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बेमारी नीक होइ कि अउर बिगड़ी? अब बस एकै ‘ब्लड टेस्ट’ से चलि जाई पता

अब एक्के ब्लड टेस्ट से ई पहिलेन पता चलि जाई कि कउनो मनई क बेमारी आगे कइसे बढ़ी अउर ओका इलाज क कइसन असर होइ। ई जानकारी एक नये रिसर्च (अध्ययन) मा सोझा आई है।

लंदन क इम्पीरियल कालेज क वैज्ञानिकन क अगुवाई मा शोध करइ वालन क कहना है कि ‘वेलोसीडी’ (VeloCD) नाउँ क ई टेस्ट विधि से ई अंदाज़ा लगावा जाइ सकत है कि तेज बुखार से तपइ वाले बच्चन क हाल सुधरी कि अउर बिगड़ी। अउर तउ अउर, ईहू पता चलि जाई कि नीक-ठाक सयान मनई अगर कउनो वायरस क चपेट मा आ जात हन, तउ ओका फ्लू या कोविड-19 होइ क कतनी संसो (संभावना) है।

ई टेस्ट क पूरी बात एक सबूत वाले अध्ययन मा बताई गयी है अउर ई ‘जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस’ मा छपी है। ई खून मा मौजूद खास मार्करन क नापत है, जेसे ई देखि जा सकत है कि बेमारी के खिलाफ जीन कइसन काम करत हन, ताकि बेमारी कतना बढ़ि सकत है ओकर अंदाज़ा लगावा जाइ सकै। जइसे कि रोज क ब्लड टेस्ट (जैसे Hba1c, लिपिड प्रोफाइल) सुगर अउर दिल क बेमारी सम्हारइ मा मदद करत हन, वैसहने ईहो काम करी।

बेमारी काहे भई, ई जानइ मा मिली मदद

लंदन क इम्पीरियल कालेज मा संक्रामक रोग विभाग क मुखिया अउर मुख्य लेखक आब्रे कन्निंगटन क कहना है कि “हमका लागत है कि ई टेस्ट मरीज अउर स्वास्थ्य कर्मिन खातिर बहुतै फाइदेमंद साबित होइ। डाक्टरन क अइसन टेस्ट मिल जाइ जेसे बेमारी क आगे क हाल पता चलि जाय, तउ सही समय पर सही मरीज तक सही इलाज पहुँचावइ मा बहुत मदद मिली।”

शोध करइ वालन बतावा कि जब कउनो मनई बेमार होत है, तउ जीन क मेल ‘ऑन’ अउर ‘ऑफ’ होत रहत है, जेसे आरएनए (RNA) मार्कर पैदा होत हन जेका खून मा पहचाना जाइ सकत है। अध्ययन से ई पता चला है कि आरएनए मार्करन क तरीका देखि कै ई बतावा जाइ सकत है कि बेमारी क असली वजह का है, जइसे कि बुखार बैक्टीरिया क वजह से है या वायरस क नाते।

एक्के कोशिका क भी होइ सकी अध्ययन

टीम ‘आरएनए वेलासिटी’ नाउँ क एक तरीका इस्तेमाल करिस है, जेका शुरू मा एक्के कोशिका क अध्ययन खातिर बनावा गवा रहा। मुला अब एका पूरे खून क सैंपल जाँचइ खातिर अउर नीक बनावा गवा है, ताकि ई पता चलि सकै कि का मार्कर पहिलेन से बताइ सकत हन कि मरीज क हाल सुधरी कि बिगड़ी अउर ओका दवा-दारू क कइसन असर होइ।

ई तरीके से शोध करइ वालन क ई देखइ मा मदद मिली कि कउन जीन चालू (सक्रिय) होत हन अउर का बिना बार-बार जाँच किये ओकर असर समय क साथ बढ़ि रहा है या घटि रहा है।

आगे क हाल क पहिलेन मिलि जाई जानकारी

मिसाल क तौर पर, टीम ई अंदाज़ा लगाइ सकत रही कि मनई क खून मा जीन क बदलाव कउनो गंभीर बेमारी क ओर जात है या अइसन बेमारी क ओर जे अपने आप नीक होइ जाई। शोध लिखइ वालन बतावा कि हम ‘वेलोसीडी’ तैयार कीन है, जो बस एक बार आरएनए नमूना लइ कै इन्फेक्शन (संक्रमण) क भविष्यवाणी कइ सकत है।

उन्हों कहिन कि ई इन्फ्लूएंजा ए अउर एसएआरएस-सीओवी-2 (SARS-CoV-2) संक्रमण क अध्ययन मा आगे क हाल अउर बेमारी क स्थिति क पहिलेन बताइ सकत है।

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