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स्ट्रॉबेरी के मिठास से संतपाल सिंह लिखीन खुशहाली के नई इबारत

मिर्जापुर जिला मा उद्यान विभाग के सलाह अउर सरकारी अनुदान के मदद से किसान संतपाल सिंह अउर जय सिंह पारंपरिक खेती छोड़िके स्ट्रॉबेरी व ड्रैगन फ्रूट से लाखन रुपिया कमाय रहे अहैं।

स्ट्रॉबेरी अउर ड्रैगन फ्रूट से मिर्जापुर के किसान संतपाल अउर जय सिंह गढ़िन कामयाबी के नई कहानी


सफलता के कहानी कृषि अउर संबद्ध सेक्टर (उद्यान विभाग)

मिर्जापुर जिला के राजगढ़ विकासखण्ड मा स्थित ग्राम धनसीरीया के एक प्रगतिशील किसान श्री संतपाल सिंह बागवानी के क्षेत्र मा एक बहुत बढ़िया मिसाल पेश कीन अहैं। श्री संतपाल सिंह के लगे कुल 2.0 हेक्टेयर खेती के जमीन अअइ, जेह पर ऊ बरिसन से धान, गेहूँ अउर आलू जइसन पुरान तरीका से खेती करत आवत रहे। बहुत मेहनत कइके भी इन फसलन से होय वाली कमाई खरचा अउर मेहनत के आगे बहुत कम रही, जेहसे उनके तरक्की के राह मा हमेशा अड़चन बनी रहत रही। संतपाल सिंह कुछ अइसन करइ चाहत रहे जेहसे न खाली उनके कमाई बढ़े, बल्कि इलाका के दूसर किसानन का भी एक नई दिशा मिलि सकइ।

उनके जिंदगी मा बड़ा बदलाव तब आवा जब ऊ राजगढ़ ब्लॉक मा उद्यान विभाग के तरफ से लगाए गए कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम (किसान ट्रेनिंग) मा हिस्सा लीनिन। हुवां उनका स्ट्रॉबेरी के खेती के नई तकनीक अउर बाजार मा एकर मांग के बारे मा विस्तार से जानकारी मिली। ट्रेनिंग से खुश होय के ऊ पुरान खेती के साथे-साथे प्रयोग के तौर पर स्ट्रॉबेरी उगावइ के मन बनाइन। उद्यान विभाग मिर्जापुर के अधिकारिन से लगातार सलाह लइके ऊ साल 2024 मा अपनी 16 बिस्वा जमीन पर स्ट्रॉबेरी के खेती शुरू कीनिन। प्रदेश सरकार के तरफ से मिली मदद व अनुदान अउर नई तकनीक व सही देख-रेख के बढ़िया नतीजा खाली 05 से 06 महीना के भीतर ही देखे का मिलि गवा, जब स्ट्रॉबेरी के फसल पूरी तना तैयार होय गई तब ऊ ओकर बिक्री शुरू कीनिन।

संतपाल सिंह के खेत मा एक पेड़ से लगभग 0.5 से 1.0 किलोग्राम तक बढ़िया क्वालिटी के फल मिले। काहे से कि जिला मा स्ट्रॉबेरी के खेती एकदम नई रही, एही नाते गाँव-गिरावं के बाजारन मा एकर बहुत मांग रही अउर उनका बहुत नीक दाम मिला। एही छोटे से खेत से उनका कुल ₹4.0 लाख के शुद्ध मुनाफा भवा, जउन ई साबित कइ दिहिस कि कम जमीन मा भी अगर तकनीक के सही इस्तेमाल कीन जाय, त खेती फायदे के सौदा बनि सकत अअइ। उनके एही बड़ी कामयाबी से खुश होय के आस-पास के गाँव के किसानन मा भी स्ट्रॉबेरी के खेती बरे बहुत उत्साह देखा जाइ रहा अअइ।

आज संतपाल सिंह के प्रेरणा से उनके गाँव अउर आस-पास के इलाकन मा कुल 05 हेक्टेयर क्षेत्र मा स्ट्रॉबेरी के खेती कीन जाइ रही अअइ। अपनी एही कामयाबी के श्रेय प्रदेश सरकार के सही जानकारी अउर अनुदान का देवत भए किसान श्री संतपाल सिंह कहत अहैं कि उद्यान विभाग के सही सलाह उनके तकदीर बदलि दिहिस अअइ। उनके ई कहानी ई संदेस देइत है कि अगर किसान नवा तरीका अपनाएं अउर नई बागवानी के ओर कदम बढ़ाएं, त ऊ अपनी कमाई बढ़ाके आत्मनिर्भर बनि सकत अहैं।

प्रदेश सरकार स्ट्रॉबेरी जइसन फायदे वाली फसल का बढ़ावा देइ बरे किसानन का रुपियन के मदद दइके उनका आत्मनिर्भर बनावै के बहुत सराहनीय काम कीनिस अअइ। उद्यान विभाग के मुताबिक स्ट्रॉबेरी के एक इकाई लगावै मा लगभग ₹2 लाख प्रति हेक्टेयर के खरचा आवत है, जेकरे बदले सरकार 40 प्रतिशत के दर से ₹80,000 प्रति हेक्टेयर के अनुदान (छूट) दइ रही अअइ। ई सरकारी मदद न खाली किसानन पर शुरुआत के खरचा के बोझ कम करत है, बल्कि उनका नई खेती अपनावै बरे हौसला भी देइत है।

उत्तर प्रदेश मा किसानन के कमाई बढ़ावै अउर खेती का फायदेमन्द बनावै के दिशा मा मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई मा उद्यान विभाग कइयौ बढ़िया योजना चलाय रहा अअइ। इन्हीं कोशिश के नतीजा अअइ कि पुरान खेती से आगे बढ़िके किसान अब ज्यादा दाम वाली फसलन—जैसे स्ट्रॉबेरी—के ओर तेजी से खिंचे चले आवत अहैं अउर अपनी कमाई बढ़ा रहे अहैं।


मिर्जापुर के किसान जय सिंह ड्रैगन फ्रूट से लिखीन कामयाबी के नई कहानी

उत्तर प्रदेश मा किसानन के कमाई बढ़ावै अउर उनका नई खेती के ओर मोड़इ बरे कइयौ योजना अउर ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाए जाइ रहे अहैं। इन्हीं कोशिश के एक बहुत नीक नतीजा मिर्जापुर जिला के किसान जय सिंह के कामयाबी के रूप मा सामने आवा अअइ, जउन पुरान खेती छोड़िके ड्रैगन फ्रूट के खेती अपनाइन अउर आज पूरे इलाका के किसानन बरे मिसाल बनि चुके अहैं।

मिर्जापुर जिला के नारायणपुर विकासखण्ड के ग्राम रानीपुर के रहइया जय सिंह एक सीधे-साधे किसान परिवार से अहैं। उनके लगे लगभग 2 हेक्टेयर खेती के जमीन अअइ, जेह पर ऊ पहिले पारंपरिक तरीका से धान, गेहूँ अउर आलू जइसन फसल उगावत रहे। पै इन फसलन से उनका सही मुनाफा नाहीं मिलि पावत रहा। बढ़ता खरचा, मौसम के मार अउर बाजार के भरोसा न होय के नाते उनके कमाई बहुत कम रहि जात रही, जेहसे परिवार के हालत मा कौनों खास सुधार नाहीं होय पावत रहा।

किसानन के भलाई करइ वाली प्रदेश सरकार के औद्यानिक खेती के तहत उद्यान विभाग के एक ट्रेनिंग कार्यक्रम के बारे मा उनका जानकारी मिली, जेमा श्री जय सिंह हिस्सा लइके ट्रेनिंग पूरा कीनिन। ट्रेनिंग मा उनका नई बागवानी अउर खास कइके ‘ड्रैगन फ्रूट’ के खेती के बारे मा पूरी जानकारी दीन गई। हुवां उनका बतावा गवा कि ई फसल कम पानी मा भी बहुत बढ़िया पैदावार देइत है, एमा बीमारी बहुत कम लागत है अउर बाजार मा एकर मांग भी लगातार बढ़ि रही अअइ।

शुरुआत मा किसान जय सिंह बरे ई एक नया अउर जोखिम भरा फैसला रहा, काहे से कि उनके इलाका मा पहिले कबहूँ केऊ ड्रैगन फ्रूट के खेती नाहीं करे रहा। फिर भी ऊ हिम्मत जुटाए अउर प्रयोग के तौर पर अपने खेत के एक छोटे हिस्से मा ड्रैगन फ्रूट के खेती शुरू कीनिन। ऊ उद्यान विभाग से जरूरी सलाह लीनिन अउर वैज्ञानिक तरीका से पेड़ लगाइन, सिंचाई कीनिन अउर देख-रेख कीनिन। धीरे-धीरे उनके मेहनत रंग लावै लागी। पेड़ बढ़िया से बढ़े अउर कुछ बखत के बाद फल देइ लागे। ड्रैगन फ्रूट के बाजार मा बहुत बढ़िया दाम मिलइ के नाते उनके कमाई मा बहुत बड़ा उछाल आवा। जहाँ पहिले पुरान खेती से बहुत कम कमाई होत रही, वहीं अब कम खरचा मा ज्यादा मुनाफा मिलइ लगा।

आज जय सिंह अपने इलाका मा एक प्रगतिशील किसान के रूप मा जाने जात अहैं। उनके कामयाबी के कहानी ई साबित करत है कि सही जानकारी, ट्रेनिंग अउर हिम्मत के साथे कौनों भी किसान अपनी किस्मत बदलि सकत है। ड्रैगन फ्रूट के खेती से जय सिंह ई देखा दिहिन कि खेती मा नया तरीका अउर आधुनिकता अपनाके न खाली कमाई बढ़ाई जाइ सकत है, बल्कि गाँव के अर्थव्यवस्था का भी मजबूत कीन जाइ सकत है।

उत्तर प्रदेश मा बागवानी फसलन का बढ़ावा देइ बरे अउर किसानन के कमाई मा बड़ी बढ़ोत्तरी पक्की करइ बरे मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई मा राज्य सरकार लगातार नए-नए काम कइ रही अअइ। एही नाते उद्यान विभाग द्वारा ड्रैगन फ्रूट जइसन कीमती फसल का बढ़ावा देइ बरे बहुत बढ़िया अनुदान योजना चलाई जाइ रही अअइ।

ड्रैगन फ्रूट के खेती का बढ़ावा देइ बरे एक इकाई लगावै मा लगभग ₹6.75 लाख प्रति हेक्टेयर के खरचा आवत है, जेकरे बदले प्रदेश सरकार 40 प्रतिशत के हिसाब से ₹2.70 लाख प्रति हेक्टेयर के अनुदान दइ रही अअइ। ई रुपियन के मदद किसानन बरे बहुत बड़ी राहत साबित होय रही अअइ, जेहसे ऊ बिना कौनों पइसा के तंगी के नई अउर फायदेमन्द खेती के ओर आगे बढ़ि रहे अहैं।


– प्रदीप कुमार,

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