उत्तरप्रदेशराज्य

संत कबीर के विचारन क दुनिया भर मा पहुँचावे क तैयारी: ‘पंचतत्व योजना’ पर भई बड़की चर्चा

संत कबीर अकादमी ‘पंचतत्व योजना’ के तहत कबीर साहेब के विचार, उनकर दर्शन अउर लोक परंपरा क सहेजइ अउर बढ़ावा देवे के तईं बउत नीक योजना अउर कार्यक्रमन पर चर्चा कीहिस। बैठक मा रिसर्च (शोध), सर्वे, किताबन क छपाई, कबीर पर आधारित नाच-गाना अउर मैगजीन निकाले के कई प्रस्ताव रखे गइन।

संस्थान के निदेशक श्री अतुल द्विवेदी जी ई जानकारी दिहीन। उ बताएन् कि बैठक मा प्रो. मनोज कुमार तिवारी सुझाव दिहीन कि दर्शनशास्त्र के क्षेत्र मा कबीर दास जी पर बउत गहरा रिसर्च कीन जा सकत है। उ कहिन कि यूनिवर्सिटी के जउन नया लड़का (JRF शोधार्थी) हैं, उनका सेमिनार मा जोड़ा जाय ताकि युवा पीढ़ी कबीर दर्शन क समझ सकै।

डॉ. देवेन्द्र पाल कहिन कि कबीर जी क भाषा अउर ‘नाथ पंथ’ जइसन विषय पर खास सेमिनार होय के चाही। ओकरे बाद प्रो. उषा सिंह ललित कला अउर संस्कृति से जुड़ी वर्कशॉप (कार्यशाला) करावे क बात कहिन।

‘कबीर पंचामृत’ नाम से छपी मैगजीन: प्रो. अनुराग द्विवेदी सुझाव दिहीन कि अकादमी जउन मैगजीन निकाली, ओकर नाम ‘कबीर पंचामृत’ रखा जाय। ई मैगजीन साल मा दो बार (छह-छह महीना मा) छपे अउर एकर डिजाइन विभाग खुदै तैयार करी।

आमी नदी पर होई रिसर्च: बैठक मा गोरखपुर यूनिवर्सिटी क कुलपति प्रो. पूनम टंडन कहिन कि दीक्षांत समारोह मा शेखर सेन क सांस्कृतिक प्रोग्राम करवावा जाय। साथै भूगोल विभाग के मदद से आमी नदी पर रिसर्च अउर डॉक्यूमेंटेशन क काम कीन जाय।

बैठक के मुख्य फैसला:

  • पं. दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी के साथ मिलके रिसर्च के काम क तेजी दीन जाई।
  • जूनियर अउर सीनियर रिसर्च फेलोशिप के जरिए बच्चन क चुनके कबीर जी से जुड़े अलग-अलग विषय पर शोध करवावा जाई।
  • पूरे साल सेमिनार, वर्कशॉप, पेंटिंग प्रतियोगिता अउर कबीर पर आधारित कार्यक्रम होइहैं।
  • करीब 20 नई किताबन क छपाई अउर छमाही मैगजीन निकाले पर सहमति बनी।

ई बैठक मा प्रो. पूनम टंडन (कुलपति, गोरखपुर यूनिवर्सिटी) अउर अतुल द्विवेदी (निदेशक, संत कबीर अकादमी, मगहर) खास तौर पर मौजूद रहेन। सब जन मिलके संकल्प लीहिन कि कबीर जी क सीख अउर इंसानियत क बात जन-जन तक पहुँचावा जाई।

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