विदेश

पश्चिम एशिया क संकट अफ्रीका बरे बन गवा बड़ा मौका: बदल गे दुनिया भर क व्यापारिक रस्ता

पश्चिम एशिया मा चलत उठापटक अउर लाल सागर क तनाव से अब अफ्रीका दुनिया क व्यापार मा एक बड़ा केंद्र बनि क उभरत है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क बंद होब अउर लाल सागर मा बढ़त तनाव दुनिया भर क व्यापारिक रास्तन क नया रंग-रूप देब सुरू कै दिहिस है। ई फेरबदल की वजह से अफ्रीका धीरे-धीरे बड़े कंटेनर जहाजन क आवाजाही क एक खास केंद्र बनि गवा है। पिछले दू महीना मा ई नाकेबंदी जहाज मालकिन क दूसरा जमीनी रास्ता खोजै पे मजबूर कै दिहिस है, ताकि खाय-पिए क सामान अउर बनल-बनावल माल ट्रकन के जरिए खाड़ी देसन तक पहुँचावा जाय सकै, काहे से कि समुंद्री रास्ता से सीधा माल पहुँचब बंद होइ गवा है।

खाड़ी देसन तक कइसे पहुँचत है माल-असबाब

लाल सागर मा मौजूद जेद्दा इस्लामिक पोर्ट अब एक नया क्षेत्रीय केंद्र बनि गवा है, जहाँ MSC, CMA CGM, Maersk अउर Cosco जइसन बड़ी शिपिंग कंपनियां स्वेज नहर क रास्ता से अपने जहाज भेजत हैं। एकरे बाद माल क ट्रकन के जरिए रेगिस्तानी रस्ता से होत भए शारजाह, बहरीन अउर कुवैत पहुँचावा जात है। ई उहै जगह हैं जहाँ पिछले दू महीना से समुंद्री रस्ता से माल पहुँचाउब नामुमकिन रहा। फ्रेट फॉरवर्डर Ovrsea क सह-संस्थापक आर्थर बारिलास डी थे बताइन कि जेद्दा बंदरगाह क एतनी हैसियत नाहीं है कि उ एतना ढेर माल सँभाल सकै, जेकरे कारन वहाँ भारी भीड़ लगि गइ है। Kpler Marine Traffic के मुताबिक, बिफे क दिन जेद्दा मा 11 कंटेनर जहाज ठाढ़ रहे, जबकि 9 जहाज अपनी बारी क अगोरत रहे। माल उतारै मा औसतन 36 घंटा क बखत लागत है, जे पिछले हफ्ता खाली 17 घंटा रहा।

समुंदर अउर जमीन क नया गलियारा

जहाज मालिक अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क बाहर बने बंदरगाह जइसे ओमान क सोहर अउर UAE क खोरफक्कन व फुजैरा क भी इस्तमाल करत हैं। ई सब बंदरगाह जमीन के रस्ता खाड़ी देसन से जुड़े हैं। जॉर्डन क अकाबा बंदरगाह इराक के बगदाद अउर बसरा तक माल पहुँचावै क एक बड़ा अड्डा बनि गवा है, अउर तुर्की क एक रास्ता भी उत्तरी इराक तक माल पहुँचावत है।

स्वेज नहर से दूरी

ई बदलाव हाल क लड़ाई से पहिले ही सुरू होइ गवा रहा, पै अब एकर सीधा नाता मौजूदा हालात से है। 19 नवंबर 2023 क यमन क तट पे ईरान क समर्थन पाय वाले हूती विद्रोहिन द्वारा एक कंटेनर जहाज पे हमला करै के बाद से जहाजन बाब अल-मंडेब अउर स्वेज नहर के रस्ता से बचब सुरू कै दिहिन। अब जहाज केप ऑफ गुड होप के रस्ता अफ्रीका क चक्कर लगाय के यूरोप पहुँचत हैं। ई अब एक पक्का अउर सब क मानल-जानल रास्ता बनि गवा है। CyclOpe अउर IMF क PortWatch डेटा के मुताबिक, लाल सागर के रस्ता से होय वाला करीब 70 प्रतिशत माल अब केप ऑफ गुड होप के रस्ता से जावत है। पिछले तीन साल मा ई रस्ता पे जहाजन क आवाजाही तीन गुना से बेसी बढ़ि गइ है। मार्च अउर अप्रैल के बीच औसतन रोजे 20 जहाज ई रस्ता से गुजरे, जबकि 2023 मा ई गिनती खाली 6 रही। एकरे उलट, बाब अल-मंडेब से गुजरे वाले जहाजन क गिनती 18 से घटिके खाली 5 रहि गइ है।

बखत, खरचा अउर कमाई पे असर

ई फेरबदल क सीधा असर दुनिया भर क व्यापार पे पड़ा है। एशिया अउर यूरोप के बीच माल पहुँचावै मा औसतन दू हफ्ता क बखत बढ़ि गवा है। सप्लाई चेन के माहिरन क मानब है कि उहै रफ्तार बनाये रखै बरे अब 30–50 प्रतिशत बेसी तेल अउर 10–20 प्रतिशत बेसी जहाजन क जरूरत पड़त है। ड्रूरी फ्रेट इंडेक्स के मुताबिक, 40-फुट कंटेनर क शिपिंग खरचा पिछले साल के मुकाबले ई अप्रैल मा 14 प्रतिशत बढ़ि गवा है। जहाँ अफ्रीका क कुछ बंदरगाह जइसे टैंजर मेड मा काम-काज बढ़ा है, वहीं मिस्र क बड़ा घाटा उठावै क पड़ा है। स्वेज नहर से होय वाली कमाई 2024 मा गिरिके 7 अरब डॉलर रहि गइ, जे 2023 के मुकाबले 60 प्रतिशत से बेसी कम है।

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