
हिन्दू धरम मा शनि जयंती क खास महत्व अहै। निंयाव क देवता अउर करमफल दाता शनिदेव का समर्पित ई दिन उनकी किरपा पावे क सबते नीक मौका माना जात है। धरमिक मानयतन के हिसाब से, शनिदेव हमार करमन के आधार पर फल देत हें। शनि जयंती के दिन बरत, दान अउर पूजा-पाती के साथे-साथ खान-पान क भी खास खियाल राखब जरूरी अहै। कुछ अइसन चीज़ें हें जिनका सेवन ई दिन भूलि केहु नाहीं करे क चाही। जउं आप इन नियमन क अनदेखी करत हें, तऽ शनिदेव रुष्ट होइ सकत हें। अइसन मा आवा, ई दिन से जुड़ी जरूरी बातन का जानित है।
भूलि केहु न खायें ई सब चीज़ें
तामसिक भोजन: शनिदेव अनुसासन अउर सात्विकता क प्रतीक हें। शनि जयंती के पावन मौके पर मांस, मछरी या मदिरा (सराब) क सेवन एकदम मना अहै। अइसन करै से कुंडली मा शनि दोस बढ़त है अउर मनई के जिन्दगी मा आर्थिक अउर मानसिक परेसानियां बढ़ि सकत हैं।
दूध अउर सफेद चीज़ें: जोतिष सास्तर के हिसाब से, शनिदेव का सफेद रंग क चीज़ें नाहीं नीक लागत। ई दिन दूध, दही या सफेद मिठाई खाय से बचे क चाही। जउं दूध पियब जरूरी होय, तऽ ओमा तनी सा हरदी या केसर मिलाइ क पियें।
मसूर क दाल: शनि जयंती पर मसूर क दाल खाय क मनाही अहै। मसूर क दाल क संबंध मंगल गरह से होत है, अउर मंगल अउर शनि के बीच में शत्रुता क भाव माना जात है। ई दिन एका खाय से जिन्दगी मा कलह-कलेस अउर एक्सीडेंट क डर बढ़ि सकत है।
लाल मिरचा अउर तीखे मसाले: शनिदेव का तीखा अउर लाल रंग नाहीं पसंद अहै। साथे मा एका तामसिक भी माना जात है। अइसन मा ई दिन भोजन मा लाल मिरचा क परयोग करै के जगह करिया मिरचा या हरिअर मिरचा क थोरिके मात्रा मा इस्तमाल करे क चाही।
कच्चा नून: खाना के ऊपर से नून डारि के खाय से परहेज करें। ई खाली सेहत बरे खराब नाहीं अहै, बल्कि जोतिष की नजरि से भी ई दिन एका असुभ माना जात है।
का खायें?
शनि जयंती पर करिया तिल, उरद क दाल, खिचड़ी अउर सरसो के तेल से बनी चीज़न क सेवन अउर दान करब बहुत सुभ होत है। ई दिन सात्विक भोजन कइले से शनिदेव खुस होत हें अउर साढ़ेसाती व ढैय्या क खराब असर कम होत है।
पूजन मंत्र:
ॐ शं शनैश्चराय नमः।।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
ॐ शन्नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंयोरभिश्रवन्तु नः।।
ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।




