलियन मा सन्नाटा पसर रहा। घरन क छत पर ठाढ़ होइके लोग बस नीचे चलत गतिविधि का देखत रहे।

अइसन सजा मिली जेहका आरोपी सोचेउ ना होइहैं: कैबिनेट मंत्री

सूर्या क हत्या बहुतै पीड़ादायक अउर ह्रदय विदारक अहै। मोर संवेदना परिवार के साथे अहैं। संबंधित अधिकारी अउर गृह विभाग का पूरे मामला क जानकारी दीन्हीं गयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकार मा अइसन घटना का बिल्कुल स्वीकार ना कीन जाई। आरोपियन का अइसन सजा मिली जे समाज बरे एक साफ संदेस होई। ई बात कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर पोस्ट कीहिन है। उहईं सोशल मीडिया पर भारी संख्या मा लोगन वारदात क निंदा करत भए गुस्सा जताएन। साथे ही कड़ा एक्शन क मांग भी कीहिन है।

खोड़ा चेयरमैन के ना पहुंचे पर लोगन नाराजगी जताएन

इलाका मा एतनी बड़ी वारदात के बाद भाजपा से लेके हिंदू संगठन अउर दूसर दल क लोग पीड़ित परिवार से मिले पहुंचे। उहईं सनीचर का छात्र क शव घर पहुंचे से पहिले अउर बाद मा खोड़ा नगरपालिका क चेयरमैन मोहिनी शर्मा के ना पहुंचे पर लोगन नाराजगी जाहिर कीहिन। एहका लेके लोग तंज भी कसेन।

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यूपी: प्रदेश का चार साल के बाद मिल सकत है स्थायी डीजीपी, कार्यवाहक राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लागब तय

यूपी का चार साल के बाद स्थायी डीजीपी मिल सकत है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) कइती से भेजे गये पैनल पर शासन स्तर पर विचार-मंथन पूरा होइ चुका है। प्रदेश का करीब चार साल बाद स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिलै जा रहा है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) कइती से भेजे गये पैनल पर शासन स्तर पर मंथन पूरा होइ चुका है। प्रस्ताव सीएम के मंजूरी बरे भेजा गवा है। मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लागब तय माना जा रहा है।

यूपीएससी 26 मई का भई बैठक के बाद 1990 बैच क आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा अउर 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी पीयूष आनंद अउर राजीव कृष्ण के नामन क पैनल प्रदेश सरकार का भेजेिस है। एहमा राजीव कृष्ण क नाम सबसे मजबूत माना जा रहा है। हालांकि, आखिरी फैसला सीएम के स्तर से लीन जाई। राजीव कृष्ण एक जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी अहैं। 1991 बैच के आईपीएस राजीव कृष्ण पुलिस महकमा मा लम्बे प्रशासनिक अउर मैदानी अनुभव बरे जाने जात अहैं। ऊ प्रदेश के कई जरूरी जिलन अउर जोनन मा जिम्मेदारी सम्हाले अहैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन अउर यूपीएससी क व्यवस्था के अनुसार स्थायी डीजीपी क कार्यकाल कम से कम दुइ साल क होत है। अइसन मा तैनाती भइला पर राजीव कृष्ण 2028 तक एह पद पर बने रहि सकत अहैं। साल 2022 मा तबके डीजीपी मुकुल गोयल का हटाये जाए के बाद से प्रदेश मा स्थायी डीजीपी क इंतजार है।

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बिहार पुलिस के छह सीनियर आईपीएस अधिकारी अब केंद्र मा सम्हारिहैं बड़ी जिम्मेदारी, आईजी रैंक बरे भये चयनित

बिहार पुलिस के छह सीनियर आईपीएस अधिकारी अब केंद्र मा बड़ी जिम्मेदारी सम्हारिहैं। आईजी रैंक बरे इनका चयन कीन गवा है। इन अधिकारियन का बिहार सरकार से हरी झंडी मिलै के बाद जल्दी ही दिल्ली मा तैनाती देइ दीन्हीं जाई।

केंद्र सरकार बिहार कैडर के 6 सीनियर आईपीएस अधिकारियन का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर महानिरीक्षक या एकरे समकक्ष रैंक बरे शॉर्टलिस्ट कीहिस है। केंद्रीय कैबिनेट क नियुक्ति समिति देश भर के कुल 68 आईपीएस अधिकारियन क एक सूची जारी कीहिस है, जेहमा बिहार के इन 6 तेज-तर्रार अफसरन के नाम शामिल अहैं। इन अधिकारियन के शानदार ट्रैक रिकॉर्ड, काबिलियत अउर कानून-व्यवस्था सम्हारै के बेहतरीन अनुभव का देखत भए ई फैसला लीन गवा है। अब इनहैं सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीबीआई, एनआईए या आईबी जइसन देश क सबसे बड़ी सुरक्षा अउर जांच एजंसियन मा जरूरी पदन पर तैनात कीन जाई। इन अधिकारियन मा उपेंद्र कुमार शर्मा, सत्यवीर सिंह, विकास वर्मन, ताशा गुड़िया, किम अउर मनोजय कुमार शामिल अहैं। उपेंद्र कुमार शर्मा राजधानी पटना समेत

गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन अधिकारिन कय बिहार सरकार से हरी झंडी मिलै क बादे जल्दिये दिल्ली मा पोस्टिंग दइ दीन जाई। इनहन कय सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीबीआई, एनआईए या आईबी जइसन देस कय सबसे बड़हन सुरक्षा अउर जांच एजंसिन कय क्षेत्रन मा बड़ी भूमिका मिलि सकत हय।

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US-Iran Tensions: होर्मुज मा बढ़ा तनाव, अमेरिकी सेना हेलफायर मिसाइल से ईरान जात मालवाहक जहाज कय रोकिस

अमेरिकी सेंट्रल कमांड दावा कीन हय कि ईरान कय ओरि जात गाम्बिया क झंडा वाले मालवाहक जहाज लियान स्टार कय हेलफायर मिसाइल से बेकार (निष्क्रिय) कइ दीन गवा। अमेरिका क अनुसार जहाज कईउ चेतावनिन कय अनदेखा कीन रहा। ई काररवाई क्षेत्र मा लागू समुद्री नाकेबंदी अभियान क हिस्सा आय।

अमेरिका अउर ईरान कय बीच बढ़त तनाव कय बीच अमेरिकी सेना दावा कीन हय कि ऊ ईरान कय ओरि जात एक व्यापारिक जहाज कय मिसाइल हमला से रोकिस। अमेरिकी सेंट्रल कमांड कय अनुसार, गाम्बिया क झंडा वाला मालवाहक जहाज एम/वी लियान स्टार ओमान कय खाड़ी कय रस्ता से एक ईरानी बंदरगाह कय ओरि बढ़त रहा। अमेरिकी सेना जहाज कय 20 से जादा दाईं चेतावनी दिहिस, मुला चालक दल बात नाहीं मानिस।

समुद्री नाकेबंदी कय बीच अमेरिकी काररवाई

सेंटकॉम कय मुताबिक, एकरे बादे एक अमेरिकी फौजी जहाज (विमान) जहाज कय इंजन कमरा पर हेलफायर मिसाइल दागिस, जेहसे जहाज आगे बढ़े लायक नाहीं रहा। अमेरिकी सेना कय कहब हय कि अब ई जहाज ईरान कय ओरि नाहीं जात अहै। अमेरिका बतायस कि ई काररवाई क्षेत्र मा लागू समुद्री नाकेबंदी कय हिस्सा आय। सेंटकॉम कय अनुसार, अबहीं तक पांच व्यावसायिक जहाजन कय रोका या बेकार कीन जा चुका हय, जबकि 116 अउर जहाजन क रस्ता बदलवावा गवा हय ताकि नाकेबंदी कय पूरी तईयारी से लागू कीन जाय सकय।

ई समुद्री अभियान 17 अप्रैल कय सुरू कीन गवा रहा। अमेरिका कय आरोप हय कि ईरान रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य अउर आस-पास कय समुद्री रस्ता पर नियंत्रण बढ़ावै क कोसिस कीस, जेकरे जवाब मा ई कदम उठावा गवा। ई क्षेत्र से दुनिया कय बड़े हिस्सा कय तेल, गैस अउर दूसर जरूरी सामान गुजरत हय, एह बरे हिंआ कउनो भी तरे कय तनाव दुनिया कय व्यापार अउर ऊर्जा बाजार कय प्रभावित करत हय।

भले ही क्षेत्र मा तनाव जारी हय, फिरउ 7 अप्रैल से लागू संघर्ष विराम अबहीं तक बनल अहै। अमेरिका अउर ओकर संगी देस ई युद्धविराम कय 60 दिन अउर बढ़ावै क संभावना पर बिचार करत अहैं ताकि ईरान कय परमाणु कार्यक्रम अउर क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ल मुद्दन् पर नई बात सुरू कीन जाय सकय।

नियमन कय उल्लंघन पर ईरान कय चेतावनी

समुद्री रस्ता मा बाधा कय कारन तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) अउर खाद जइसन जरूरी सामानन कय आव-जाव (आपूर्ति) पर असर पड़ा हय। एहसे दुनिया कय बजारन अउर ग्राहकन पर आर्थिक दवाब बढ़ा हय। अमेरिका कय कहब हय कि नाकेबंदी कय मकसद ईरान कय बेचे कय ताकत (निर्यात क्षमता) कय कम करब अउर ओकर आर्थिक कमाई पर दवाब बढ़ाउब आय। उहईं, ईरान हू कड़ा रुख अख्तियार कीन हय। ईरान कय संयुक्त फौजी कमान चेतावनी दिहिस हय कि ओकरे कब्ज़ा वाले समुद्री क्षेत्र मा दखल देवे वाले कउनो भी फौजी जहाज कय निशाना बनावा जाय सकत हय। सरकारी टीवी कय माध्यम से जारी बयान मा कहा गवा कि नियमन कय उल्लंघन करै वालन कय समुद्री सुरक्षा भारी खतरा मा पड़ि सकत हय।

कतर होर्मुज मा टोल कय विरोध कीस

एही बीच, कतर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरै वाले जहाजन पर हमेशा बरे टैक्स (स्थायी शुल्क) लगावै कय विरोध कीन हय। कतर कय उप प्रधानमंत्री अउर रक्षा मामला कय मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुलरहमान अल थानी कहिन कि हमेशा कय टैक्स से दुनिया कय ग्राहकन पर फालतू बोझ पड़ी। मुला ऊ ईहू कहिन कि जउर टैक्स कय इस्तेमाल कुछ समय बरे समुद्री सुरक्षा या बारूदी सुरंग हटावै जइसन कामन मा कीन जाय, तउ एहपर बात होइ सकत हय। पच्छिम एशिया मा बढ़त तनाव, समुद्री नाकेबंदी अउर अमेरिका-ईरान कय बीच चलत लड़ाई पूरे क्षेत्र कय सुरक्षा अउर दुनिया कय व्यापार कय लेके चिंता बढ़ाए दिहे हय। दुनिया कय नजर अब एही बात पर टिकल हय कि बातचीत कय कोसिस सफल होत हय या क्षेत्र एक दाईं फिर बड़े लड़ाई कय ओरि बढ़त हय।

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बैलगाड़ी कय सफर से एआई न्यूजरूम तक: 200 साल मा कइसे 25 करोड़ पढ़इ वालन तक फैला हिंदी पत्रकारिता कय दायरा? समुझें

कल्पना कीजिए एक अइसन समइ कय जब खबरि छाबब कउनो जोखिम भरे नया काम (स्टार्टअप) से कम नाहीं रहा। न कउनो इंटरनेट रहा, न 5G नेटवर्क, अउर न ही करोड़न रुपिया कय प्रचार (विज्ञापन) कय बजट। आज से ठीक 200 साल पहिले, 30 मई 1826 कय कलकत्ता कय पतली गलियन से भारतीय इतिहास कय एक नया जुग सुरू करै वाली घटना घटी। एही दिन हिंदी कय पहिला अखबार ‘उदन्त मार्त्तण्ड’ (याने उगता सूरुज) छपिके बजार मा आवा रहा।

साल 2026 मा, ई ऐतिहासिक घटना कय पूरे 200 साल होई चुके अहैं। ई खाली 200 सालन कय कैलेंडर नाहीं आय, बल्कि एक अइसन सफर कय बड़ी कहानी (महागाथा) आय जेहमा एक गुलाम समाज (औपनिवेशिक समाज) कय एक छोटहन अखबार आज अरबों डॉलर कय मीडिया उद्योग मा बदल चुका हय। आवैं सहज भासा मा समुझत हन कि कइसे एक अइसन अखबार जेका कबहूँ 500 पक्के गाहक (ग्राहक) नाहीं मिले रहेन, आज 25 करोड़ से जादा पढ़इ वालन तक रोज खबरि पहुँचावै वाली इंडस्ट्री कय बुनियाद बनि गवा।

‘उदन्त मार्त्तण्ड’ कय ऊ ऐतिहासिक अउर हिम्मत वाली सरुआत

19वीं सदी कय सरुआत मा भारत मा छपाई (प्रिंटिंग) कय काम अपने सुरुवाती दौर मा रहा। कलकत्ता (अब कोलकाता) मा अंग्रेजी, बंगाली अउर फारसी कय अखबार तउ रहेन, मुला हिंदी (देवनागरी लिपि) कय कउनो अखबार नाहीं रहा। अइसन मा उत्तर प्रदेश कय कानपुर कय रहइ वाले पंडित जुगल किशोर शुक्ल एक बड़हन कदम उठाइन। पेसा से वकील अउर कलकत्ता कय सदर दीवानी अदालत मा ‘प्रोसीडिंग्स रीडर’ कय पद पर काम करै वाले शुक्ल जी 16 फरवरी 1826 कय अखबार कय लाइसेंस लिहिन।

30 मई 1826 कय कलकत्ता कय अमर तल्ला लेन से ‘उदन्त मार्त्तण्ड’ कय पहिला अंक निकिस। ई एक हफ्तावारी (साप्ताहिक) अखबार रहा जउन हर मंगर कय छपत रहा अउर एकर भासा खड़ी बोली अउर ब्रजभासा कय मिलावट रही। ओही समइ छपाई (टाइपसेटिंग) कय काम पूरी तरे से हाथन से होत रहा; सीसा कय एक-एक अच्छर कय जोड़ि-जोड़ि के सब्द बनावा जात रहा, जेहमा बहुतै मेहनत अउर समइ लागत रहा।

खाली 18 महीना मा काहे बंद होई गवा भारत कय पहिला हिंदी अखबार?

आजु कय दौर मा मीडिया कंपनिन कय पासे भले ही कुल साधन मौजूद होंय, मुला ‘उदन्त मार्त्तण्ड’ कय कमाई कय तरीका (रेवेन्यू मॉडल) खाली गाहकी (सब्सक्रिप्शन) पर टिकल रहा। ई अखबार कय सालाना कीमत दुई रुपिया तय कीन गइ रही। कलकत्ता मा हिंदी पढ़इ वाले थोरिक रहेन, एह बरे एकर उत्तर भारत पठउब जरूरी रहा।

हिंअई से सुरू भवा असली आर्थिक लड़ाई (संघर्ष)। ओही समइ अखबार पठवै कय साधन बैलगाड़ी, नाउ या अंग्रेजी (ब्रिटिश) डाक सेवा रही। ब्रिटिश डाक विभाग कय किराया (शुल्क) एतना जादा रहा कि अखबार कय बनवई ओकरे दाम सेऊ ऊपर चली जात रही। पंडित जुगल किशोर ओही समइ कय ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड एमहर्स्ट से डाक कय दाम मा छूट कय बिनती कीन, मुला साम्राज्यवादी ब्रिटिश सरकार एका खारिज कइ दिहिस।

लगातार बढ़त घाटा औ विज्ञापन ना होय क कारन आखिरी मा 4 दिसंबर 1827 का खाली 18 महीना बाद ई अखबार बंद होइ गवा। अपने आखिरी अंक मा संपादक बड़े ही मार्मिक सबदन मा लिखे रहेन- ‘आज दिवस लौ उग चुक्यो मार्तण्ड उदन्त। अस्ताचल को जात है दिनकर दिन अब अन्त॥’ (यानी समाचारन क ई सुरुज अब आर्थिक कठिनाइन क कारन अस्त होइ रहा है)।

आजादी क लड़ाई से लेके स्वर्णिम युग तक क सफर

भले ही पहिला अखबार बंद होइ गवा, मुला ऊ जेकर बीया बोये रहा उ एक वटवृक्ष बनि गवा। इसके बाद 1845 मा बनारस अखबार छपा औ 1854 मा भारत क पहिला हिंदी दैनिक समाचारपत्र ‘समाचार सुधा वर्षण’ सामन्हे आवा।

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पत्रकारिता खाली समाचार देइ क जरिया नाहीं रही, बल्कि ई सामाजिक सुधार औ आजादी क हथियार बनि गइ रही। बाल गंगाधर तिलक क ‘केसरी’, गणेश शंकर विद्यार्थी क ‘प्रताप’ औ महात्मा गांधी क ‘यंग इंडिया’ एकर बड़ उदाहरण रहेन। आजादी के बाद 1980 औ 1990 के दशक मा आर्थिक उदारीकरण, साक्षरता बढ़ै औ नई प्रिंटिंग तकनीक (ऑफसेट) के आवै से हिंदी अखबारन क प्रसार संख्या लाखन से करोड़न मा पहुंचि गइ, जेका प्रिंट मीडिया क ‘स्वर्णिम युग’ कहा गवा। 2000 के दशक मा 24×7 टीवी न्यूज चैनलन ‘ब्रेकिंग न्यूज’ क नवा दौर शुरू कीहिन।

आज क मीडिया साम्राज्य केतना बड़ बा?

2026 के ताज़ा आकड़न पर नजर डारब तो आप हैरान रह जाब। फिक्की-ईवाई (FICCI-EY) क नई रिपोर्ट 2026 के अनुसार:

विशाल उद्योग: भारतीय मीडिया औ मनोरंजन उद्योग क आकार 2.78 लाख करोड़ रुपिया (लगभग 32 बिलियन डॉलर) होइ गवा है। सरकार कइती से जारी प्रेस इन इंडिया रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार रोज लगभग 23,22,92,405 अखबार मनइन तक पहुंचत हैं। मउजूदा समय मा ई संख्या 25 करोड़ से ऊपर जाय क अनुमान बा।

तेज ग्रोथ: ई उद्योग 9.1% क दर से बढ़त अहै, जे की भारत क 7.7% क नॉमिनल जीडीपी बढ़ती दर सेउ ढेर है।

भारत एक अद्भुत ‘AND’ मार्केट अहै!

दुनिया के पछुआ देसन मा डिजिटल मीडिया के आवै से अखबार खत्म होत जा रहे हैं, मुला भारत मा अइसन नाहीं अहै। फिक्की-ईवाई रिपोर्ट औ उद्योग विशेषज्ञन के अनुसार भारत एक ‘AND’ (और) मार्केट बनि गवा है। एकर मतलब ई है कि भारतीय उपभोक्ता टीवी पर समाचार देखत है ‘और’ साथै मा मोबाइल पर डिजिटल न्यूज भी पढ़त है। टीवी, प्रिंट औ डिजिटल हियाँ एक साथे सह-अस्तित्व मा हैं।

1826 बनाम 2026: बैलगाड़ी से एआई तक क दूरी

200 बरिस के ई बदलाव का जउ अउर हम दुइ हिस्सन मा बांटी तो तस्वीर एकदम साफ होइ जात है:

वितरण औ पहुंच: 1826 मा अखबार बैलगाड़ी औ डाक विभाग के भरोसे रहा, जेकर खाली 500 कॉपी छपत रहीं। आज 2026 मा सोशल मीडिया, एप्ड औ क्लाउड होस्टिंग के जरिए खबरि रियल-टाइम (तुरंतै) करोड़न मनइन तक पहुंचत हैं।

लागत: 1826 मा स्याही, कागज औ डाक क खरच बहुत ढेर रहा, जबकि आज इंटरनेट क कारन डिजिटल वितरण क खरच बहुत हद तक काबू मा है।

तकनीक: तब हाथन से लेड क अच्छर जोरा जात रहा, आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा औ एल्गोरिदम न्यूज रूम चलावत हैं।

फेक न्यूज औ विश्वसनीयता क जंग

2026 मा पत्रकारिता के सामन्हे सबसे बड़ी चुनौती ब्रिटिश हुकूमत क सेंसरशिप या पइसा क कमी नाहीं है, बल्कि ‘सूचना क प्रदूषण’ है। आज डीपफेक, एआई-जनित भरमावै वाले लेख औ फेक न्यूज सबसे बड़ खतरा बनि गए हैं।

विशेषज्ञन क मानब है कि फेक न्यूज के ई दौर मा प्रिंट मीडिया खाली ब्रेकिंग न्यूज क जरिया नाहीं रहि जाई, बल्कि ई एक ऊंच-पहुंच, ऊंच-असर वाले विश्वसनीयता मंच मा बदल जाई। जानकार कहत हैं कि आजहू छपे भये सबदन पर मनइन क भरोसा डिजिटल स्क्रीन के पिक्सल से कतहुं ढेर है।

1826 मा पंडित जुगल किशोर शुक्ल कलकत्ता मा जउन छोटहन पौधा लगाए रहेन, आज उ डिजिटल तकनीक औ डेटा-मुद्रीकरण के बल पर एक विशाल वटवृक्ष बनि चुका है। मुला, तकनीक चाहे केतनी बदल जाय, पत्रकारिता क असली मकसद समाज क कल्याण औ सत्य क खोज ही रही, जइसन कि महात्मा गांधी औ गणेश शंकर विद्यार्थी सिखाए रहेन। आज क मीडिया उद्योग अपने ई ‘स्वर्णिम युग’ का तभई सार्थक ठहराइ सकत है, जब उ ई आर्थिक कामयाबी के साथे-साथ अपनी संपादकीय अखंडता औ लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का भी उही मजबूती से कायम रखि सके।

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