राष्ट्रीय

धार भोजशाला मामले मा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसला का समुझब

अदालत कय ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के इंदौर पीठ धार मा स्थित विवादित भोजशाला परिसर का देवी वाग्देवी यानी सरस्वती जी का मंदिर मानत भवा एक ऐतिहासिक फैसला सुनाइस है। अदालत अपने फैसला मा कहेस कि यहि जगह पर हिंदू उपासना कय परंपरा बराबर बनी रही अउर समइ के साथै नियमित पूजा कबौ बंद नाहीं भई। अदालत ई भी मानिस कि ऐतिहासिक लिखाई-पढ़ाई, साहित्य कय संदर्भ अउर बनावट कय प्रमाणन से ई साबित होत है कि भोजशाला राजा भोज के समइ मा संस्कृत शिक्षा कय मुख्य केंद्र रहा अउर हुवाँ देवी सरस्वती कय मंदिर रहा।

मूरति वापस लावै अउर मस्जिद बरे जमीन कय सुझाव

अदालत अपने आदेश मा कहेस कि भारत सरकार लंदन मा स्थित ब्रिटिश म्यूजियम से देवी वाग्देवी कय मूरति वापस लावै पर विचार कइ सकत है। साथै साथ अदालत ई भी सुझाव दिहिस कि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी या कउनो दूसर नया वक्फ बोर्ड का धार मा मस्जिद बनावै बरे दूसर जमीन देवै पर विचार कीन जाय सकत है। भोजशाला परिसर कय पूर प्रशासन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पासै रही अउर वही एकर देख-रेख अउर बचाव कय जिम्मेदारी निभइहैं।

हिंदू पक्ष के वकील कय बयान

फैसला के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन एका ऐतिहासिक फैसला बतावत भवा कहेन कि अदालत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सात अप्रैल 2003 वाले आदेश का आधा-अधूरा रद्द कइ दिहिस है। उई कहेन कि अदालत हिंदू पक्ष का पूजा कय अधिकार देत भवा भोजशाला परिसर का राजा भोज से जुड़ा मानिस है। उई ई भी कहेन कि लंदन म्यूजियम मा धरी देवी वाग्देवी कय मूरति का भारत वापस लावै कय मांग पर भी अदालत सरकार का विचार करै कय निर्देश दिहिस है। साथै मा मुस्लिम पक्ष का भी सरकार के सोझै अपनी बात रखै कय आजादी दीन गयी है।

विष्णु शंकर जैन कहेन कि अदालत सरकार से मुस्लिम पक्ष बरे दूसर जमीन कय जुगाड़ करै पर भी विचार करै का कहेस है। उई कहेन कि अब परिसर मा खाली हिंदू पूजा होई अउर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा पहिले दीन गवा नमाज कय अधिकार खत्म कइ दीन गवा है। उई कहेन कि सरकार का यहि जगह कय इंतजाम कय देखरेख करै कय निर्देश भी दीन गवा है।

धार जिला मा सुरक्षा कय इंतजाम

ओहर, फैसला के बाद धार जिला मा सुरक्षा कय कड़ा इंतजाम कीन गवा है। जिला प्रशासन मनइन से शांति बनाय रखै अउर अफवाहन से दूर रहै कय अपील कीहिस है। धार के कलेक्टर राजीव रंजन मीणा कहेन कि भोजशाला से जुड़ल अदालत के फैसला का लय के कउनो भी तरह कय गलत जानकारी या अफवाह फैलावै वालन पर कड़ी कार्रवाई कीन जाई। उई कहेन कि प्रशासन पूर मामाल पर लगातार नजर धरे है अउर जिला मा शांति अउर कानून व्यवस्था बनाय रखब सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

विवाद कय का है इतिहास

हम आप सब का बताय देई कि भोजशाला परिसर का लय के लम्बे समय से विवाद चलत आवत है। हिंदू पक्ष कय दावा है कि धार मा स्थित ई परिसर देवी वाग्देवी यानी सरस्वती कय मंदिर आय, जबकि मुस्लिम पक्ष एका कमाल मौला मस्जिद कय जगह मानत है। यहि धार्मिक रूप का लय के दुनौ पक्षन के बीच कानूनी लड़ाई चलत रही।

सुनवाई अउर सर्वे कय रिपोर्ट

हम आप सब का बताय देई कि यहि मामले मा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट कय इंदौर पीठ बारह मई का आखिरी सुनवाई पूरी होय के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखि लिहिस रहा। जज विजय कुमार शुक्ला अउर जज आलोक अवस्थी कय बेंच छह अप्रैल से रोजै सुनवाई कीहिस रहा। अदालत याचिका दायर करै वालन, जवाब देय वालन, बीच मा आवै वालन अउर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण समेत सब पक्षन कय दलील सुनीस। भोज उत्सव समिति के वकील श्रीश दुबे बताइन कि लगभग पच्चीस दिन तक चली सुनवाई के दौरान अदालत करीब साठ घंटा तक सब पक्षन का विस्तार से सुनीस। उई कहेन कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कय रिपोर्ट मा उठाई गयी कमियन अउर सवालन पर भी विस्तार से जवाब दीन गवा।

दूसर ओहर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वकील अविरल खरे कहेन कि भोजशाला परिसर कय सर्वे पूरी ईमानदारी, साफ-सुथरे ढंग से अउर अदालत के निर्देश के मुताबिक कीन गवा रहा। उई बताइन कि सर्वे रिपोर्ट दुई हजार पन्ना से भी जादा कय है, जेहिमा सर्वे कय तरीका, जांच के ढंग, अलग-अलग जगह मा मिले चीज अउर ओकर गहरा अध्ययन कय पूरा ब्यौरा शामिल है।

पुरानी व्यवस्था मा बदलाव

हम आप सब का याद दिवाय देई कि साल 2003 कय व्यवस्था के मुताबिक हिंदू पक्ष का मंगलवार का सुरुज निकलै से सुरुज डूबै तक पूजा कय इजाजत रही, जबकि मुस्लिम पक्ष जुम्मा का दुपहरी मा एक बजे से तीन बजे तक नमाज पढ़त रहा। अब हाई कोर्ट के नया फैसला के बाद यहि व्यवस्था मा बड़ा बदलाव माना जात है। हालांकि मुस्लिम पक्ष कहेस है कि उई यहि फैसला का आगे चुनौती दिहैं।

(पुनरावृत्ति: अदालत कय ऐतिहासिक फैसला)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के इंदौर पीठ धार मा स्थित विवादित भोजशाला परिसर का देवी वाग्देवी यानी सरस्वती जी का मंदिर मानत भवा एक ऐतिहासिक फैसला सुनािस है। अदालत अपने फैसला मा कहेस कि यहि जगह पर हिंदू उपासना कय परंपरा बराबर बनी रही अउर समइ के साथै नियमित पूजा कबौ बंद नाहीं भई। अदालत ई भी मानिस कि ऐतिहासिक लिखाई-पढ़ाई, साहित्य कय संदर्भ अउर बनावट कय प्रमाणन से ई साबित होत है कि भोजशाला राजा भोज के समइ मा संस्कृत शिक्षा कय मुख्य केंद्र रहा अउर हुवाँ देवी सरस्वती कय मंदिर रहा।

अदालत अपने आदेश मा कहेस कि भारत सरकार लंदन मा स्थित ब्रिटिश म्यूजियम से देवी वाग्देवी कय मूरति वापस लावै पर विचार कइ सकत है। साथै साथ अदालत ई भी सुझाव दिहिस कि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी या कउनो दूसर नया वक्फ बोर्ड का धार मा मस्जिद बनावै बरे दूसर जमीन देवै पर विचार कीन जाय सकत है। भोजशाला परिसर कय पूर प्रशासन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पासै रही अउर वही एकर देख-रेख अउर बचाव कय जिम्मेदारी निभइहैं।

फैसला के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन एका ऐतिहासिक फैसला बतावत भवा कहेन कि अदालत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सात अप्रैल 2003 वाले आदेश का आधा-अधूरा रद्द कइ दिहिस है। उई कहेन कि अदालत हिंदू पक्ष का पूजा कय अधिकार देत भवा भोजशाला परिसर का राजा भोज से जुड़ा मानिस है। उई ई भी कहेन कि लंदन म्यूजियम मा धरी देवी वाग्देवी कय मूरति का भारत वापस लावै कय मांग पर भी अदालत सरकार का विचार करै कय निर्देश दिहिस है। साथै मा मुस्लिम पक्ष का भी सरकार के सोझै अपनी बात रखै कय आजादी दीन गयी है।

विष्णु शंकर जैन कहेन कि अदालत सरकार से मुस्लिम पक्ष बरे दूसर जमीन कय जुगाड़ करै पर भी विचार करै का कहेस है। उई कहेन कि अब परिसर मा खाली हिंदू पूजा होई अउर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा पहिले दीन गवा नमाज कय अधिकार खत्म कइ दीन गवा है। उई कहेन कि सरकार का यहि जगह कय इंतजाम कय देखरेख करै कय निर्देश भी दीन गवा है।

ओहर, फैसला के बाद धार जिला मा सुरक्षा कय कड़ा इंतजाम कीन गवा है। जिला प्रशासन मनइन से शांति बनाय रखै अउर अफवाहन से दूर रहै कय अपील कीहिस है। धार के कलेक्टर राजीव रंजन मीणा कहेन कि भोजशाला से जुड़ल अदालत के फैसला का लय के कउनो भी तरह कय गलत जानकारी या अफवाह फैलावै वालन पर कड़ी कार्रवाई कीन जाई। उई कहेन कि प्रशासन पूर मामाल पर लगातार नजर धरे है अउर जिला मा शांति अउर कानून व्यवस्था बनाय रखब सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

हम आप सब का बताय देई कि भोजशाला परिसर का लय के लम्बे समय से विवाद चलत आवत है। हिंदू पक्ष कय दावा है कि धार मा स्थित ई परिसर देवी वाग्देवी यानी सरस्वती कय मंदिर आय, जबकि मुस्लिम पक्ष एका कमाल मौला मस्जिद कय जगह मानत है। यहि धार्मिक रूप का लय के दुनौ पक्षन के बीच कानूनी लड़ाई चलत रही।

हम आप सब का बताय देई कि यहि मामले मा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट कय इंदौर पीठ बारह मई का आखिरी सुनवाई पूरी होय के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखि लिहिस रहा। जज विजय कुमार शुक्ला अउर जज आलोक अवस्थी कय बेंच छह अप्रैल से रोजै सुनवाई कीहिस रहा। अदालत याचिका दायर करै वालन, जवाब देय वालन, बीच मा आवै वालन अउर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण समेत सब पक्षन कय दलील सुनीस। भोज उत्सव समिति के वकील श्रीश दुबे बताइन कि लगभग पच्चीस दिन तक चली सुनवाई के दौरान अदालत करीब साठ घंटा तक सब पक्षन का विस्तार से सुनीस। उई कहेन कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कय रिपोर्ट मा उठाई गयी कमियन अउर सवालन पर भी विस्तार से जवाब दीन गवा।

दूसर ओहर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वकील अविरल खरे कहेन कि भोजशाला परिसर कय सर्वे पूरी ईमानदारी, साफ-सुथरे ढंग से अउर अदालत के निर्देश के मुताबिक कीन गवा रहा। उई बताइन कि सर्वे रिपोर्ट दुई हजार पन्ना से भी जादा कय है, जेहिमा सर्वे कय तरीका, जांच के ढंग, अलग-अलग जगह मा मिले चीज अउर ओकर गहरा अध्ययन कय पूरा ब्यौरा शामिल है।

हम आप सब का याद दिवाय देई कि साल 2003 कय व्यवस्था के मुताबिक हिंदू पक्ष का मंगलवार का सुरुज निकलै से सुरुज डूबै तक पूजा कय इजाजत रही, जबकि मुस्लिम पक्ष जुम्मा का दुपहरी मा एक बजे से तीन बजे तक नमाज पढ़त रहा। अब हाई कोर्ट के नया फैसला के बाद यहि व्यवस्था मा बड़ा बदलाव माना जात है। हालांकि मुस्लिम पक्ष कहेस है कि उई यहि फैसला का आगे चुनौती दिहैं।

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