
डेंगू का लै के मनई के मन मा सबते बड़ी गलतफहमी ई है कि ई बीमारी खाली तबै खतरनाक होत है जब मरीज कै प्लेटलेट्स एकदमै से गिरै लागत है। मेदांता नोएडा मा इंटरनल मेडिसिन के एसोसिएट कंसल्टेंट, डॉ. सौरदीप चौधरी कहत हैं कि, मनई अक्सर खाली प्लेटलेट्स कै गिनती पर ध्यान देत हैं अउर बाकी जरूरी लच्छन का नजरअंदाज कइ देत हैं जउन बीमारी के गंभीर होय के इसारा देत हैं। सच्चाई ई है कि प्लेटलेट्स नॉर्मल रहै पर भी डेंगू खतरनाक रूप लै सकत है। आवा जानल जाय कइसे।
प्लेटलेट्स ठीक रहै के बादौ बढ़ सकत है मुसीबत
एडीज मच्छरन के काटै से फैलै वाला डेंगू वायरस हर मरीज पर अलग-अलग मेर असर डात है। बीमारी केतनी गंभीर है, ई खाली प्लेटलेट्स पर निर्भर नाहीं करत। केतनो मरीजिन मा प्लेटलेट्स कै लेवल ठीक रहै के बावजूद उनका प्लाज्मा लीकेज, देह से खून बहब, लिवर से जुड़ी समस्या, सांस लेय मा तकलीफ या शॉक जइसन गंभीर दिक्कतन कै सामना करै का पड़ सकत है। यहि नाते, खाली रिपोर्ट मा प्लेटलेट्स कै नंबर देखै के बजाय मरीज कै पूरी शारीरिक हालत पर ध्यान देब बहुतै जरूरी है। कुछ चेताय वाले लच्छन अइसन होत हैं जेन्हका कउनो भी हाल मा अनदेखा नाहीं करय का चाही। इनमा लगातार उल्टी होब, पेट मा तेज पीरा, बहुतै कमजोरी लागब, बेचैनी, नाक या मसूड़न से खून आउब, पिसाब कम होब अउर सांस फूलब सामिल है।
बोखार उतरतै डेंगू के मरीज का ठीक न समझें
मरीज अउर उनके घरवालन के बरे ई समझब बहुतै जरूरी है कि डेंगू कै सबते कठिन समय (क्रिटिकल फेज) तबै सुरू होत है जब बोखार उतरै लागत है। ई समय अक्सर बीमारी के तीसरे से सातवें दिन के बीच मा आवत है। ढेर मनई ई मान लेत हैं कि बोखार कम होय कै मतलब है कि मरीज ठीक होय लाग है, लेकिन असल मा यहै उ समय होत है जब मरीज कै बहुतै कायदे से देखभाल करय कै जरूरत होत है।
मरीज कै पूरी हालत देख के डॉक्टर लेत हैं फैसला
प्लेटलेट्स चढ़ावै का लै के भी मनइन मा बहुतै डर अउर भरम देखल जात है। डॉ. चौधरी बतावत हैं कि कम प्लेटलेट्स वाले हर डेंगू मरीज का बाहर से प्लेटलेट्स चढ़ावै कै जरूरत नाहीं होत। एकर फैसला खाली प्लेटलेट्स कै नंबर देख के नाहीं कीन जात, बल्कि ई मरीज कै पूरी हालत, डिहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर, ब्लीडिंग के लच्छन अउर देह के बाकी अंगन कै स्थिति देख के तय कीन जात है।
डॉक्टर देत हैं सुरुआती लच्छन पर ध्यान देय कै सलाह
चूंकि, मानसून के मौसम मा डेंगू के मामला तेजी से बढ़त हैं, यहि नाते सही समय पर डॉक्टर का देखायब सबते नीक काम है। मरीज का जम के आराम करय का चाही अउर देह मा पानी कै कमी नाहीं होय देय का चाही। सबते जरूरी बात, बिना डॉक्टर के सलाह के अपने आप कउनो दवा न लें। खास कइके इबुप्रोफेन या एस्पिरिन जइसन सूजन अउर पीरा कम करै वाली दवाइयां बिल्कुलै न लें, काहे से इनते देह के भीतर ब्लीडिंग (इंटरनल ब्लीडिंग) कै खतरा बढ़ सकत है। प्लेटलेट्स के नंबर के पीछे भगै के बजाय, बीमारी के सुरुआती लच्छन का पहचानें अउर तुरंतै डॉक्टर से मिलें।




