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प्रदेश सरकार के सरंक्षण से बढ़ी वन्यजीवों के संख्या

उत्तर प्रदेश मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगुवाई मा वन अउर वन्यजीवों के सरंक्षण बरे कइयौ बड़े काम भवा अहैं, जेहसे बाघ, सारस अउर हाथी जइसन जानवरन के संख्या मा भारी बढ़ोत्तरी दर्ज कीन गई अहै।


सफलता के कहानी वन अउर वन्यजीव विभाग

वन अउर वन्यजीव ई धरती के असली प्राकृतिक धरोहर अहैं। जंगल अउर जंगली जानवरन से ही पर्यावरण के संतुलन बना रहत है, जउन मनई के जिंदगी का सुखी अउर समृद्ध बनावत है। हमार देश मा कइयौ जात के वन्यजीव रहत अहैं। वन्यजीव भी प्राणी अहैं, मनई के तना उनके भी सब अंग होत हैं अउर उनके दिल के धड़कन भी आम मनई के जइसन ही धड़कत अहै। आज वन्यजीवों के सही बचाव अउर देख-रेख बरे लोगन का जागरूक करब अउर उनके प्रति दया अउर मया के भाव जगाउब बहुत जरूरी अहै। हमार पुरान समय से ही वन्यजीवों का सुरक्षित रखइ के परंपरा रही अहै, एही नाते आज बढ़ते सहर अउर कारखानन के बावजूद भी कइयौ तरह के वन, पेड़-पौध अउर वन्यजीव जिन्दा अहैं। धरती के सुघराई अउर संतुलन बनाय रखइ बरे अलग-अलग जीव-जन्तु मा तालमेल बहुत जरूरी अहै। वन्यजीव उ हर पेड़-पौध, जानवर, चिरई अउर जीव का कहा जात है, जेका मनई पालतू नाहीं बनाएस अहै। जंगली जीव दुनिया के हर इलाका—रेगिस्तान, जंगल, मैदान, पहाड़, पानी अउर सहरन मा भी पाए जात अहैं, पै ऊ मनई के बस्ती से दूर जंगल-पहाड़ जइसन अपने प्राकृतिक ठिकाना मा रहत अहैं।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई मा उत्तर प्रदेश मा वन्यजीवों के घर, सरंक्षण अउर देख-रेख बरे खास काम कीन जात अहैं। वन्यजीवों का नीक प्राकृतिक माहौल देइ बरे प्रदेश सरकार बहुत बड़ा पेड़ लगावइ के अभियान चलाय के पौधरोपण करवाएस अहै। प्रदेश सरकार के 09 साल के राज मा पूरे प्रदेश मा 242.13 करोड़ पेड़ लगाय के जंगल अउर हरियाली का बढ़ावा दीन गवा अहै। सरकार के एही काम से प्रदेश मा साल 2017 से 2023 के बीच 03 लाख 38 हजार एकड़ मा जंगल अउर हरियाली बढ़ि गई अहै।

प्रदेश सरकार वन्यजीवों का प्राकृतिक माहौल दइके उनके आबादी मा बढ़ोत्तरी कइ दिहिस अहै। जब वन्यजीवों का उनके मन मुताबिक घर अउर भरपेट खाना मिली अउर नर-मादा प्राकृतिक रूप से मिलिहैं, त उनका कुनबा त जरूर बढ़ी। सरकार के नीक इंतजाम के नतीजा अहै कि प्रदेश मा राष्ट्रीय पशु बाघ के संख्या जउन पहिले 173 रही, ऊ अब बढ़ि के 205 होय गई अहै। प्रदेश मा बाघों के संख्या मा 18 प्रतिशत के बढ़ोत्तरी भई अहै। पूरे देश मा सबसे ज्यादा 2397 डॉल्फिन उत्तर प्रदेश मा अहैं। प्रदेश सरकार झील अउर ताल-तलइया के संख्या भी बढ़ाएस अहै। जउन झील, नदी अउर तालाब मा कूड़ा-कचरा अउर घास उगी रही, उनका साफ-सुथरा कइके पुरान रंग-रूप मा लावा गवा अहै। नीक माहौल अउर पूरा बचाव देइ के नतीजा अहै कि राज्यपक्षी सारस के संख्या पिछले बरिसन मा 19994 से बढ़ि के 20281 होय गई अहै। प्रदेश के लोग सारस से बहुत मया करत अहैं अउर उनके रहे के ठिकाना से कौनों छेड़छाड़ नाहीं करत। एही तना प्रदेश मा हाथी के संख्या 232 से बढ़ि के 352 होय गई अहै। प्रदेश के जंगल मा हाथियों का पूरा सरंक्षण दीन जाइ रहा अहै।

प्रदेश सरकार 27 वन्यजीव विहार अउर पक्षी विहार का सुरक्षित कइ रही अहै। इन विहारन मा वन्यजीवों का बढ़िया माहौल मिलि रहा अहै अउर उनके संख्या बढ़ि रही अहै। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी चित्रकूट जिला के विन्ध्य पर्वतमाला मा स्थित लगभग 53000 हेक्टेयर के बड़े अउर सुघर जंगल का, जैव विविधता बरे खास होय के नाते, 19 अक्टूबर 2022 का ‘रानीपुर टाइगर रिजर्व’ के नाम से प्रदेश के चौथा टाइगर रिजर्व घोषित कइ दिहिन। गोरखपुर जिला के कैम्पियरगंज रेंज मा रेडहेडेड गिद्ध सरंक्षण अउर प्रजनन केंद्र बनाय के गिद्धों के संख्या बढ़ाई जाइ रही अहै। उत्तर प्रदेश मा वेटलैण्डस (नम भूमि) के संख्या मा भी बढ़ोत्तरी भई अहै। इन वेटलैण्ड रामसर साइट मा चिरई अउर पानी के जीव रहत अहैं। प्रदेश मा 12 वेटलैण्ड रामसर साइट घोषित भई अहैं, जउन पूरे देश मा सबसे ज्यादा अहैं।

प्रदेश मा गौरैया सरंक्षण अभियान का मिली रफ्तार

पर्यावरण अउर जैव विविधता का बचावै बरे हर साल 20 मार्च का ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जात है। ई साल नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान मा विश्व गौरैया दिवस धूमधाम से मनावा गवा। लोगन का गौरैया के जरूरत अउर ओका बचावै बरे आगे आवइ बरे प्रेरित कीन गवा। प्रदेश सरकार के मुख्य मकसद तेजी से घटती गौरैया के संख्या का रोकइ बरे जरूरी तरीका जन-जन तक पहुँचाउब अहै। जउन गौरैया कबहूँ घर के आंगन अउर छत पर चहचहात रही, ऊ आज बढ़ते सहर, प्रदूषण अउर बदलती जिंदगी के नाते गायब होय रही अहै। गौरैया हमार पर्यावरण बरे बहुत काम के चिरई अहै। ई कीड़ा-मकोड़ा खाय के फसल के रक्षा करत है अउर बीया का फैलावे मा मदद करत है, जेहसे प्रकृति के संतुलन बना रहत है। बनावटी घोंसला, माटी के बर्तन, पेड़-पौध, दाना-पानी देइ अउर लोगन का अपने घर मा गौरैया बरे नीक माहौल तैयार करइ बरे सरकार प्रेरित कइ रही अहै।

विश्व गौरैया दिवस पहली बार साल 2010 मा मनावा गवा रहा। भारत से शुरू भवा ई अभियान आज पूरी दुनिया मा फइलि चुका अहै। गौरैया का बचाउब खाली एक चिरई का बचाउब नाहीं अहै, बल्कि अपने पर्यावरण अउर आने वाले कल का सुरक्षित करब अहै। प्रदेश सरकार के वन्यजीव सुरक्षा, जंगलों के देख-रेख अउर नई तकनीक के इस्तेमाल से वन्यजीवों के बचाव का एक नया रास्ता मिला अहै।

रवि यादव

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