
आजु भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजारन म से एक अहै। भारतीय सड़कन पर बजट हैचबैक से लै के लग्जरी SUV तक, दजनौ विदेशी अउर देसी ब्रांड्स क कारें दउड़त अहैं। मुला, का आप कभहूँ सोंचे अहैं कि भारत क पहिली कार कंपनी (First Car Company In India) कउन रही? एकर जवाब हमका इतिहास के ओही दौर म लै जात अहै जब भारत एक स्वतंत्र देस बनै के देहरी पर रहा अउर कुछ दूरदरसी उद्योगपतियन देस म ही कार बनावै क हिम्मत देखाई रही। आवैं जानित अहैं देस क इ पहिली ऑटोमोबाइल कंपनी के इतिहास अउर सफर के बारे म।
भारत क पहिली कार कंपनी कउन रही?
हिंदुस्तान मोटर्स (Hindustan Motors) भारत क पहिली कार कंपनी रही, जेकर सुरुआत देस क आजादी मिलै से भी पहिले, साल 1942 म भई रही। भारत के सबसे इज्जतदार औद्योगिक घराने म से एक, बिड़ला ग्रुप (Birla Group) एकर नीव धरी रही। कंपनी के सरकारी इतिहास के हिसाब से, हिंदुस्तान मोटर्स लिमिटेड क अस्थापना आजादी के पहिले वाले जमाना म गुजरात के पोर्ट ओखा म कीन गई रही। बाद म, 1948 म एकर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पच्छिम बंगाल के हुगली जिला के उत्तरपाड़ा म भेज दीन गय, जहाँ से देस क सबसे नामी कार क उत्पादन सुरू भवा।
इ ऐतिहासिक कंपनी के बनावै वाले कउन रहें?
हिंदुस्तान मोटर्स मशहूर बिड़ला ग्रुप के बी.एम. बिड़ला (B.M. Birla) के दिमाग क उपज रही। 1942 म इ कंपनी इहइ सोच के साथ बनाई गई रही कि भारत ऑटोमोबाइल के छेत्र म अपने गोड़ पर खड़ा होइ सकै। इ उ समय रहा जब भारत पूरी तराय से बाहर से आई कारन पर निर्भर रहा। अइसन म कारन क अपने देस म बनाउब एक क्रांतिकारी बिचार रहा। बिड़ला ग्रुप देस म आवाजाही क बढ़त जरूरतन का पहिचानिस अउर पहिली कार कंपनी क मजबूत नीव धरी।
देस क पहिली स्वदेसी कार कउन रही?
जबहूँ हिंदुस्तान मोटर्स क नाउँ आवा जात है, तौ उ कार क बात करब जरूरी होइ जात है जे लगभग 50 सालन तक भारतीय सड़कन पर राज करिस – एंबेसडर (Ambassador)। ब्रिटेन क मॉरिस ऑक्सफोर्ड सीरीज III (Morris Oxford Series III) पर अधारित इ कार क उत्पादन 1958 म सुरू भवा रहा। इ पूरी तराय से भारत म बनी रही, इहै नाते एका रास्ट्रीय गौरव क प्रतीक मान जाइ रहा। अपनी चौड़ी बॉडी, ढेर जगह अउर मजबूत बनावट के कारन इ दसन सालन तक नेताजी लोगन, सरकारी अफसरन अउर भारतीय परिवारन क पहिली पसंद बनी रही। एका भारतीय सड़कन के हिसाब से ही तैयार कीन गवा रहा।
आखिर हिंदुस्तान मोटर्स अउर एंबेसडर क का भवा?
अपने सानदार अउर गौरवशाली इतिहास के बावजूद, उदारीकरण के बाद आय बदलाव अउर नई होड़ के आगे हिंदुस्तान मोटर्स टिक नाहीं पाई। भारतीय बाजार म नई, जादे माइलेज देवै वाली अउर सानदार कारन क बाढ़ आइ गई, जेसे एंबेसडर क माँग लगातार गिरत चली गई। भारी घाटा अउर काम काज चलावै वाली चुनौतियन के नाते 2014 म कंपनी भारी मन से एंबेसडर क बनाउब बंद कइ दीस। इ खबर बहुतै भारतीयन का भावुक कइ दीस जेकर यादें इ कार से जुड़ी रहीं। साल 2017 म, हिंदुस्तान मोटर्स एंबेसडर क ब्रांड नाम एक फ्रांसीसी मोटर ग्रुप, ग्रुप पीएसए (Groupe PSA जेका अब स्टेलेंटिस कहा जात है) का लगभग ₹80 करोड़ म बेच दीस।




