
उत्तर प्रदेश के मा0 मुख्यमन्तरी योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई अउर नीक दिशा-निर्देशन मा पिछले नौ बरिसन मा प्रदेश मा भारतीय संस्कृति के आस्था के प्रतीक गोवंश के बचाव अउर देख-रेख बरे बहुत बड़े काम सरकार द्वारा कीन गइन अहैं। पहिले के सरकारन के बखत उत्तर प्रदेश मा छुट्टा अउर निराश्रित गोवंश के समस्या बरिसन से किसानन, गाँव अउर सहर के लोगन बरे एक बहुत बड़ी मुसीबत बनी रही। खेत मा खड़ी फसलन के नुकसान, सड़कन पर एक्सीडेंट के डर अउर जानवरन के दयनीय हालत का खाली प्रशासनिक नाहीं, बल्कि मनई के दया से जुड़े गम्भीर मामला मानिके प्रदेश मा गोवंश के बढ़ावै अउर छुट्टा गोवंश के बचाव व चारा-पानी के इंतजाम बरे “निराश्रित गोवंश संरक्षण नीति-2019” लागू कीन गई। आज ई नियम ज़मीनी स्तर पर बहुत बढ़िया नतीजा दइ रहा अअइ।
गोवंश के बचाव अउर देख-रेख प्रदेश सरकार के सबसे बड़ी प्राथमिकता अअइ अउर एही नाते प्रदेश के गाँव-गिरावं मा 6,433 अस्थायी गो आश्रय स्थल, 518 वृहद गो संरक्षण केंद्र अउर 253 कांजी हाउस चलाए जाइ रहे अहैं। एकरे अलावा सहरन मा भी 323 कान्हा गो आश्रय स्थल बनाए गइन अहैं। एही तना पूरे प्रदेश मा कुल 7,527 गो आश्रय स्थलों के एक बहुत मजबूत नेटवर्क तैयार कीन गवा अअइ, जेहमा लगभग 12.39 लाख छुट्टा गोवंश का सुरक्षित रखल जाइ रहा अअइ। सरकार के तरफ से हर एक जानवर बरे रोज ₹50 के हिसाब से रुपिया दीन जाइ रहा अअइ। प्रदेश सरकार गोवंश के ई समस्या का बहुत गम्भीरता से लइके ओकर पूरा इंतजाम कीनिस अअइ।
गो आश्रय स्थलों का चलावै अउर गोवंश के चारा-पानी बरे प्रदेश सरकार हर दिन लगभग ₹7.50 करोड़ के रुपिया खरच कइ रही अअइ। ई खरचा खाली जानवरन के बचाव बरे नाहीं अअइ, बल्कि ई किसानन के सुरक्षा अउर गाँव के अर्थव्यवस्था का मजबूत करइ बरे एक बहुत बड़ा काम अअइ। सरकार के ई लगन साफ देखावत अअइ कि गोवंश बचाव का एक सामाजिक जिम्मेदारी मानिके काम कीन जाइ रहा अअइ।
एही अभियान के एक सबसे मजबूत खम्भा “मा0 मुख्यमन्तरी सहभागिता योजना” अअइ। एही योजना के तहत अब तक 1,14,481 इच्छुक किसानन अउर पशुपालकन का 1,83,389 छुट्टा गोवंश सुपुर्द कीन जाइ चुके अहैं। एसे गोवंश का एक पक्का घर मिलि गवा अअइ अउर साथे-साथे पशुपालकन के कमाई भी बढ़ि रही अअइ। गोवंश के देख-रेख बरे ‘सेन्ट्रल प्रोजेक्ट मानीटरिंग यूनिट’ बनाई गई अअइ, जेहसे निराश्रित गोवंश के निगरानी कीन जाइ सके अउर डी०बी०टी० (DBT) के माध्यम से चारा-पानी के रुपिया सीधे गो आश्रय स्थलों अउर पशुपालकन के बैंक खाता मा भेजा जाइ रहा अअइ। ई योजना गाँव के लोगन का अपने गोड़ पर खड़ा करइ मा एक बहुत बढ़िया पहल साबित होय रही अअइ, जेहमा जानवरन के बचाव अउर रोजी-रोटी दोनों के तालमेल दिखाई दइ रहा अअइ।
प्रदेश मा गो संरक्षण केंद्रन के निर्माण का भी बहुत बढ़ावा दीन गवा अअइ। अब तक 630 वृहद गो संरक्षण केंद्रन के निर्माण के मंजूरी दीन जाइ चुकी अअइ, जेहमा से 539 केंद्र बनिके तैयार अहैं अउर 518 केंद्र चालू कइ दीन गइन अहैं। हर एक बड़े गो संरक्षण केंद्र मा लगभग 400 गोवंश का रखइ के जगह अअइ, अउर एक केंद्र बनावै मा लगभग ₹160.12 लाख के खरचा आवा अअइ। एकरे अलावा वित्तीय वर्ष 2026-27 मा नए बड़े गो संरक्षण केंद्र बनावै बरे ₹100.00 करोड़ के रुपिया के इंतजाम कीन गवा अअइ। प्रदेश सरकार एही दिशा मा लगातार काम बढ़ा रही अअइ।
गोवंश बचाव के इन कोशिश के बहुत नीक असर अब खेती-किसानी मा साफ-साफ दिखाई दइ रहा अअइ। गो आश्रय स्थलों मा जानवरन का नीक से रखइ के नाते खेत मा फसलन के होय वाले नुकसान मा बहुत बड़ी कमी आई अअइ। गो आश्रय स्थलों से निकलइ वाले गोबर से खाद बनाय के प्राकृतिक खेती का बढ़ावा दीन जाइ रहा अअइ। एसे किसानन के कमाई बढ़ी अअइ अउर प्रदेश मा अन्न के पैदावार मा भी लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज कीन गई अअइ। ई कोशिश किसानन बरे बहुत बड़ी राहत बनके उभरी अअइ।
गोवंश के चारा-पानी का पक्का करइ बरे “भूसा-संग्रहण अभियान” एक बहुत बड़ा कदम अअइ। 15 अप्रैल 2026 से 31 मई 2026 तक चलाए जाइ रहे एही अभियान के तहत 60.99 लाख कुन्तल भूसा इकट्ठा करइ के लक्ष्य तय कीन गवा अअइ। अब तक दान के माध्यम से 0.598 लाख कुन्तल अउर खरीद के माध्यम से 5.02 लाख कुन्तल भूसा इकट्ठा कइ लीन गवा अअइ। ई अभियान न खाली चारा के तंगी खतम कइ रहा अअइ, बल्कि समाज मा एक-दूसर के मदद करइ के भाव भी जगाय रहा अअइ।
एकरे साथे, गो आश्रय स्थलों मा रहइ वाले गोवंश का रोज हरा चारा मिलि सकइ, एही बरे चरागाह के जमीन का भी सुधारा जाइ रहा अअइ। प्रदेश मा मौजूद 61,118.85 हेक्टेयर चरागाह के जमीन मा से 11,834.50 हेक्टेयर जमीन का 7,339 गो आश्रय स्थलों से जोड़ दीन गवा अअइ। अब तक 7,364.03 हेक्टेयर जमीन पर हरा चारा बोय दीन गवा अअइ। ई कोशिश गोवंश के सेहत सुधारइ के साथे-साथे आश्रय स्थलों का अपने गोड़ पर खड़ा करइ मा मदद कइ रही अअइ।
सरकार के सोच खाली जानवरन का रखइ तक सीमित नाहीं अअइ, बल्कि गो आश्रय स्थलों का कमाई अउर धंधा के केंद्र बनाउब भी एकर बहुत बड़ा हिस्सा अअइ। पशुपालन विभाग द्वारा गो आश्रय स्थलों का स्वावलम्बी (अपने गोड़ पर खड़ा) बनावै बरे गोबर पेंट, गो दीप, धूपबत्ती, गो लठा, गोबर के गमले, वर्मी कम्पोस्ट अउर जैविक खाद बनावै के यूनिट लगाई जाइ रही अहैं। इन सब कामन से पर्यावरण के बचाव त होइबे करत है, साथे गाँव-गिरावं मा कमाई अउर रोजगार के नवा मौके भी बन रहे अहैं।
मेहरारुन के स्वयं सहायता समूहों के हिस्सेदारी एही काम का अउर मजबूत बनाय रही अअइ। ई समूह गोवंश से जुड़े सामानन का बनावै अउर बाजार मा बेचइ मा बहुत बड़ी भूमिका निभाय रहे अहैं, जेहसे मेहरारुन का कमाई करइ अउर आगे बढ़इ के मौका मिलि रहा अअइ। ई पहल मेहरारुन का मजबूत बनावै के साथे-साथे गाँव के समाज का भी अउर नीक बना रही अअइ।
प्रदेश सरकार के एही अनूठे अउर नवा प्रयास छुट्टा गोवंश के समस्या का एक बहुत बड़े मौके मा बदलि दिहिस अअइ। जहाँ एक तरफ गो आश्रय स्थलों के माध्यम से निराश्रित गोवंश का सुरक्षित रखल जाइ रहा अअइ, वहीं सरकार गो आश्रय स्थलों का आत्मनिर्भर बनावै, गाँव मा रोजगार बढ़ावै, मेहरारुन का आगे बढ़ावै अउर नए-नए तरीका अपनावै बरे लगातार कोशिश कइ रही अअइ। निश्चित तौर पर गोवंश के बचाव के दिशा मा उत्तर प्रदेश सरकार के ई पहल बहुत सराहनीय अअइ अउर देस के दूसर राज्यों बरे भी एक बहुत बढ़िया मिसाल अअइ।
– निधि वर्मा, सूचना अधिकारी