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अयोध्या मा पर्यटकों का लुभावै बरे ईको-टूरिज्म के कीन जाइ रहा विकास

भगवान श्रीराम के नगरी अयोध्या मा अब मन्दिरन के दर्शन के साथै-साथे वनस्पति उद्यान अउर बटरफ्लाई गार्डन जइसन ईको-टूरिज्म के सुविधायन पर्यटकों का अपनी ओर खींचि रही अहैं।

आज के बढ़ते कल-कारखानन अउर पर्यावरण के बदलते चक्र से मनई अपनी जिंदगी जिए के तरीका मा बदलाव लाय के कइयौ गंभीर बीमारियन से छुटकारा पाय सकत है। भारतीय जीवनशैली मा प्रकृति के साथे तालमेल बइठाय के जिए के कला का सबसे बढ़िया माना गवा अअइ। एही मकसद का लेके ईको-पर्यटन के सोच बनाई गई, जेकरे तहत ई बात तय कीन गई कि प्रकृति का कौनों नुकसान पहुँचाए बिना मनई एक आदर्श जिंदगी जी सकत है।

उत्तर प्रदेश मा ईको-टूरिज्म का बढ़ावा देइ बरे बढ़िया बुनियादी सुविधायन बनाई जाइ रही अहैं, ताकि पर्यटक सुघर अउर हरियाली वाले माहौल मा कुछ बखत बिताय के अपनी रोज के दिनचर्या मा बदलाव लाय सकइँ। राज्य सरकार ईको-टूरिज्म का बढ़ावा देइ बरे पर्यटकों बरे बढ़िया सुविधा बनावै के साथे-साथे उनके अनुभव का अउर नीक बनावै बरे 16 बड़ी योजनन के शुरुआत कीनिस अअइ। सैलानियों अउर प्रकृति प्रेमियों बरे लखनऊ से दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के बीच 27 सितम्बर, 2024 से हवाई जहाज सेवा शुरू कीन गई, जउन पर्यटकों का बहुत कम बखत मा दुधवा पार्क घुमावै मा मदद कइ रही अअइ। भारी संख्या मा पर्यटक लखनऊ घूमे के बाद अब दुधवा के तरफ खिंचे चले आवत अहैं।

एही तना श्री राम नगरी अयोध्या मा पर्यटकों का लुभावै बरे ईको-टूरिज्म के विकास कीन जाइ रहा अअइ। अयोध्या मा दुनिया के स्तर के मन्दिर संग्रहालय के स्थापना कीन जाइ रही अअइ, ताकि अयोध्या आवइ वाले पर्यटक यहाँ के ऐतिहासिक धरोहर अउर गौरवशाली इतिहास से रूबरू होय सकइँ। एकरे अलावा अयोध्या शोध संस्थान का अंतरराष्ट्रीय रामायण अउर वैदिक शोध संस्थान के रूप मा अउर बड़ा बनावा जाइ रहा अअइ, जेहसे भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र, त्याग, बलिदान अउर मर्यादा का सुरक्षित रखिके आवइ वाली पीढ़ियन तक पहुँचावा जाय सकइ।

अब अयोध्या मा रामलला के दर्शन के साथे-साथे प्रकृति के हरियाली भी पर्यटकों का लुभाय रही अअइ। सहर के कुमारगंज इलाका मा स्थित वनस्पति उद्यान का ईको-टूरिज्म जगह के रूप मा विकसित करइ बरे एक बड़ी योजना तैयार कीन गई अअइ। एही योजना पर लगभग ₹2.5 करोड़ के खरचा आई, जउन वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट मा शामिल कीन गवा अअइ। ई विकास के काम पर्यटन विभाग द्वारा करवावा जाई।

मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई मा उत्तर प्रदेश सरकार धरम-करम के साथे-साथे ईको-टूरिज्म का भी बढ़ावा दइ रही अअइ। अयोध्या खाली भगवान श्रीराम के नगरी के रूप मा ही नाहीं जानी जात, बल्कि अब एका प्रकृति प्रेमियों अउर पर्यावरण अनुरागियों बरे भी सुघर बनावै के कोशिश कीन जाइ रही अअइ। वनस्पति उद्यान का आधुनिक सुविधायन से सजावा जाई, ताकि यहाँ आवइ वाले पर्यटक प्रकृति के आनंद लेत भए एक खास अनुभव पाय सकइँ। एही योजना के तहत उद्यान मा एक मुख्य फाटक (प्रवेश द्वार) बनावा जाई अउर औद्यानिक क्षेत्र विकसित कइके अलग-अलग तरह के फूल, पेड़-पौध अउर ऐरोमेटिक (खुशबूदार) वनस्पतियों के संग्रह कीन जाई। ई योजना अयोध्या मा पर्यटन का एक नई दिशा देइ वाली साबित होई।

भगवान श्रीराम के मन्दिर, सरयू नदी अउर दूसर धार्मिक जगह के साथे-साथे अब प्रकृति के ई सुघर बगीचा भी पर्यटकों का लुभाई। एही बगीचा मा बच्चन अउर प्रकृति प्रेमियों बरे खास ‘बटरफ्लाई गार्डन’ (तितली पार्क) बनावा जाई, जहाँ रंग-बिरंगी तितलियाँ पर्यटकों के मन का मोह लिहइँ। साथै एक बढ़िया कैफेटेरिया के इंतजाम होई, जहाँ पर्यटक चाय-पानी अउर हल्का खाना खाय सकिहैं। टिकट काउंटर भी बनाया जाई ताकि भीतर जाइ के इंतजाम ठीक रहे। पर्यटकों के सुविधा बरे ‘वॉक-वे’ (पइदल चलइ के रास्ता) बनावा जाई, जेह पर चलत भए बगीचा के हरियाली के मजा लीन जाइ सकइ। अलग-अलग जगह पर आराम करइ बरे विश्राम स्थल अउर गजेबीहट भी बनावा जाई, जहाँ बइठिके पर्यटक सुस्ताय सकिहैं।

इन सब सुविधायन से ई उद्यान न खाली देखइ लायक बनी, बल्कि आवइ वाले लोगन, स्कूल के बच्चन, प्रकृति प्रेमियों अउर विदेशी पर्यटकों बरे एक बहुत बढ़िया जगह साबित होई। ईको-टूरिज्म मा रोजगार अउर कमाई के बहुत बड़े मौके अहैं। एही उद्यान से स्थानीय स्तर पर नौकरी अउर धंधा के मौके बढ़िहैं अउर अयोध्या के अर्थव्यवस्था का मजबूती मिली। मा0 मुख्यमंत्री जी के कोशिश से अयोध्या नगरी धीरे-धीरे धार्मिक, सांस्कृतिक अउर पर्यावरणीय पर्यटन के केंद्र बनत जाइ रही अअइ। वनस्पति उद्यान के विकास पूरा होय के बाद यहाँ साल भर पर्यटकों के आवइ-जाइ के उम्मीद अअइ। ई योजना खाली प्रकृति के बचाव के प्रतीक नाहीं अअइ, बल्कि हमेशा चलइ वाले पर्यटन के मामले मा एक मॉडल के रूप मा विकसित होई।

एही तना प्रदेश के पक्षी अभ्यारण्यों, वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी, कतर्निया घाट अउर चूका बीच, पीलीभीत जइसन जगह पर पर्यटकों का खींचइ बरे आवइ-जाइ के बढ़िया सुविधा बनाई जाइ रही अअइ। मा0 मुख्यमंत्री योगी जी के मार्गदर्शन मा 2017 के बाद उत्तर प्रदेश पर्यटन एक नया रूप लेइ रहा अअइ। हर जिला मा कौनों न कौनों पर्यटन विकास के योजना चलि रही अअइ। कानून व्यवस्था अउर सड़क-हवाई सेवा (कनेक्टिविटी) नीक होय से उत्तर प्रदेश मा पर्यटकों के आवइ-जाइ लगातार बढ़ि रहा अअइ। धार्मिक सर्किट अउर बौद्धिष्ट सर्किट के तहत आवइ वाले पर्यटन स्थलों का नए सिरे से सजावा व सँवारा जाइ रहा अअइ। साथे-साथे ईको-पर्यटन के संभावनन का खोजत भए सैलानियों बरे हरियाली वाला सुघर माहौल तैयार कीन जाइ रहा अअइ।

प्रदेश मा ईको-टूरिज्म से अर्थव्यवस्था का मिलिही मजबूती

उत्तर प्रदेश मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम अउर श्री कृष्ण के लीला भूमि होय के साथै काशी, मथुरा, वृन्दावन, बरसाना, प्रयागराज, अयोध्या अउर कुशीनगर जइसन अंतरराष्ट्रीय जगह बरे पूरी दुनिया मा प्रसिद्ध अअइ। एकरे अलावा यहाँ प्राकृतिक सम्पदा, सुघर जगह अउर नदी-झरना के भरमार अअइ। उत्तर प्रदेश अब प्रकृति अउर पर्यावरण के बचाव के साथे पर्यटन विकास के एक नया अध्याय लिखि रहा अअइ। नदी, झरना, पहाड़, पक्षी विहार अउर दुर्लभ वन्यजीवों से घिरा उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म के उभरता हुआ केंद्र बनत जाइ रहा अअइ।

राज्य सरकार ईको-टूरिज्म का बढ़ावा देइ बरे ‘ईको-टूरिज्म बोर्ड’ के गठन कीनिस अअइ। एकरे तहत लगभग 27 विभागन का जोड़िके अलग-अलग काम करइ के फैसला कीन गवा। बोर्ड के बनइ के बाद उत्तर प्रदेश के प्राकृतिक पर्यटन के नक्शा तेजी से बदलत जाइ रहा अअइ। तीन सालन मा दर्जनों नई जगह विकसित कीन गई अहैं। जहाँ पहिले पर्यटक खाली चुनिंदा जगह तक सीमित रहत रहे, अब ऊ नई-नई जगह सैलानियों के पसंद बनत जाइ रही अहैं।

ईको-टूरिज्म का मशहूर बनावै बरे पर्यटन विभाग पिछले चार सालन मा ₹245 करोड़ से ज्यादा के रुपिया खरच कीनिस अअइ। एही रुपियन से पर्यटकों बरे सुविधा बनाई जाइ रही अअइ, अउर साथे-साथे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नवा मौके भी पैदा होय रहे अहैं। सुविधा बढ़इ से पर्यटकों के संख्या लगातार बढ़ि रही अअइ। सूर सरोवर पक्षी विहार आगरा, रपड़ी टूरिज्म फिरोजाबाद अउर हाथी नाला बायोडायवर्सिटी पार्क सोनभद्र एकरे कुछ बड़े उदाहरण अअइ। ईको पर्यटन के चलन पूरी दुनिया मा बढ़ि रहा अअइ अउर पर्यटक नवा-नवा जगह खोजत अहैं।

पहिले जहाँ पर्यटक खाली लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच, सोनभद्र अउर मिर्जापुर तक सीमित रहे, वहीं अब रायबरेली, महाराजगंज, मुजफ्फरनगर, बलिया, कुशीनगर, ललितपुर, प्रयागराज, बांदा, लखनऊ, सहारनपुर अउर गोरखपुर जइसन जिला मा भी जाइके प्राकृतिक दृश्यों के मजा लइ रहे अहैं। एका ध्यान मा रखत भए ईको पर्यटन के नई योजनन के शुरुआत कीन गई अअइ, जेहसे पर्यटकों के संख्या मा बहुत बड़ी बढ़ोत्तरी भई अअइ। दुधवा टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म के सबसे बड़ा आकर्षण बनके उभरा अअइ। एही रिजर्व मा दुर्लभ जंगली जानवर अउर कइयौ तरह के चिरई पर्यटकों का लुभावत अहैं। एही तना पीलीभीत, अमानगढ़ अउर रानीपुर टाइगर रिजर्व पर्यटकों बरे आकर्षण के केंद्र बनत जाइ रहे अहैं।

पर्यटकों के सुविधा बरे प्रदेश सरकार नीक से सीखे हुए ‘नेचर गाइड’ के एक बड़ी टीम तैयार कीनिस अअइ। ई गाइड पर्यटकों का पूरी जानकारी देत अहैं। गाँव के नौजवानन का गाइड, कैंटीन कर्मी, कुक अउर मेंटेनेंस कर्मी के रूप मा ट्रेनिंग दइके काम-धंधा से जोड़ा गवा अअइ। थारू जनजाति के लोगन द्वारा बनाया गवा खाना पर्यटकों का बहुत पसंद आइ रहा अअइ। दुधवा क्षेत्र मा गाँव के लोगन का ‘होम-स्टे’ बनावै बरे बढ़ावा दीन जाइ रहा अअइ, ताकि पर्यटक गाँव के जिंदगी, संस्कृति अउर खान-पान के मजा लइ सकइँ। एसे गाँव के अर्थव्यवस्था का मजबूती मिलि रही अअइ।

दुधवा, कतर्नियाघाट अउर किशनपुर अभ्यारण्यों का जोड़इ वाली ‘विस्टाडोम ट्रेन’ सेवा उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म के एक नई पहिचान बनके उभरी अअइ। ईको टूरिज्म बोर्ड नौजवानन का प्रकृति बचाव अउर ईको टूरिज्म के मुख्य धारा मा लाय रहा अअइ। नवाबगंज (उन्नाव) अउर लाख बहोसी (कन्नौज) पक्षी विहार मा विद्यार्थियन बरे पढ़ाई-लिखाई से जुड़े कार्यक्रम चलाए जाइ रहे अहैं। एकरे अलावा सोनभद्र जिला मा स्थित सलखन जीवाश्म पार्क (फॉसिल पार्क) पूरे भारत बरे एक आकर्षण के केंद्र बनत जाइ रहा अअइ। यहाँ बनी भू-आकृति लगभग 1.4 अरब साल पुरानी अअइ, जउन धरती पर जिंदगी के शुरुआती झलक देखावत है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के बढ़िया अगुवाई मा उत्तर प्रदेश के ईको-टूरिज्म मॉडल के सबसे बड़ी ताकत ई अअइ कि ई खाली पर्यटन नाहीं अअइ, बल्कि गाँव-समाज के विकास, रोजगार, शिक्षा अउर पर्यावरण के बचाव का एक साथे जोड़त है। उत्तर प्रदेश आज धार्मिक पर्यटन से प्राकृतिक पर्यटन के ओर तेजी से आगे बढ़ि रहा अअइ। ईको-टूरिज्म बोर्ड के कोशिश से ई राज्य न खाली भारत के, बल्कि पूरी दुनिया के एक प्रमुख नेचर टूरिज्म डेस्टिनेशन (प्राकृतिक पर्यटन स्थल) बनइ के ओर आगे बढ़ि रहा अअइ।

ईको-पर्यटन एक उभरता हुआ क्षेत्र अअइ, जेमा रोजगार के बहुत मौके अहैं। एक पर्यटक 6 लोगन का काम-धंधा मुहैया करावत है, एसे टूर ऑपरेटर, टैक्सी, गाइड, होटल-रेस्टोरेंट अउर स्थानीय बाजार का काम मिलत है। पर्यटन विभाग पूरे प्रदेश मा धार्मिक अउर आस्था से जुड़े जगह पर बुनियादी सुविधायन उपलब्ध कराय रहा अअइ। साल 2016 के बाद उत्तर प्रदेश मा आए बदलाव से पर्यटकों के संख्या लगातार बढ़ि रही अअइ। पर्यटन अब प्रदेश के अर्थव्यवस्था का अउर तेज बनावै मा महत्वपूर्ण योगदान दइ रहा अअइ। ऊ दिन अब दूर नाहीं अअइ जब पर्यटन विभाग प्रदेश का 1 ट्रिलियन डॉलर के अर्थव्यवस्था बनावै मा सबसे बड़ी भूमिका निभाई।


– केवल, से0नि0 सूचना अधिकारी

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