उत्तरप्रदेशराज्य

राज्यपाल के निर्देश: ‘नैक’ अउर ‘एनआईआरएफ’ मा झंडा गाड़ै बरे साथ मिलिके काम करैं विश्वविद्यालय अउर कॉलेज

कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने काशी विद्यापीठ से जुड़े कॉलेज के कीन समीक्षा; कहिन—लईकन का किताबी ज्ञान के साथे प्राचीन पांडुलिपियों अउर भारतीय परम्परा से भी जोड़ब जरूरी।

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल अउर राज्य विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल के अगुवाई मा आज ‘जन भवन’ के गांधी सभागार मा एक बहुत जरूरी बइठक भई। एही बइठक मा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से जुड़े सरकारी अउर सहायता प्राप्त (वित्तपोषित) कॉलेज के कामकाज के समीक्षा कीन गई।

राज्यपाल जी के कोशिशों से अब प्रदेश के विश्वविद्यालय पढ़ाई-लिखाई अउर खोज (शोध) मा आगे बढ़ि रहे अहैं। अब सरकार के जोर अअइ कि कॉलेज मा भी पढ़ाई के स्तर अइसन होई कि ऊ ‘नैक’ (NAAC) अउर ‘एनआईआरएफ’ (NIRF) रैंकिंग मा ऊँचा मुकाम पा सकें।

कॉलेज अउर यूनिवर्सिटी मा तालमेल जरूरी:

बइठक मा राज्यपाल जी ने कहिन कि कॉलेज मा लईकन के कम संख्या अउर गुरु-चेला (शिक्षक-विद्यार्थी) अनुपात का सुधारब बहुत जरूरी अअइ। ऊ हुक्म दिहिन कि यूनिवर्सिटी अउर कॉलेज आपस मा मिलिके काम करैं। जहाँ यूनिवर्सिटी मा कछू नीक होय रहा होय, हुवाँ कॉलेज के लईकन का बोलाइ जाय, अउर जहाँ कॉलेज मा कछू बढ़िया होय, हुवाँ यूनिवर्सिटी के लईका जाइके सीखें।

पुरानी लकीर छोड़िके नया सोचइ के जरूरत:

राज्यपाल जी ने साफ़ कहिन कि बखत बदल रहा अअइ, एही नाते पुरानी नीतियन अउर नियमन का बदलइ के जरूरत अअइ। ऊ कहिन कि हर विभाग साल मा कम से कम एक बार बइठक कइके दुनिया मा होय रहे बदलाव के हिसाब से अपनी नीतियां बनावै। साथहीं, ‘एलुमनाई फंड’ के पइसा पूरी ईमानदारी से खाली लईकन के भलाई बरे खरच कीन जाय।

प्राचीन ज्ञान अउर पांडुलिपियों से जुड़ाव:

श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के पांडुलिपियों के जिक्र कीन अअइ। ऊ कहिन कि हुवाँ 100 से जादा अइसन पुरान लिखाई (पांडुलिपियां) सुरक्षित अहैं, जेहमा हमार पुरान ज्ञान छुपा अअइ। लईकन का अइसन जगहन पर घुमावै का चाही जेहसे ऊ अपनी संस्कृति का जानि सकें। ऊ डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के पुरान किताबन के भी मिसाल दिहिन।

लईकन बरे राज्यपाल के कुछ खास सुझाव:

  • लाइब्रेरी मा एक घण्टा: हर लईके बरे लाइब्रेरी मा कम से कम एक घण्टा बइठब जरूरी कीन जाय।
  • गाँव गोद लेब: हर कॉलेज कम से कम दुई गाँव गोद लेय अउर हुवाँ के लईकन बरे प्रतियोगिता करावै।
  • एआई (AI) के सीमित उपयोग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जादा इस्तेमाल से लईकन के अपनी सोच-विचार (रचनात्मकता) कम होई सकत अअइ, एही नाते एका हिसाब से इस्तेमाल कीन जाय।
  • शिक्षा भ्रमण (Tour): लईकन का बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय, गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी अउर सोमनाथ मंदिर जइसन ऐतिहासिक जगहन पर लेइ जाय का चाही।

पर्यावरण अउर सामाजिक सेवा:

राज्यपाल जी ने लईकन अउर गुरुवन से कहिन कि ऊ अपनी माता जी के नाम पर एक पेड़ जरूर लगावैं। ऊ लईकन का अग्निवीर जइसन ट्रेनिंग योजनन के बारे मा बतावै अउर उनका खेल-कूद व सामाजिक कामन से जोड़इ के हुक्म भी दिहिन। ऊ कहिन कि जब हमार कॉलेज तरक्की करिहैं, तबहीं देस के तरक्की पक्की होई।

एही मौका पर अपर मुख्य सचिव डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, कुलपति अउर कइयौ बड़े अधिकारी अउर शिक्षक मौजूद रहे।

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