सफलता के कहानी
एम0एस0एम0ई (सूक्ष्म, लघु अउर मध्यम उद्यम) अउर निर्यात प्रोत्साहन विभाग
उत्तर प्रदेश का अपने गोड़ पर खड़ा अउर उद्यमशील राज्य बनावै के माननीय मुख्यमन्तरी जी के सपन का सच करइ मा ’मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना’ एक मील के पत्थर साबित होय रही अहै। ई बड़ी योजना के मुख्य मकसद प्रदेश के पढ़ल-लिखल अउर हुनरमंद नौजवानन का नौकरी ढूँढइ वाले के बजाय ’रोजगार दइ वाला’ (जॉब क्रिएटर) बनाउब अहै। योजना के तहत छोट मोट उद्योग लगावै बरे नौजवानन का पहिले चरण मा ₹5.0 लाख तक के ब्याज मुक्त कर्ज (या माली मदद) आसानी से दीन जात अहै। जब व्यापार नीक से चले लागत है अउर कर्ज चुकता होय जात है, त व्यापार का अउर बढ़ावै बरे दूसरे चरण मा भी रुपियन के मदद देइ के नियम अहै। एमा खाली रुपिया-पइसा के फायदा नाहीं अहै, बल्कि नौजवानन का उद्योग लगावै बरे तकनीकी बात अउर बाजार के पैतरा भी सिखावा जात है। प्रदेश सरकार के एही जनहित योजना के मजबूत भरोसा पर अमेठी जिला के बालीपुर, सवनगी के रहइया नीरज दुबे आत्मनिर्भरता के एक जीती-जागती मिसाल कायम करे अहैं। नीरज के ई सफर आज के उन सब नौजवानन बरे बहुत बड़ी प्रेरणा अहै, जउन कम साधन होय के बावजूद अपने सपनन का पूरा करइ के हिम्मत रखत अहैं। एक जमाना रहा जब नीरज पइसा के तंगी अउर पक्का काम न होय के नाते अपने भविष्य का लेके सोच मा डूबे रहत रहे। उनके मन मा धंधा करइ के सोच त रही, पै हाथ मा रुपिया न होय के नाते कदम आगे नाहीं बढ़ि पावत रहे। अइसन कठिन बखत मा ’मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना’ उनके बरे आस के एक किरन बनके आई अउर उनके सपनन का उड़ान दइ दिहिस।
नीरज दुबे के एही बहादुरी भरे सफर मा जिला प्रशासन के भूमिका एक रास्ता देखावै वाले अउर हौसला बढ़ावै वाले के तौर पर रही अहै। जिला प्रशासन के पूरा सहयोग अउर साफ-सुथरा काम के नाते ही योजना के फायदा उन तक बड़ी आसानी से पहुँच सका। जब नीरज उद्योग विभाग के तरफ से लगाए गए जागरूकता शिविर मा ’मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना’ से मिलइ वाले रुपियन के फायदा के बारे मा विस्तार से जानिन, त उनके मन मा बरिसन से दबा स्वरोजगार के सपना फिर से जाग उठा। जिला प्रशासन अउर व्यापार विभाग के अधिकारिन अरजी भरइ से लेके प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करइ तक नीरज के हर कदम पर मदद अउर मार्गदर्शन कीनिन। प्रशासन के एही फुर्ती के नतीजा रहा कि उनके अरजी का तुरंत मंजूरी मिलि गई अउर योजना के तहत उनका ₹5.0 लाख के कर्ज पास होय गवा। ई रुपिया खाली एक कर्ज नाहीं रहा, बल्कि नीरज के व्यापारी बनइ के सपना के मजबूत नेव रही। जिला प्रशासन ई बात का भी ध्यान रखिस कि पइसा मिलइ के बाद नीरज का कच्चा माल लेइ अउर मशीनरी बैठावै मा कौनों तकनीकी अड़चन न आवै, जेहसे उनके हौसला का अउर मजबूती मिली।
मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना से मिली एही संजीवनी के नीरज दुबे पूरा सदुपयोग कीनिन। ऊ मिलल कर्ज के रुपियन से दोना-पत्तल बनावै के एक नया कारखाना चालू कीनिन अउर बढ़िया क्वालिटी के मशीन खरीदे। योजना के फायदा से उनके धंधा का अइसन रफ्तार मिली, जेकर ऊ कल्पनावो नाहीं करे रहेन। जउन धंधा शुरू मा बहुत छोटे स्तर पर रहा, ऊ सरकारी मदद अउर नीरज के कड़ी मेहनत के नीक तालमेल से बहुत कम बखत मा एक बड़ा व्यापार बन गवा। आज नीरज के कारखाना मा बने वाला दोना-पत्तल अपनी बेहतरीन क्वालिटी अउर मजबूती के नाते आस-पास के बाजारन मा भी अपनी खास पहिचान बनाय चुका अहै। उनके धंधा के तरक्की के अंदाजा एही बात से लगावा जाइ सकत है कि काम शुरू होय के कुछे महीना मा उनके माल के मांग चार गुना से ज्यादा बढ़ि गई। ई लगातार बढ़ती मांग नीरज का अपने धंधा का अउर बढ़ावै बरे हौसला दिहिस अहै।
सरकारी योजना के नीक से चले के नाते नीरज के जिंदगी मा जउन बदलाव आवा अहै, ऊ खाली पइसा तक सीमित नाहीं अहै, बल्कि इससे समाज मा उनका मान-सम्मान भी बढ़ा अहै। धंधा मा भई ई तरक्की के सीधा असर उनके कमाई पर पड़ा अहै। आज नीरज के महीना के टर्नओवर अउर मुनाफा पहिले के हालत से कइयौ गुना ज्यादा अहै, जेहसे उनके परिवार के रहन-सहन मा बहुत सुधार आवा अहै। धंधा के एही कामयाबी नीरज का एक सफल मालिक के रूप मा खड़ा कइ दिहिस अहै। योजना के असली मकसद का पूरा करत भए आज ऊ अपने कारखाना के माध्यम से 03 अउर गांव के नौजवानन का पक्का रोजगार दइ रहे अहैं, जउन सीधे तौर पर गांव के अर्थव्यवस्था का मजबूत कइ रहा अहै। नीरज अब दूसर नौजवानन बरे एक सलाहकार के काम भी करत अहैं अउर उनका जिला प्रशासन अउर सरकारी योजनन के फायदा उठावै बरे प्रेरित करत अहैं।
नीरज दुबे के ई कामयाबी के कहानी ए बात के पक्का सबूत अहै कि जेकर सरकार के नीति सही दिशा मा होय अउर जिला प्रशासन ओका नीक से चलावै, त प्रदेश के नौजवान कौनों भी ऊंचाई का छू सकत अहै। ’मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना’ नीरज जइसन हजारन नौजवानन के भीतर छिपे हुनर का पहिचान दिहिस अहै अउर उनका अपने गोड़ पर खड़ा होय के रास्ता देखाएस अहै। आज नीरज के दोना-पत्तल के कारखाना न खाली बढ़िया से चलि रहा अहै, बल्कि आगे ओका अउर बड़े स्तर पर बढ़ावै के पूरा उम्मीद दिखाई दइ रही अहै। उनकी तरक्की ई साफ जाहिर करत अहै कि सरकारी मदद जब मनई के पक्का इरादा अउर मेहनत से मिलत है, त कामयाबी के नवा इतिहास लिखा जात है। अमेठी के गांव-गिरावं से निकलि के एक सफल व्यापारी बनइ तक के नीरज के ई सफर प्रदेश के हर उस नौजवान बरे एक रास्ता देखावै वाला अहै, जउन खुद के काम से अपना अउर उत्तर प्रदेश के भविष्य संवारइ चाहत अहै।
जनपद अमेठी
